14.4.10

अलविदा नाना जी : त्रयोदशी दिनांक १३ अपैल २०१० पर विशेष

नाना जी को विदा करने सारे कुटुम्ब के लोगों  ने वही किया जो नानाजी तय कर चुके थे, उनके कहे और लिखे मुताबिक शवयात्रा के दौरान कोई रोयेगा नहीं सिर्फ़ और सिर्फ़ भजन गाये जावें . उन्हौने जैसा कहा वैसा हुआ. नाना जी ने कहा था ओर लिखा भी था - पुरुष की मृत-देह पर पत्नि के सिर से  सौभाग्य चिन्ह मिटाना, चूडियां तुडवाना न केवल अशोभनीय है बल्कि नारी के लिये अपमान कारक भी .......मैं अपनी पत्नि को सौभाग्य चिन्ह मिटाने या न मिटाने के निर्णय का अधिकार सौंपने का पक्षधर हूं....ये बातें नाना जी ने अपनी लिखित वसीयत में कही . अपने सेवा काल में उन्हौने एक मकान खरीदा उसमें रहे किंतु अचानक सत्य-साई-सेवा संगठन जबलपुर के द्वारा निर्मित हो रहे साई-परिसर के निर्माण के लिये उसे बेच कर धन देना सबको चकित कर गया . एक बार मेरे मन में आया कि पूछूं कि आपने यह क्यों किया किंतु जब मुझे ध्यान आया कि लोभ  मुक्त होने का सबक दे रहे हैं नाना जी तो मुंह से वो सवाल निकलता कैसे. ?
वन विभाग में नाकेदार के पद से भर्ति हुए न्यायिक सेवा में आये और फ़िर नाना जी ने  विधि की परीक्षा स्वर्ण-पदक के साथ पास की. हाथों  में पदक डिग्री, लिये घर आये किंतु शायद यह सवाल उनके दिमाग को परेशान कर रहा था कि पदक में सोने के नाम पर सोने का पालिश मात्र है सो कुलपति से पत्राचार कर सचाई का एहसास दिलाने की कोशिश की किंतु कोई उत्तर न मिलने पर नानाजी ने माननीय न्यायालय से अपील कर दी जो अभी फ़ैसले के इंतज़ार में है....?
नाना जी की अन्तिम इच्छा  थी कि उनकी मृत्यु का स्वागत हो हिन्दू रीति रिवाज़ो का पालन हो शोक न मनाए मृत्यु के बाद घर का वातावरण अध्यात्म मय भक्ति मय हो मै ईश्वर से मिलने जा रहा हूं तब शोक क्यो करना . 
उनकी इच्छा के अनुरूप एकादश गात्र के दिन सह-पिण्डी का कार्य क्रम किया गया. सहपिण्डी पूजन के समय वेद मंत्रोत्तचार के साथ शहनाई पर हिण्दू भजनों की धुने रमज़ान भाई ने गुंजाई.......साथ ही गरीबों को जिन्हैं ”साई-ने नारायण माना है” को पूरे कुटुम्ब ने उत्साह से सम्मान से भोज कराया .
रात में चुपचाप कम्बल उढाना,कु्ष्ठाश्रम,वृद्धाश्रम ,सरकारी अस्पतालों में ज़रूरत मंदों को तलाशते नानाजी अब हमारे बीच नहीं उनके किये कार्य कम से कम मुझे तो प्रेरणा देते रहेंगे

11.4.10

सांड कैसे कैसे

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एक बुजुर्ग लेखक  अपने शिष्य को समझा रहे थे -"आव देखा न ताव टपका दिये परसाई के रटे रटाए चंद वाक्य परसाई के शब्दों का अर्थ जानने समझने के लिये उसे जीना होगा. परसाई को बिछौना समझ लिये हो का.?, दे  दिया विकलांग श्रद्धा को रोकने का नुस्खा हमको. अरे एक तो चोरी खुद किये उपर से कोतवाल को लगे बताने चोर का हुलिया . अगर  पुलिस के चोर खोजी कुत्ते नें सूंघ लिया तो सांप सूंघ जायेगा . ....?
 तभी दौनो के पास से एक सांड निकला चेला चिल्लाया-जाने सांड कैसे कैसे ऐरा घूम रहे हैं इन दिनों कम्बख्त मुन्सीपाल्टी वाले इनको दबोच कानी हाउस कब ले जावेगें राम जाने.
बात को नया मोड देता चेला गुरु से बोला:-गुरु जी, अब बताइये दस साल हो गये एक भी सम्मान नसीब न हुआ मुझे ?
तो, क्या कबीर को कोई डी-लिट मिली,तुलसी को बुकर मिला ?
अरे गुरु जी , मुझे तो शहर के लोग देदें इत्ता काफ़ी है .
सम्मान में क्या मिलता है बता दिलवा देता हूं ?
गुरु, शाल,श्रीफ़ल,मोमेन्टो...और क्या.....?
मूर्ख, सम्मान के नारीयल की ही चटनी बनाये गा क्या...इत्ती गर्मी है शाल चाहता है, कांच के मोमेंटो चाहिये तुझे इस के लिये हिन्दी मैया की सेवा का नाटक कर रहा था ? जानता हूं तुझे आदमी से हट के रुतबा चाहिये उन अखबारों में नाम चाहिये जिसको रद्दी-पेप्पोर बाला पुडे बनाने बेच आता है, या कोई बच्चे की ................ साफ़ करने में काम आता है उसमें फ़ोटो छपाना है..वाह से हिन्दी-सुत, तुझे सूत भर भी अकल नईं है. जा जुमले रट के बने साहित्यकार. मैने तुझे मुक्त किया जा भाग जा घूम उसी छुट्टॆ-सांड सा जो पिछले नुक्कड पे मिला था.
गुरु से मुक्त हुआ साहित्यकार इन दिनों ब्लागिंग कर रहा है जहां साड सा एन सडक पे गोबर कर देता है. चाहे किसी का पैर कोई आहत हो उसे चरे हुए को निकालना है सो निकाल रहा है. इधर न तो संपादक के खेद सहित का डर न ही ज़्यादा प्रतिस्पर्धी ........ कभी इसकी पीठ खुजा आता तो कभी उसकी........ बेचारा करे भी तो क्या. दफ़्तर में मुफ़्त का कम्प्यूटर फ़िर हिन्दी की सेवा का संकल्प... हा हा हा......?

10.4.10

सानिया कहा था न कल्लू पहलवान हुंकार भरेंगें

ये रिंग है कल्लू भाई
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  लो भाई सानिया मिर्ज़ा को और उनके परिवार भोपाल की एक समाजी संस्था  ने कौम  से बाहर का रास्ता  दिखा दिया है. ?ये खबर सानिया मिर्ज़ा दूल्हे मियां सोएब मलिक और सानिया के अम्मी अब्बू की सेहत पर कितना असर डालती है  कोई नहीं जानता  किंतु    अध्य्क्ष कल्लू पहलवान ज़रूर प्रदेश भर में छाये रहे दिन भर .  मियां कल्लू पहलवान कुछ भी कल्लो बो तो ले गिया भिया पैले से इतिल्ला कर देते शोयेब को  और सानिया को तो शायद वो आपकी पेलवानी  {”पहलवानी”} का मान रख लेते भाई मियां ! अब क्या जाओ रमजानी के टपरे से ज़र्दे वाला पान लियाओ आज़ अखबार में नाम छपा है शायद मुफ़्त में इज़्ज़त सहित रमज़ानी गिलौरी पेश करे ...
भाई- मियां हम तो सुनते हैं ये गीत भाई 

8.4.10

अरविंद मिश्रा जी हाईप तो सानिया मिर्ज़ा को किया गया है न कि महफ़ूज़ को

 मित्रो आज़ अगर महफ़ूज़ अली की उपलब्धि के समाचार को मैने पोस्ट किया अरविंद मिश्रा जी ने ओर उसके पहले ”गुमनाम ब्लाग समाचार नामक व्यक्ति” अज़ीबो गरीब टिप्पणियां कीं हैं मित्रो सच तो ये है कि हम आकाश की ओर मुंह करके थूकने की अभद्र कोशिश में लगे रहतें हैं
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पाडकास्ट के पहले भाग में सुनिए श्री बी एस पाबला,महेंद्र मिश्रा जी ,महफूज़ अली एवं मेरी वार्ता 
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    निर्णय आपके हाथ है
दूसरे भाग में चर्चा में शामिल; हुए मेरे साथ अजय झा,महफूज़
       

                       
   
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4.4.10

नियमों की भेंट न चढ जाये संजय की खेल प्रतिभा

https://mail.google.com/mail/?ui=2&ik=f28b6629c4&view=att&th=127c7f2999c1dab8&attid=0.2&disp=inline&realattid=f_g7mmn01o1&zw 

   सानिया से ज़्यादा ज़रूरी है संजय पर बात                          


जबलपुर नगर का युवा पावर लिफ़्टिंग खिलाडी संजय बिल्लोरे  का चयन मंगोलिया की राजधानी उलानबटर में दिनांक ०१ मई से ५ मई तक आयोजित एशियन पावर लिफ़्टिंग चैम्पियन शिप २०१० हेतु इंडियन-पावर-लिफ़्टिंग फ़ेडरेशन व्दारा किया गया  है. किंतु इस   खेल के  नान औलौंपिक श्रेणी का होने के कारण न तो राज्य सरकार से और न ही भारत सरकार से   खिलाडी को कोई मदद शासकीय तौर पर मिलना कठिन हो गया है. एक मध्यम वर्गीय युवा खेल-प्रतिभा को  मंगोलिया तक की  यात्रा के साधन जुटाने में जो ज़द्दो-ज़हद करनी पड रही आत्म विश्वास से भरे इस युवक को पूरा भरोसा है अपने बेहतर प्रदर्शन के लिये: संजय का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हौने वर्ष २००७ में ताईवान में आयोजित एशियन पावर लिफ़्टिंग प्रतियोगिता में रज़त-पदक जीता था.ओर्डिनेंस फ़ैक्ट्री खमरिया में मशीनिष्ट के पद पर कार्यरत संजय बिल्लोरे को इस खेल यात्रा के लिये लगभग एक लाख रुपयों की ज़रूरत है. यदि वे १५ अप्रेल तक फ़ेडरेशन को यात्रा व्यय हेतु राशि न भेज सके तो उनका चयन निरस्त कर दिया जायेगा. संजय ने यात्रा-व्यय के लिये अपने विभाग को आवेदन कर दिया है किंतु नियमों का हावाला देते हुए विभाग ने उनसे उम्मीद न रखने की  सलाह दी है यद्यपि फ़ेडरेशन ने  उनका आवेदन कलकत्ता स्थित मुख्यालय को भेज दिया है. 
सलैक्शन लैटर 

3.4.10

श्रीराम चौरे जी का निधन

मेरे नाना जी सदाचार  की प्रतिमा  उच्च-न्यायालय,मध्य-प्रदेश सेवा निवृत अतिरिक्त रजिस्ट्रार सत्य साई सेवा समिति के संस्थापक सदस्य, नार्मदीय-ब्राह्मण-समाज के वरिष्ठ नागरिक  एवम श्री राजेन्द्र चौरे श्री विजय चौरे के पिता वयोवृद्ध श्री श्रीराम चौरे का दु:खद निधन 90 वर्ष की आयु में नागपुर में हुआ. आज इस महामना को अंतिम विदा देने प्रस्थान कर रहा हूं 

                                           

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विश्व का सबसे खतरनाक बुजुर्ग : जॉर्ज सोरोस

                जॉर्ज सोरोस (जॉर्ज सोरस पर आरोप है कि वह भारत में धार्मिक वैमनस्यता फैलाने में सबसे आगे है इसके लिए उसने कुछ फंड...