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हिंदी दिवस पर विशेष : लेट अस ट्राय टू स्पीक हिन्दी

                       राजभाषा,राष्ट्रभाषा यानी ग़रीब-देश की ग़रीब-भाषा को नमन करते हुए हम भारतवासी अपनी भाषा के प्रति कितने ईमानदार हैं इस बात का अंदाज़ पहले-दर्ज़े के कूपे में बिराजे मेरे सह यात्री जोड़े के मेरे एवम श्रीमति जी के बीच चल रही हिंदी  भाषा में बातचीत पर किये गये तंज़ से लगाया जा सकता है.  Ramola Do you know how to talk in hind..? No, i don't want this  pl. let us try to speek hindi...                     और वे हमारी  ओर देख कर मुस्कुरा दिये. बेटी शिवानी को जो हमसे हिंदी में बात कर रही थी ने उनके हाव-भाव बांच लिये. झट मेरे बस्ते से "आर.के.नारायण" की किताब ” Swami & Friends ”ली और पढ़ने लगी.मेरी प्रश्नवाचक निगाहों को पढ़ते हुए शिवानी बोली :-   "I am trying to know about india through Narayana "               उस वक़्त शिवानी दसवें दर्ज़े में थी.उसे राष्ट्र भाषा के प्रयोग की वज़ह से उसके मां-बाप का अपमान कितना दु:खी कर-गया था इसका अंदाज़ मुझे न था.मैं समझ गया कि वो उस जोड़े को बता देना चाहती थी कि मेरे पापा गंवार नहीं हैं.. कम-से-कम