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"संस्कारधानी जबलपुर की चर्चित कोरीओग्राफ़र :स्वर्गीय भारती सराफ "

14 अक्टूबर 1976 को पिता श्री भगवान दास सराफ - माता श्रीमती विमला देवी के घर दूसरी बेटी को रूप में जन्मी " भारती सराफ " जो एक दिन कत्थक का माइल -स्टोन बनेंगी कोई नहीं जानता था.... ! किंतु पत्थरों के इस शहर की तासीर गज़ब है कला साधना करते यहाँ कोई हताश कभी न हुआ था न होगा ये तो तय शुदा है......! कुमारी भारती सराफ का जीवन कला साधना का पर्याय था ।शरदोत्सव 07 की एक शाम मुझे अच्छी तरह याद है जब मुझे भी ज़बावदारी का एहसास करा गयी थी भारती जी हाँ ......मुझे याद आ रहा है वो चेहरा सांवली गुरु गंभीर गहरी आंखों वाली भारती पिछले बरस अपने कलाकारों को इकट्ठा कर साधन का इंतज़ार कर रही थी मैंने उसे उस बस में बैठा ना चाहा जो कलाकारों को लाने ले जाने मुझे लगा भारती के चेहरे पर कोई चिंता है सो पूछ ही लिया -क्या,कोई परेशानी है ? "सर,बस तो गलियों में नहीं जाएगी " "हाँ,ये बात तो है...! फ़िर क्या करुँ.....?" "................"एक दीर्घ मौन गोया कह रही हो की सर कोई रास्त