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हर दिल अज़ीज़ समीरलाल को बधाईयां

"*****"    जबलपुर की सड़कों पर लम्ब्रैटा पर चलने वाला एक गोलमटोल  फ़ुर्तीला व्यक्ति अचानक गुम हो जाता है..सोचा कि मित्रों की चौकियों पर उसकी रपट लिखा दूं. लिखवाई भी तब किसी ने बताया .."अच्छा वो, हां फ़ारेन निकल गया "            भाग्यवान लोग फ़ारेन जाते थे तब, हवाई जहाज़ में उड़कर विदेश जाना एक बड़ी बात होती थी. उससे भी बड़ी बात भारत में ही नौकरी लगना रात दिन एक करके हम भी नौकरी शुदा हो गये.शहर से बाहर हुए हम सच  भूल चुके थे कई लोगों को .भुलावे वाली उस सूची में ये गोल मटोल टाइप के महाशय भी शुमार हैं.न तो नाम याद रहा न पता बस इतना याद रहा कि एक अफ़सर का लड़का जो गोल मटोल शांत टाईप का आता था मित्र मंडलीयों में वो बाहर है.     जबलपुर के  सदर काफ़ी हाउस,सिटी काफ़ी हाउस,अन्ना वाला सदर का काफ़ी हाउस,   में पाई जाने वाली इस शख्शियत से मुलाक़ात कराने की ज़िम्मेदारी जबलपुरिया दोस्तों के सर रही है 87 से 89 के बीच किंतु 2007  में तो कमाल हो गया नेट से जुड़ा ब्लागिंग के साथ मेरा नाता कायम हुआ कि भाई से मुलाक़ात एक टिप्पणी ने कराई जो उडनतश्तरी की जानिब से थी. विदेश में बसी यह तश

सबने कहा ज़िगरे वाले इंसान हैं समीर लाल

पूरब का जात्री पश्चिम की रात्री ’देख लूँ तो चलूँ’ के विमोचन समारोह : दिनांक 18/01/२०११ आधिकारिक रपट  (देर के लिये माफ़ी नामा सहित )              उस दिन किसी ने कहा   देश विदेश में ख्याति अर्जित करेगी किताब , तो किसी ने माना जिगरा है समीर में ज़मीन से जुड़े रहने का , तो कोई कह रहा था वाह अपनी तरह का अनोखा प्रवाह है . किसी को किताब बनाम उपन्यासिका - ’ ट्रेवलाग ’ लगी तो किसी को रपट का औपन्यासिक स्वरूप किंतु एक बात सभी ने स्वीकारी है कि : ’ समीरलाल एक ज़िगरे वाला यानि करेज़ियस व्यक्ति तो है ही लेखक भी उतना ही ज़िगरा वाला है …!’        जी हां , यही तो हुआ समीरलाल की कृति ’देख लूँ तो चलूँ’ के विमोचन समारोह के दौरान  दिनांक 18/01/2011 के दिन कार्यक्रम के औपचारिक शुभारम्भ में अथितियों स्वागत पुष्पमालाओं से किया गया फ़िर शुरु हुआ क्रमश : अभिव्यक्तियों का सिलसिला सबसे पहले आहूत किये गये समीर जी के पिता श्रीयुत पी०के०लाल जिन्हौंने बता दिया कि -’ हां पूत के पांव पालने में नज़र आ गये थे जब बालपन में समीर ने इंजिनियर्स पर एक तंज लिखा था . श्रीमति साधना लाल को जब आहूत किया तो पता चला कि वे इस बात के