| साभार: "स्वार्थ"ब्लाग से |
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शनिवार, फ़रवरी 19, 2011
संगीता पुरी जी की कहानी मेरी जुबानी:अर्चना चावजी (पाडकास्ट)
गुरुवार, दिसंबर 09, 2010
नाराज ना होना ..तकरार को दरार ना बनने देना
अंजना(गुड़िया) जी का आलेख यहाँ पढ़ें
किसी तकरार को दरार ना बनने देना
मेरी गलती पे चाहे जितना डांट देना,
पर अगली बार मिलो जो मुझसे,
बस एक बार दिल से मुस्कुरा देना
रंजिश ने हज़ारों दिलों में कब्रिस्तान बनाये हैं,
तुम अपने दिल में दोस्ती को धड़कने देना
बात होगी हो बात पे बात निकलेगी,
किसी तकरार को दरार ना बनने देना
नफरत, कड़वाहट, खुदगर्ज़ी नहीं मंज़ूर मुझे,
इन में से किसी की भी ना चलने देना
कुछ तो है जो हमारे खून का रंग मिलता है,
इसमें मज़हब-ओ-सरहदों का रंग ना मिलने देना
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