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"फ़ुरसतिया का माईन्यूट आब्ज़र्वेशन पाईंट : सर्वहारा पुलिया एवम ज़ेंडर-विभेद"

औरों की तरह मशहूर चिट्ठाकार  अनूप शुक्ल जी उर्फ़ फ़ुरसतिया रोज़िन्ना सुबह सकारे टहला करते हैं. जबलपुर में अनूप जी का सुबह सवेरे माईन्यूट आब्ज़र्वेशन पाईंट है एक "पुलिया" जिसे उनने सर्वहारा पुलिया नाम दिया है.इस पुलिया तक पहुंचे  नहीं कि बस सेलफ़ोन से फ़ोटू निकाले और बस फ़ेसबुक पर लाद देते हैं.   आज़ भी एक फ़ोटो उनने  फ़ोटो लादा है वो तो बच्चों जिसमें एक लड़की दूसरा लड़का है. दौनों ही सर्वहारा-पुलिया पर बैठे हैं  एक असहज दूरी बना के. इस फ़ोटो पर " भाई सतीष चंद्र सत्यार्थी " का कमेंट पाया गया - " जेंडर गैप... " बस आलेख यहीं से शुरू करना चाहता हूं..........                       भारतीय सामाजिक व्यवस्था में जैंडर गैप की बुनियाद शैशव काल से ही जन्म ले लेती है इस पर कोई दो राय नहीं है. बाल्यावस्था आते आते तक बच्चों के मन में ये बात गहरी और पुख्ता होती चली जाती है.  वास्तविकता की पड़ताल करें तो "जैंडर-विभेद" सामाजिक सोच का नतीज़ा है. नर संतान के बारे में सोच कर अभिभावक ही नहीं वरन उनसे सरोकार रखने वाले लोग भी... बहुत आशावादी होकर कहा करते हैं.. वाह , बेटा