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मिड डॆ मील व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन की दरकार

मिड डॆ मील व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन की दरकार से अब इंकार बेमानी होगा. मिड - डे मील  से 22 बच्चों की मौत,  के बाद व्यवस्था में अगर कोई परिवर्तन न हुआ तो बेशक कुछ और हादसे हमारे सामने होंगे. स्कूलों मे मिड डॆ मील के लिये मौज़ूदा व्यवस्था निरापद कदापि इस वज़ह से नहीं कही जा सकती क्योंकि गुणवत्ता और स्वच्छ्ता इसके सबसे महत्वपूर्ण बिंदू हैं  जिन पर नज़र रखना सहज नहीं है. खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में.   देश की सर्वोच्च अदालत के निर्देश के बाद  लागू  इस व्यवस्था में सरकारों ने काफ़ी अधिक कोशिशें कीं हैं पर आप देखेंगे कि सरकारी मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम में स्तरीय गुणवत्ता और स्वच्छ्ता को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं. यहां स्वयम जागरूक जनता भी व्यवस्था की अनदेखी की दोषी है. ऐसा नहीं है कि सरकार ने ”सु्रक्षा के तौर तरीके न सुझाए होंगे ” परन्तु निचले स्तर तक गुणवत्ता और स्वच्छ्ता के मापदण्डों को हू बहू लागू किया जाना कठिन है. गुणवत्ता और स्वच्छ्ता के मापदण्डों की अनदेखी का परिणाम है बिहार. मूल रूप से मिड डे मील व्यवस्था को निरापद बनाने के लिये ज़रूरी है कि सरकारें केवल स्वच्छ्ता