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मांगो तो हजूर दिल और जाँ सब कुछ तुमको दे दूंगीं

वो दूर से देख मुस्कुराती शोख चंचल नयनो वाली सुकन्या मुझे भा गई ऊपर की जितनी भी तारिकाएँ हैं उनका हुस्न फीका पड़ गया उसके सामने। मैंने पूछा - मुझे ,कुछ देर का वक्त मिलेगा क्यों नहीं ! ज़रूर मिलेगा । उत्तर में थी मादक खनक ... एक - एक काफी का आफ़र उसमें भी सहज स्वीकृति । मैंने फ़िर कहा - आज मेरी छुट्टी है जबलपुर के पास भेडाघाट है चलो घूम आते हैं । उसमें भी सहमत लगा आज लाटरी लग गई । वीरानी जीवन बगिया में प्रेमांकुर फूट पड़ा .... सोचा आज पहले दिन इतनी समझदार ओर मुझे सहज स्वीकारने वाली अनुगामिनि मिल गई अब जीवन का रास्ता सहज़ ही कट जाएगा। बातों ही बातों में मैंने कहा : तुम मुझे कुछ देने का वादा कर सकोगी ? वादा क्या दे दूंगीं जो कहोगे दिल , हां ज़रूर मोहब्बत ऑफ़ कोर्स वफ़ा क्यों नहीं ? और कभी जब मुझे वक्त की ज़रूरत हो तो ज़नाब ये सब कुछ अभी के अभी या फ़िर कभी ? सोच के बताता हूँ कुछ दिन बाद कह दूंगा । ############################################################## घर में माँ के ज़रिये पा