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बच्चन के बच्चा हुआ, नाम हो बच्चू सूर मां और बाप के नाम की छाप रहे भरपूर

बेहद विचित्रताओं भरा जीवन किंतु सपाट और तीखा-व्यंग करने वाले स्वर्गीय हरिशंकर परसाई जी का अनूठा और दुर्लभ चित्र प्रस्तुत करते हुए बेहद रोमांचित होता जा रहा हूं. आज लिखना चाह रहा हूं "दशद्वार से सोपान" पर किंतु उसी क़िताब में क्षेपक से छिपी इस तस्वीर को आप सबके सामने लाकर मन रोमांच से भर आया. यह करामात स्वर्गीय शशिन यादव की है, "करामात" शब्द का प्रयोग  क्यों कर रहा हूं इस विषय पर बाद में बात करूंगा. अभी बच्चनजी की कृति पर चर्चा ही करूंगा. अव्वल तो यह साफ़ कर देना चाहता हूं कि मैं कुछ भी नहीं पढ़ता और जब पढ़ता हूं तो उसे ही जो जीवनोपयोगी हो .. __________________________________________                              दशद्वार से सोपान तक   "यह कृति की समीक्षा नहीं बल्कि सार्वकालिक कहने की कोशिश है" __________________________________________ "तेज़ी जी  से शादी करने का अर्थ  अपमान से ज़्यादा उस युग में आंकना भी गलत था.  बच्चन जी का तेजि जी से विवाह एक पाप के तुल्य मानी गई सामान्य रूप से जीवन में आप देखें तो पाएंगे कि यदि आप पर ऐसा कोई आरोप झूठा ही सही लग जाए तो स