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विश्व कवि मुक्तिबोध का स्मरण

गजानन माधव 'मुक्तिबोध', मुक्तिबोध की रचनाएँ कविता कोश में ,भूरी-भूरि खाक धूलि तो अंतर जाल पर उपलब्ध हैं उससे हटके मेरी नज़र में गजानन माधव "मुक्तिबोध" सदकवियों, विचारकों सामान्य-पाठकों , शोधार्थियों के लिए अनवरत ज़रूरी है.   मुझे जो रचनाएं  बेहद पसंद है वे ये रहीं जो विकी से साभार लीं जाकर सुधि पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है, मुक्ति बोध का य चित्र जबलपुर में शशिन जी ने उतारा था भूल ग़लती / गजानन माधव मुक्तिबोध पता नहीं... / गजानन माधव मुक्तिबोध ब्रह्मराक्षस / गजानन माधव मुक्तिबोध दिमाग़ी गुहान्धकार का ओरांगउटांग! / गजानन माधव मुक्तिबोध लकड़ी का रावण / गजानन माधव मुक्तिबोध चांद का मुँह टेढ़ा है. / गजानन माधव मुक्तिबोध डूबता चांद कब डूबेगा / गजानन माधव मुक्तिबोध एक भूतपूर्व विद्रोही का आत्म-कथन / गजानन माधव मुक्तिबोध मुझे पुकारती हुई पुकार / गजानन माधव मुक्तिबोध मुझे क़दम-क़दम पर / गजानन माधव मुक्तिबोध मुझे याद आते हैं / गजानन माधव मुक्तिबोध मुझे मालूम नहीं / गजानन माधव मुक्तिबोध मेरे लोग / गजानन माधव मुक्तिबोध मेरे सहचर मित्र /

विश्व छायांकन दिवस पर विशेष : जबलपुर के महान छायाकार:-स्व.शशि यादव

शशिन यादव , जी ने ये सारे चित्र समकालीन सेलीब्रिटीज़ के जबलपुर प्रवास के दौरान ही लिए थे ।समीर लाल जी उर्फ़ उड़ने वाली प्लेट ने शशिन जी के फोटोस की एक्जीबिशन जबलपुर में लगाई थी जब समीर जबलपुर में थे ..... हर साल मिलन फोटो ग्राफिक सोसायटी "मिफोसो" उनकी याद में प्रतियोगिता "ये जाने अनजाने छायाकार " शीर्षक से आयोजित करती है। हर साल कई केटेगरी में पुरस्कृत होते हैं छायाकार याद आते हैं शशिन जी बच्चन जी पलंग की निवार का आनंद लेती "गौरैया" मुक्तिबोध उपेन्द्र नाथ "अश्क" जबलपुर के प्रतिष्ठित छायाकार स्वर्गीय शशिन यादव , के फोटोग्राफ'स श्वेत-श्याम श्रेणी के है उस दौर में रंगीन छाया चित्रों का न तो दौर था और न ही उस समय रंगीन फोटो ग्राफिक केमेरा का विकास ही हो सका था । फ़िर गुजरात से रोज़गार की तलाश में आया कोई शशिनजी जैसा युवक कैसे संसाधन के तौर पर जुगाड़ पाता । किंतु वे स्थानीय महत्त्व पूर्ण अवसरों को न चूकने वाले शशिन जी ने उन अवसरों को नहीं छोडा जिनसे अचानक सामना हुआ उनका ............. [सभी फोटो शशिन जी के पुत्र श्री अरविंद यादव जी के सौजन्