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कल मिलेंगे कि नहीं राम जाने परसों मिलतें हैं तब तक सुनिये ये गीत

जी कल कार्यशाला के बाद भी न मिल पाएंगे परसों तक के लिये शब्बा खैर

अवकाश आवेदन

पूज्य एवम प्रियवर सादर-अभिवादन विगत कई माहों से शासकीय कार्य दबाव एवम अत्यधिक कार्य से मुझे ब्लागिंग के साथ न्याय करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है.यह कार्य  न तो उचित है और न ही इसे मान्य किया जावेगा. चिंतन उर्जा विहीन ब्लाग लिखने की  चिंता से  लिखी गई पोस्ट का स्तर कैसा होगा आप सब जानते हैं. आपसे एक माह तक दूर रहूंगा यद्यपि अर्चना चावजी मिसफ़िट पर तथा दिव्य-नर्मदा वाले आचार्य संजीव वर्मा सलिल भारत-ब्रिगेड पर आते रहेंगे उनको आपका स्नेह मिलेगा मुझे यक़ीन है.  आपको मेरी याद आये तो मेल ज़रूर कीजिये सादर गिरीश बिल्लोरे मुकुल