हिन्दी के मशहूर ब्लागर श्री रविशंकर श्रीवास्तव जिनको हम रविरतलामी के नाम से जानते हैं गूगल की विज्ञापन नीति से से उत्साहित हैं । उनका मानना है कि भविष्य में ब्लागिंग रोजगार का जरिया हो सकती है । इस सिलसिले में उनसे हुई बातचीत का पॉडकास्ट सुनिए .....
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रविवार, दिसंबर 07, 2014
रविवार, मई 15, 2011
बिना छींटॆ-बौछार के रवि रतलामी जी एक समारोह में मुख्य अतिथि जबलपुर आए
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| अविनाश वाचस्पति जे का हो गया कह रहे थे कि आप कनाट-प्लेस पे दूकान लेंगें यह चित्र राजे_शा जी के ब्लाग पर है उनका ब्लाग है "कौन कहता है हंसना मना है..?" हैं |
सब को हमारी राम राम वंचना जी . कल रात जब नेट खोला तो रवि रतलामी जी का मेल बांच के खुशी हुई.. समझ तो हम सवेरे ही गये थे जब गौर दादा जी ने अपनी मुंडेर वाला कौआ जो उनके घर की तरफ़ मुंह करके कांव कांव किये जा रहा था को डपट के भगा दिया. और वो कौआ हमारे घर पे आय के कांव कांव करने लगा. हम बोले श्रीमति जी से -’देखो, तुम्हारे मैके का संदेशा लेके आ गया ..!
श्रीमति जी किचिन से बोलीं- ”न, वो आपके किसी ब्लागर मित्र के आने की खबर लाया है. चाय पिओगे, नहा धो लो शनिवार की छुट्टी है हफ़्ते भर की....
अब बताओ भला , ऐसा बो्ल गईं गोया नहाना मेरा साप्ताहिक कार्यक्रम हो. हम चुप रहे सोचा सुबह से उलझे तो शाम तक पता नहीं का गत बने...?
खैर कन्फ़र्म हुआ कि रवि रतलामी ही की गाड़ी विलम्ब से किंतु जबलपुर आ ही गई. उस गाडी़ में बिना छींटॆ-बौछार के रवि भैया एक समारोह में बतौर प्रशिक्षक एवम मुख्य अतिथि पधार चुके हैं. आपस में कानाफ़ूसी कर हमने टाईम सेट किया शाम चार बजे से साढ़े छै: बजे तक चले कार्यक्रम में हम शहीद-स्मारक प्रेक्षागार में डाक्टर विजय तिवारी "किसलय" के साथ शामिल हुए जिसे विजय जी ने अपने थ्री जी सेल फ़ोन से लाइव किया
और प्रोग्राम से फ़ारिग होके हम रवि जी का अपहरण आयोजकों की अनुमति सहमति से कर लिया. और फ़िर देखिये ये सब हुआ यहां
जबलपुर के अखबारों में छाए रवि रतलामी जी "गिरीश बिल्लोरे का ब्लाग "पर कतरनें मौज़ूद हैं.
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