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कर्जे की भाषा के ज़रिये सफल क्रांतियाँ क्या संभव है..?

कर्जे की भाषा के ज़रिये सफल क्रांतियाँ क्या संभव है..? तुमने जो कुछ  किया मीत  वो केवल   प्रयोग अभिनव है..!! अपनी अपनी भाषा में ही आज क्रांति की अलख जगालो.! सच कैसे बोला जाता है मीत ज़रा खुलकर समझा दो..!! एक पड़ाव को जीत मानकर रुके यही इक  भूल  थी साथी ! जिन दीपों से जगी मशालें- उन दीपों की बुझ गई बाती..!  रुको कृष्ण से जाओ पूछो-  शंखनाद कैसे करतें हैं....?              बैठ के पल भर साथ राम के               पूछो हिम्मत कैसे भरते हैं.?        

27.08 .2011 सारे भरम तोड़ती क्रांति के बाद

                      शाम जब अन्ना जी को विलासराव देशमुख जी ने एक ख़त सौंपा तो लगा कि ये खत उन स्टुपिट कामनमे् न्स की ओर से अन्ना जी लिया था जो बरसों से सुबक और सुलग  रहा था.अपने दिल ओ दिमाग में  सुलगते सवालों के साथ. उन सवालों के साथ जो शायद कभी हल न होते किंतु एक करिश्माई आंदोलन जो अचानक उठा गोया सब कुछ तय शुदा था. गांधी के बाद अन्ना ने बता दिया कि अहिंसक होना कितना मायने रखता है. सारे भरम को तोड़ती इस क्रांति ने बता दिया दिया कि आम आदमी की आवाज़ को कम से कम हिंदुस्तान में तो दबाना सम्भव न था न हो सकेगा. क्या हैं वे भरम आईये गौर करें... मध्यम वर्ग एक आलसी आराम पसंद लोगों का समूह है : इस भ्रम में जीने वालों में न केवल सियासी बल्कि सामाजिक चिंतक, भी थे ..मीडिया के पुरोधा तत्वदर्शी यानी कुल मिला कर "सारा क्रीम" मध्य वर्ग की आलसी वृत्ति से कवच में छिपे रहने की  आदत से... परिचित सब बेखबर अलसाए थे और अंतस में पनप रही क्रांति ने  अपना नेतृत्व कर्ता चुन लिया. ठीक वैसे जैसे नदियां अपनी राह खुद खोजतीं हैं   क्रांति के लिये कोई आयकान भारत में है ही नहीं : कहा न भारत एक अनोखा देश है

वेड्नेस डे : "स्टुपिट कामन मैन की क्रांति "

w ednesday     फ़िल्म को देखते ही अहसास हुआ  एक कविता का एक क्रांति का एक सच का  जो कभी भी साकार हो सकता है.अब इन वैतालों का अंत अगर व्यवस्था न कर सके तो ये होगा ही   " अपनी पीठ पर लदे बैतालो   को सब कुछ सच सच कौन बताएगा शायद हम सब .. तभी एक आमूल चूल परिवर्तन होगा... चीखने लगेगी संडा़ंध मारती व्यवस्था , हिल जाएंगी   चूलें जो कसी हुईं हैं... नासमझ हाथों से . अब आप और क्या चाहतें हैं ?  अब भी हाथ पर हाथ रखकर घर में बैठ जाना. ..? सच तो ये है कि अब आ चुका है वक़्त सारे मसले तय करने का  हाथ पर हाथ रखकर घर में बैठना अब सबसे बड़ा पाप होगा