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पब्लिक सेक्टर , प्राइवेट सेक्टर और अब पर्सनल सेक्टर से हो सकता है विश्व के 1.3 बिलियन गरीबों का भला

मित्रो यह भाषण यथा प्राप्त प्रस्तुत है जिसका  विश्लेषण  मिसफिट के आगामी अंक में प्रस्तुत  किया जावेगा .  आधुनिक महानायक महात्मा गांधी ने कहा था कि हम उस भावी विश्व के लिए भी चिंता करें जिसे हम नहीं देख पाएंगे। जब-जब विश्व ने एक साथ आकर भविष्य के प्रति अपने दायित्व को निभाया है , मानवता के विकास को सही दिशा और एक नया संबल मिला है। सत्तर साल पहले जब एक भयानक विश्व युद्ध का अंत हुआ था , तब इस संगठन के रूप में एक नई आशा ने जन्म लिया था। आज हम फिर मानवता की नई दिशा तय करने के लिए यहां एकत्रित हुए हैं। मैं इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मलेन के आयोजन के लिए महासचिव महोदय को ह्रदय से बधाई देता हूँ। एजेंडा 2030 का विजन महत्वाकांक्षी है और उद्देश्य उतने ही व्यापक हैं। यह उन समस्याओं को प्राथमिकता देता है , जो पिछले कई दशकों से चल रही हैं। साथ ही साथ यह सामाजिक , आर्थिक और पर्यावरण के विषय में हमारी परिपक्व होती हुई सोच को भी दर्शाता है। यह ख़ुशी की बात है कि हम सब गरीबी से मुक्त विश्व का सपना देख रहे हैं। हमारे निर्धारित लक्ष्यों में गरीबी उन्मूलन सब से ऊपर है। आज दुनिया में 1.3 बिलियन लोग गर

नरेंद्र मोदी जी और उनकी टीम को अग्रिम शुभकामनाऎं.

                      प्रधान मंत्री के रूप में श्री नरेंद्र दामोदर मोदी जी का व्यक्तित्व मानो उदघोषित कर रहा है  कि  शून्य का विस्फ़ोट हूं..!!    एक शानदार व्यक्तित्व जब भारत में सत्तानशीं होगा ही तो फ़िर यह तय है कि अपेक्षाएं और आकांक्षाएं उनको सोने न देंगीं. यानी कुल मिलाकर एक प्रधानमंत्री के रूप में सबसे पहले सबसे पीछे वाले को देखना और उसके बारे में कुछ कर देने के गुंताड़े में मशरूफ़ रहना ... बेशक सबसे जोखिम भरा काम होगा. बहुतेरे तिलिस्म और  ऎन्द्रजालिक परिस्थितियां निर्मित  होंगी. जो सत्ता को अपने इशारों पर चलने के लिये बाध्य करेंगी. परंतु भाव से भरा व्यक्तित्व अप्रभावित रहेगा इन सबसे ऐसा मेरा मानना है.                                शपथ-ग्रहण समारोह में आमंत्रण को लेकर मचे कोहराम के सियासी नज़रिये से हटकर देखा जावे तो साफ़ हो जाता है कि - दक्षेस राष्ट्रों में अपनी प्रभावी आमद को पहले ही झटके में दर्ज़ कराना सबसे बड़ी कूटनीति है. विश्व को भारत की मज़बूत स्थिति का संदेश देना भी तो बेहद आवश्यक था जो कर दिखाया नमो ने. सोचिये न वाज़ साहब को पड़ोसी के महत्व का अर्थ समझाना भी तो आवश्यक था य

मोदी विजय पर एक ग़ैर सियासी टिप्पणी “सम्मोहक चाय वाला...!”

 गुजरात के बड़नगर रेल्वे-स्टेशन पर  एक चाय बेचने वाले का बेटा  . जो खुद चाय बेचता ..   शीर्ष पर जा बैठा भारतीय सांस्कृतिक आध्यात्मिक और धार्मिक आख्यानों में चरवाहे कृष्ण वनचारी राम.. को शीर्ष तक देखने वालों के लिये कोई आश्चर्य कदाचित नहीं . विश्व चकित है.. विरोधी भ्रमित हैं .. क्या हुआ कि कोई अकिंचन शीर्ष पर जा बैठा .. ! भ्रम था उनको जो मानते हैं.. सत्ता धनबल, बाहुबल और छल से पाई जाती है... ! क्या हुआ कि अचानक दृश्य बदल गए .. लोगों को क्या हुआ सम्मोहित क्यों हैं.. इस व्यक्ति का सम्मोहक-व्यक्तित्व सबको कैसे जंचा.. सब कुछ  ज़ादू सरीखा घट रहा था.. मुझे उस दिन आभास हो गया कि कुछ हट के होने जा रहा है.. जब उसने एक टुकड़ा लोहे का मांग लौह पुरुष की प्रतिमा के वास्ते चाही थी. संकेत स्पष्ट था ... एक क्रांति का सूत्रपात का जो एक आमूलचूल परिवर्तन की पहल भी रही है.                     कितना महान क्यों न हो प्रेरक किंतु जब तक प्रेरित में ओज न हो तो परिणाम शून्य ही होना तय है. इस अभियान में मोदी जी के पीछे कौन था .... ये सवाल तो मोदी जी या उनके पीछे का फ़ोर्स ही बता सकता है किंतु मोदी में निहित अंत

बता दो.. शून्य का विस्फ़ोट हूं..!!

दूरूह पथचारी   तुम्हारे पांवों के छालों की कीमत अजेय दुर्ग को भेदने की हिम्मत   को नमन... !! निशीथ-किरणों से भोर तक   उजाला देखने की उत्कंठा  ….! सटीक निशाने के लिये तनी प्रत्यंचा ... !! महासमर में नीचप थो से ऊंची आसंदी तक की जात्रा में   लाखों लाख विश्वासी जयघोष आकाश में   हलचल को जन्म देती यह हरकत जड़-चेतन सभी ने देखी है तुम्हारी विजय विधाता की लेखी है..   उठो.. हुंकारो... पर संवारो भी   एक निर्वात को सच्ची सेवा से भरो जनतंत्र और जन कराह को आह को   वाह में बदलो... ********** सुनो , कूड़ेदान से भोजन निकालते बचपन   रूखे बालों वाले अकिंचन.   रेत मिट्टी मे सना मजूरा   नर्मदा तट पर बजाता सूर बजाता तमूरा सब के सब तुम्हारी ओर टकटकी बांधे अपलक निहार रहे हैं .... धोखा तो न दोगे   यही विचार र हे है...! कुछ मौन है पर अंतस से पुकार र हे हैं .. सुना तुमने... वो मोमिन है..   वो खिस्त है..   वो हिंदू है... उसे एहसास दिला दो पहली बार कि   वो भारतीय है...   उ नको हिस्सों हिस्सों मे प्यार मत देना प्यार की पोटली एक साथ सामने सबके रख देना  शायद मां ने तु