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मौसम का हालचाल : कवि श्री रूप चन्द्र शास्त्री मयंक स्वर अर्चना चावजी

मौसम के अनुरूप कविता शिशिर की वापसी पर ग़रीब की स्थिति और मधुऋतु की परिकल्पना करता मानस कवि कर देता है व्यक्त अपनी आकांक्षा मौसम से. आइये सुने मशहूर पाडकास्टर श्रीमति अर्चना चावजी के स्वरों में श्री रूपचन्द्र शास्त्री जी की दो कविताएं .  सन-सन शीतल चली पवन, सर्दी ने रंग जमाया है। ओढ़ चदरिया कुहरे की, सूरज नभ में शर्माया है।। ( शेष हेतु यहां क्लिक कीजिये )