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भगतसिंह का अन्तिम खत ......

शहीद भगतसिंह का अन्तिम खत .. .दीपक "मशाल" की आवाज में और ये रहा तीनों वीरों का लिखा संयुक्त पत्र  महोदय, उचित सम्मान के साथ हम नीचे लिखी बाते .आपकी सेवा में रख रहे हैं - भारत की ब्रीटिश सरकार के सर्वोच्च अधिकारी वाइसराय ने एक विशेष अध्यादेश जारी करके लाहौर षड़यंत्र अभियोग की सुनवाई के लिए एक विशेष न्यायधिकर्ण (ट्रिबुनल ) स्थापित किया था ,जिसने 7 अक्टुबर ,1930 को हमें फांसी का दंड सुनाया | ह मारे विरुद्ध सबसे बड़ा आरोप यह लगाया गया हैं कि हमने सम्राट जार्ज पंचम के विरुद्ध युद्ध किया हैं | न्यायालय के इस निर्णय से दो बाते स्पष्ट हो ज़ाती हैं -पहली यह कि अंग्रेजी जाति और भारतीय जनता के मध्य एक युद्ध चल रहा हैं |दूसरी यह हैं कि हमने निशचित रूप में इस युद्ध में भाग लिया है |अत: हम युद्ध बंदी हैं | यद्यपि इनकी व्याख्या में बहुत सीमा तक अतिशयोक्ति से काम लिया गया हैं , तथापि हम यह कहे बिना नहीं रह सकते कि ऐसा करके हमें सम्मानित किया गया हैं |पहली बात के सम्बन्ध में हमें तनिक विस्तार से प्रकाश डालना चाहते हैं | हम नही समझते कि प्रत्यक्ष रूप से ऐसी कोई लड़ाई छिड़ी हुई हैं | हम

दृश्य और संवाद : Talk Show With Deepak Mashal from Belfast

अदभुत दृश्य कैद किया अरविन्द जी ने सर्द सुबह का सूरज पंछी-दम्पत्ति अब सुनिये बेलफ़ास्ट से संवाद  

एक लघुकथा....................पॉड्कास्ट.........

नमस्कार.............. ‘‘मिसफ़िट:सीधीबा त‘‘ पाडकास्टर के रूप में मेरी पहली कोशिश  ............................ .आज इस ब्लॉग पर ये मेरा पहला प्रयास है ...................सुझाव सादर अपेक्षित है......... आज सुनिए....... दीपक"मशाल" की लिखी एक लघुकथा................शीर्षक है ------"दाग अच्छे हैं"............. आप इसे यहाँ पढ सकते हैं      Get this widget |      Track details  |         eSnips Social DNA   

पॉडकास्ट कांफ्रेंस : अदा जी, दीपक मशाल और मैं

महफूज़  मियाँ   का  एकाएक गायब  होना फिर जबलपुर में अवतरित होना अपने आप में एक चमत्कारिक घटना रही है. इन सब बातों को लेकर एक अन्तराष्ट्रीय संवाद हुआ जिसमें ''बेचारे-कुंवारे हिन्दी ब्लागर्स की दशा और दिशा'' पर भी विमर्श किया गया अदा जी जो जो कविता का डब्बा यानी  ''काव्य-मंजूषा'' की मालकिन हैं तथा स्याही और कागज़ के मालिक दीपक मशाल से मेरी बात हुई क्या खूब पायी थी उसने अदा, ख्वाब तोड़े कई आंधिओं की तरह. कतरे गए कई परिंदों के पर, सबको खेला था वो बाजियों की तरह. हौसला नाम से रब के देता रहा, औ फैसला कर गया काजिओं की तरह. ________________________________ अनुराग शर्मा जी के स्वर में सुनिए कहानी  यहाँ हिंद-युग्म के आवाज़ पर  ________________________________