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महिला सशक्तिकरण के लिए वैदिक आज्ञाएँ : डा उमाशंकर नगायच

भारतीय सांस्कृतिक सामाजिक परिवेश नारी के प्रति कभी भी नकारात्मक न था. इस मुद्दे की पड़ताल तब अधिक आवश्यक है जब सनातनी व्यवस्था के विरुद्ध एक मुहिम मुसलसल जारी हो . जब ये कहा जा रहा हो भारत में असहिष्णुता सर चढ़ के बोल रही है . न केवल मनु-स्मृति वरन सभी अन्य सनातनी  धार्मिक आज्ञाओं अनुदेशों को गलत ठहराया जा रहा हो तब ऐसे विमर्श की अनिवार्यता को  नकारा नहीं जा सकता .   विचार-कुम्भ उज्जैन से लौटकर मुझे महसूस हुआ कि- हम नारी विमर्श को आगे ले जाते समय देश की प्राचीन  एवं अर्वाचीन पृष्ठभूमि को अवश्य देखें . आयातित विचारों में सन्निहित  बिन्दुओं एवं  अनाधिकृत मुद्दों से इतर भारतीय  सांस्कृतिक सामाजिक परिवेश के पासंग पर रख कर विमर्श आवश्यक है . यह दायित्व  डा. नगायच ने बखूबी निबाहा है . आप आलेख अवश्य देखिये