सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पोस्ट

विश्वनीति लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पाकिस्तान आतंक का घोषित घोंसला है तो चीन वैचारिक उन्माद का होलसेल डीलर

कश्मीर समस्या दो दुश्चरित्र राष्ट्रों पाकिस्तान  और चीन के बीच भारत का ऐसा सरदर्द है जिसकी पीड़ा का आधार भारत की समकालीन लापरवाही  है. भारत में लाल और हरी विचारधाराएं भारत के अस्तित्व को 1947 के बाद से ही समाप्त करने की कोशिशों में सक्रीय हैं. अक्सर ब्रिटिशर्स पर ये आरोप लगता है कि उसने मज़हबी आधार पर भारत को विखंडित किया यह अर्धसत्य हो सकता है पूर्ण सत्य तो ये है कि चीन की सरकार झूठ के विस्तार  और कुंठित मनोदशा को सफलता का आधार मानती है तो पाकिस्तान के फर्जी प्रजातंत्र के नेतृत्व का  चरित्र मूर्खताओं का विशाल भण्डार ही रहा है.  ऐसी कोशिश हो भी क्यों न भारत के मामले  चीन सदा से ही भयभीत रहा है. यहाँ चीन  का साथ हमारे विकास के लिए उतना कारगर कतई भारत के लिए सकारात्मक  नहीं माना जा सकता जितना हम सोच रहे थे. नारे तब भी थे जैसे हिन्दी-चीनी भाई भाई ... पंचशील-क्षरण के बाद हमारे हितों की रक्षा के लिए कोई ठोस पैरोकारी विश्व की ओर से नज़र न आ सकी . मैकमोहन लाइन  को मान्यता देने की 1956 में शपथ लेने वाले चीन ने 1962 में "हिन्दी-चीनी भाई भाई" के नारे को हमारी कमजोरी मानते हुए युद्ध