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प्रभावी रहा पेडों को राखी बांधने में छिपा संदेश

नवाचार के ज़रिये छोटे छोटे प्रयोग करना बेहद असरदार होता है. जबलपुर बालभवन में ऐसा ही एक  छोटा प्रयोग किया जो  बड़ा असरदार साबित हुआ . यह प्रयोग न केवल शिक्षाप्रद रहा वरन इससे जनजन जो सन्देश विस्तारित हुआ वह  भी समुदाय के लिए चिंतन का विषय बन गया बालभवन जबलपुर  के संचालक रूप में लगभग एक माह पूर्व विचार किया कि क्यों न हम बालभवन में राखी पर्व में एक नवाचार करें जिससे समाज को नया सन्देश मिले तभी उन पौधों का स्मरण हुआ जो हमने 5 जुलाई 2017 को लगाए थे बस फिर क्या था हमने बच्चों और उनके शिक्षकों से परामर्श कर तय किया कि इस बार हम पेड़ पौधों को राखी बांधेंगे.  जी हाँ वे पौधे जिनको बच्चों ने नाम भी दिए हैं .. झमरू, हिन्दुस्तान , आदि आदि . पेड़ पौधों के लिए राखी बनाने का काम कराया रेशम ठाकुर ने जो इन दिनों बालभवन में बच्चों की कला शिक्षक हैं.             नन्हें पौधों एवं वृक्षों के साथ रक्षाबंधन का त्यौहार बेहद उत्साह के साथ मनाया गया . महिला बाल विकास विभाग के महिला सशक्तिकरण संचालनालय द्वारा संचालित संभागीय बालभवन के बच्चों ने वृक्षों एवं पेड़-पौधों के साथ जीवन के अंतर्संबंधों को रेखांकि

बदतमीज़ भाईयों की कलाई पर राखी मत बांधना बेटियो..

                                 " दण्ड का प्रावधान उम्र आधारित न होकर अपराध की क्रूरता आधारित हो !"   शायद आपको याद होगा ये आलेख . दिनांक 13 सितंबर 2013 को अपने मिसफ़िट ब्लाग पर इस आलेख को प्रकाशित किया था . वास्तव में क़ानून में बदलाव की ज़रूरत थी. हज़ारों मामलों में न्याय मिलेगा.  बाल-अपराधी को दंड मिलेगा हमें उम्मीद है. पर अब इससे आगे सामाजिक बदलाव के लिये  अब बालिकाओं के लिये संरक्षक क़ानून की ज़रूरत को नक़ारा नहीं जा सकता.                         सामाजिक संरचना इतनी अधोगत हो चुकी है कि हम सामाजिक मूल्यों को स्तर नहीं दे पा रहे हैं. आज़ शाम रक्षा-बंधन की खरीदी के लिये मैंनें बहुत सी बेटियों को समूह में खरीददारी करते देखा . मन न केवल खुश था बल्कि अच्छा भी लगा  हम चर्चा ही कर रहे थे कि बेटियां अब खुद निर्णय ले रहीं हैं . देखो कितने साहस से भरी आज पावन त्यौहार की तैयारी में व्यस्त हैं. बात खत्म हुई ही थी कि कुछ शोहदे तो नहीं थे पर हाई-स्कूल + के किशोर लग रहे थे.. बेटियों पर छींटाकशी करते नज़र आए . ड्रायवर को वाहन धीमा चलाने का निर्देश देने पर उसने गाड़ी धीमी क्या लगभग  रोक

सचमुच रिश्ते आभाषी नहीं होते

  भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना गीत के भावों के ओतप्रोत आज का दिन भारतीय संस्कृति का वो त्यौहार है जो मन मानस की    पाकीज़ा सोच को आज और                              ( अर्चना चावजी के स्वर में राखी का उपहार ) पुख्ता कर देता है. आज के लिए बहन फिरदौस का जिक्र सबसे पहले करूंगा जिनकी राखी मुझे सबसे पहले मिली ..... और मिला ये संदेश  रक्षाबंधन के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं...                                                                                                                       फ़िरदौस ख़ान            तभी हरनीत का फोन मिला भैया आ रही हूं कि सेल फोन ने बताया कि शोभना चौधरी का संदेश खुलने को बेताब है माथे पे तिलक  चेहरे पे प्यार  मुंह में मिठाई  तोहफा-उपहार  कच्चे धागे ने  किया हाथों का श्रंगार  लो मन गया राखी का त्यौहार  प्यारे  भैया राखी के इस अवसर पर प्यार दुआएँ भेज रही हूँ दूर भले हूँ तन से लेकिन मन में भैया दूर नही हूँ इस राखी को बाँध कलाई पर, तुम देना मान तुमसा भाई पाकर मैं एक खुशनसीब बहन बनी हूँ आपकी बहन श्रद्धा  जैन   इस के अलावा हम सारे भाई  जी ह