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महिला मित्र का आभार जिनके कारण ............!!

"दीपावली का उपहार" भेजने वाली मित्र को सादर नमन करते हुए बता दूँ की जितना नशा इन सभी में एक साथ मिलता है वह इस विरहनी-लावण्या विरह का हजारवें भाग के तुल्य भी नहीं हैं ? { अपनी इन मित्र का आभारी हूँ जिनने मुझे शराब , की बोतलों का खजाना भेजा वर्ना यह पोस्ट न लिख पाता } यह विरह ईश्वर के प्रेम में पगी आत्मा को ही महसूस होता है न कि हर आत्मा को । ये , इश्क़ में घायल आवाज़ गोया , - ग़म ,को बयाँ करती सुनाई दे रही होगी आपको सुनाई दे भी क्यों न ........? इश्क हा ही ऐसी चीज़ आज़माना है तो आज़माइए किंतु याद रखिए मेरी इस बात को ------ इश्क कीजे सरेआम खुलकर कीजे.... भला पूजा भी कोई छिप-छिप के किया करता है ? पाकीज़ा जिंदगियां पाप की पडोसन , बनाना कभी न चाहतीं हैं और न चाहेंगी। किंतु हम क्या करें जब मन भीगा हो तो साँसें भी कभी सूखी रह सकतीं हैं ...... समीर लाल जी जो देसी मानस लेकर बिदेसिया हो गए है संगी कविताई करने वालों के साथ टी वी स्टूडियो में गए और कने लगे की ये लो भई-टीवी पर भी आ लिए, मैं ये तो नहीं कहूँगा की जं