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वो सोचता है- काट लूं साले कुत्तों को और खबर बन जाऊं..!

                                     उस दिन शहर के अखबार समाचार पत्रों में रंगा था समाचार उसके खिलाफ़ जन शिकायतों को लेकर हंगामा, श्रीमान क के नेतृत्व में आला अधिकारीयों को ज्ञापन सौंपा गया ? नाम सहित छपे इस समाचार से वो हताशा से भरा  उन बेईमान मकसद परस्तों को  कोस रहा था  किंतु कुछ न कर सका राज़ दंड के भय से बेचारगी का जीवन ही उसकी नियति है.  एक दिन वो एक पत्रकार मित्र से मिला और पेपर दिखाते हुए उससे निवेदन किया -भाई,संजय इस समाचार में केवल अमुक जी का व्यक्तिगत स्वार्थ आपको समझ नहीं आया ?  संजय -समझ तो आया आया भाई साहब किंतु , मैं क्या करुँ पापी पेट रोटी का सवाल है जो गोल-गोल तभी फूलतीं हैं जब मैं अपने घर तनखा लेकर आता हूँ…..! वो- तो ठीक है ऐसा करो भइयाजी,मेरी इन-इन उपलब्धियों को प्रकाशित कर दो अपने लीडिंग अखबार में ! फ़िर उसने   अपनी उपलब्धियां गिनाईं जिन्हैं   सार्वजनिक करने से कल तक शर्माते था . उसकी बात सुन कर संजय ने कहा  भैयाजी,आपको इन सब काम का वेतन मिलता है ,कोई अनोखी बात कहो जो तुमने सरकारी नौकर होकर कभी की हो ? वो -अनोखी बात…….? संजय ने पूछा - अरे हाँ,

ख़बर नवीसों की नज़र में खबर है..?

साभार: इस ब्लाग से                   फ़रवरी का महीना आते ही बादलों ने आकाश छोड़ दिया और एकाध दिन के बाद पत्तों ने बिना किसी पूर्व नोटिस के पेड़ों का साथ छोड़ दिया. कुल मिला कर बसंत ने दस्तख दे दी अचानक आए मौसमी बदलाव पे किसी अखबार ने कहा-"उफ़ निरंकुश पारा बिना बताए अचानक ऊपर उठ गया " पढ़ने वालों को लगा होगा कि बदतमीज़ पारे को इतनी भी तमीज़ नहीं कि   ससुरा पारा उस  अखबार के मेज-वासी खबर नसीब  की नज़र में कोई गुस्ताखी कर चुका हो.                 एक दौर था कि कोई अच्छी बात खबर बनती थी. और अब जब तक तीन-चार साल का बच्चा आपके बाजू में बैठा पोर्न का अर्थ न पूछने लगे  तब तक हज़ूर खबरिया चैनल चिल्ला चिल्ला के बताते रहेंगे-"कर्नाटक का मंत्री पोर्न क्लिप देखते पाया गया.." बात पंद्रह बरस पुरानी है  कुत्ता एक आदमी को काट चुका था दूसरे की ओर भागा तभी एक आम आदमी ने कुत्ते के मालिक को चिल्लाकर खबर दी -"ज़नाब,अपने कुत्ते को सम्हालिये वरना...." मालिक ने झट पुकारा-’भोलू, वापस आ ..’ भोलू तो धर्मराज के ज़माने का वफ़ादार था वापस आया दुम हिलाई.. मालिक ने हर आदमी से माफ