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केवल हिन्दुस्तान के हक़ में दुआ कीजिये

क्षमा कीजिये आज यहां चुगली के सन्दर्भ में पोस्ट लगानी थी किंतु ईद के अवसर पर ये पोस्ट ज़रूरी है..भारत ब्रिगेड से इसे मिसफिट पर लाया जावे अत: आलेख की पुन: प्रस्तुति कर रहा हूं... अब्दुल और पंडित दीनानाथ के बीच की दोस्ती इत्ती पक़्की है कि उसे अलग करना किसी कौमी फ़सादी के बस की बात नहीं. सब कुछ गोया उसके अल्लाह इसके भगवान ने तय कर दिया हो.  अब्दुल्ल की अम्मी की देह में कैन्सर के जीवाणु का बसेरा है उधर दीनानाथ भी अपनी अभाव ग्रस्त ज़िन्दगी से जूझ रहा था. वे दौनों ही एक पेड़ के नीचे बैठे आपसी चर्चा कर रहे थे कि  अचानक उन पर आकाश की सैर कर रहे  फ़रिश्ते और देवदूत की नज़र पड़ी .दौनों कौतुहल वश पेड़ की शाखा पे बैठ के मित्रों की बातें सुनने लगे. फ़रिश्ता जो अल्लाह का भेजा हुआ था सबसे पहले   प्रगट होकर  अब्दुल्ल से कहता है:- सुनो, तुम आज़ मस्ज़िद में जाकर जो दुआ करोगे कुबूल हो . अब्दुल बोला :- फ़रिश्ते, मेरे दोस्त के लिये भी...! फ़रिश्ता उस बात को सुने बिना ग़ायब हो गया. तभी देवदूत प्रगट हुआ उसने दीनानाथ से कहा:- दु:खी इंसान, आज़ तुम जो मंदिर की मूरत से मांगोगे वो होना अटल है...! अनोखे एहसास लेकर