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कश्मीर 19 जनवरी 1990

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कोविड का टीका : वाक़ई है तीखा

कोविड का टीका : वाक़ई है तीखा ।     बाबा की सबसे गंदी आदत है कि इस उसकी भैंस बांध के ले आते हैं। जब भैंस से नहीं मिलती तो बकरियां बांध लेते हैं जिसको बुंदेलखंड में छिरियाँ बांध लेते हैं।     यह सोचकर हम एक बार बाबा की बाखर का वीडियो मंगाए। वीडियो में आंख घुसा घुसा के देखें तब भी हमको भैंसिया नजर नहीं आई। अपने भाइयों की बकरियां तलाशनी चाही बाबा वह भी हम को नजर नहीं आई। हमने दुर्गेश भैया से पूछा भाई वह तो कुछ नहीं है फिर आप चिल्ल-पौं काय मचाते रए हो । दुर्जन भैया हमसे गुस्सा हो गए हमको उनने फेसबुक पर ब्लॉक करने की भयंकर अपमानजनक धमकी दे डाली।      आज के दौर में अगर आपको कोई ब्लॉक कर दे उससे बड़ा अपमान विश्व में कोई हो सकता है क्या ?     सोशल मीडिया से पता चलता है कि आपका स्टेटस क्या हुआ अरे आप का डाला हुआ स्टेटस नहीं आपका समाज में स्तर क्या है ? जे बोल रहा हूं । आप समझ रहे हो ना ?    व्हाट्सएप पर ब्लॉक करना  या ग्रुप से निष्कासित कर देना दूसरा बड़ा डिफॉर्मेशन है।    मार्क जुकरबर्ग तुम आओ भारत हमारे मोहल्ले में आए तो समझ लेना हम तुम्हारी ऐसी भद्रा उतारेंगे कि तुम्हें ऐसे

एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार क्या सचमुच हुई फिशिंग का शिकार ?

NDTV   की पत्रकार निधि राजदान इन दिनों चर्चा में है। यदि वर्तमान में एनडीटीवी की भूतपूर्व पत्रकार कहा जाना ज्यादा उपयुक्त होगा क्योंकि निधि ने 2020 में ही एनडीटीवी से इस्तीफा दे दिया। 43 वर्ष की उम्र में एक शानदार स्टेटस पाने के बाद अचानक एनडीटीवी को छोड़ना विचारणीय मुद्दा तो था लेकिन कोविड-19 की आपाधापी में यह मुद्दा गंभीरता से नोटिस नहीं किया गया। बीबीसी से लेकर तमाम मीडिया चैनल्स जहां एक और निधि राजदान को फिशिंग का विक्टिम मान रहे हैं वहीं दूसरी ओर आज निधि ट्रोलिंग के मामले में सबसे बड़ी शिकार साबित हुई है। ऑप इंडिया चैनल वाले अजीत भारती हो या यूट्यूब पर लाइव चैनल चलाने वाले वन मैन प्रोड्यूसर है सभी ने अपनी अपनी भड़ास निकाली।     निधि राजदान के बारे में एक वीडियो यह भी आया कि उनके द्वारा पहले झूठ बोला गया और अब जब सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही हैं साथ ही हावर्ड यूनिवर्सिटी से इनके विरुद्ध लीगल एक्शन की तैयारी हो रही है तो  निधि स्वयं को विक्टिम साबित करने की कोशिश कर रही हैं। जहां तक मेरा मानना है के निधि राजदान ने विषय को गंभीरता से समझे बिना कथित ईमेल का परीक्षण किए बिना

नेशनल न्यूज़ पर दहाड़ा जबलपुर का शेर

न्यू्ज नेशन से साभार         आज मकर संक्रांति के दिन न्यूज नेशन राष्ट्रीय चैनल पर "N.C.E.R.T. की 12वीं की इतिहास की पुस्तक में षड्यंत्र पूर्वक शामिल किए गए तथ्य जिसमें मुगलों को मंदिरों के विनाशक के साथ पुनर्निर्माण कर्ता बताया गया है" विषय पर एक डिबेट का आयोजन किया गया । इस डिबेट मेंं एम यू के फिरोज साहब वामपंथी प्रोफेसर सतीश प्रकाश, प्रोफेसर बद्रीनारायण  मौलाना  अली कादरी  प्रोफ़ेसर संगीत रागी , शुबही खान प्रोफेसर बद्रीनारायण के साथ जबलपुुुर प्रोफेसर डॉ आनंद राणा ने भी हिस्सा लिया। बहस  के मुद्दे पर केवल सतीश प्रकाश को छोड़कर सभी नियंत्रित रहे ।     वर्तमान में भारत के इतिहास को लेकर एक लंबी बहस छिड़ चुकी है। देश में यह स्वीकार आ गया कि आजादी के बाद जब इतिहास लिखने की बात आई तो तत्सम कालीन नीति नियंताओं इस भय से कि भविष्य में कहीं  धर्म एवं संप्रदाय को मानने वालों  के बीच में वैमनस्यता पैदा ना हो ऐसा इतिहास लिखा जाए। इस बिंदु पर जाकर मेरा मस्तिष्क अचानक बुद्धिहीनता पर चकित हो जाता है। मित्रों जैसे ही पत्रकार दीपक चौरसिया ने जो देश की बहस को संचालित कर रहे थे डॉ आनंद राणा को

बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड यू के फ़ॉर पोट्रेट में शामिल हुई स्वामी विवेकानंद की 8 हज़ार वर्ग फ़ीट अनाजों से बनी रंगोली

ग्रामीण कलाकार सतीश गुर्जर ग्राम कुकराबद जिला हरदा  एक ऐसे लोग कलाकार हैं जो अनाज का उपयोग कर विशालकाय पोट्रेट बनाते हैं। विगत सप्ताह उन्होंने अपनी 60 सदस्यीय टीम के साथ स्वामी विवेकानंद की तस्वीर रंगोली के माध्यम से हरदा डिग्री कॉलेज कंपाउंड में बनाई। इस कलाकृति के निर्माण में टीम को 3 दिन लगे। बनाई गई कृति में लगभग 50 क्विंटल अनाज का उपयोग किया गया। प्रत्यक्षदर्शी श्रीमती शुभा पारे एवं श्री राजेन्द्र गुहे बताया कि इस अनाज से बनी रंगोली को देखने विवेकानंद जयंती यानी आज 12 जनवरी 2021 से 13 जनवरी 2021 तक का समय निर्धारित है।  बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड फ़ॉर पोट्रेट यू के  में अब तक इस श्रेणी में 8000 वर्ग फीट की कृति नहीं बनी थी जिसे श्री सतीश गुर्जर एवं उनके साथियों ने बनाया। कलेक्टर हरदा तथा हरदा की विधायक उद्घाटन के मौके पर विशेष रूप से उपस्थित रहे हैं। इस कलाकृति में 10 सदस्य के रूप में बिल्लोरे परिवार की की एक बेटी का नाम भी दर्ज हो गया है ।   नार्मदीय ब्राह्मण समाज  की बिटिया कु. सलोनी बिल्लौरे  टिमरनी पिता स्व. श्री कृष्ण कांत बिल्लौरे निवासी टिमरनी भी इस में सदस्य के रूप म

कन्फ्यूज़्ड बचपन (हास्य व्यंग्य)

*1960 से 1980 तक जन्मे* इस श्रेणी के बच्चे कन्फ्यूजन की सीमाओं से आगे तक कन्फ्यूज़ड थे। पिटने के बाद पता चलता था कि हम क्यों पीटे गए थे । हमारे गाल पिटते पिटते *गलवान* तथा पीठ  पिटते पिटते *शक्ति पीठ* बन गईं हैं । हमाये शरीर मैं भगवान ने सुनने के लिए कान दिए हैं। लेकिन हमारे पेरेंट्स ने इन्हें दवा दबाकर विकासशील बना दिया है अभी तक पूर्ण विकसित नहीं हो पाए हैं। गदेलियां तो मास्साब ने छड़ी पड़े छम छम विद्या एक घमघम  के सूत्र वाक्य को प्रूफ करने में प्रयोग में लाई गई । हम 1960 से लेकर 1980 तक की पैदाइशें पप्पू गुड्डू टिंकू मुन्ना छोटे गुड्डू बड़े गुड्डू छोटा पप्पू बड़ा पप्पू आदि नाम से अलंकृत हो जाते थे ।    कई बार तो भ्रम होता था हम मनुष्य प्रजाति में हैं या गधा प्रजाति के प्राणी है क्योंकि जिसे देखो वह हमें गधा घोषित करने पर पूरी ताकत लगा देता था।     हमारे दौर में ट्यूशन सिर्फ गधे बच्चे पढ़ने जाते थे। अपने आप को होशियार बताने के चक्कर में 19 का पहाड़ा आज तक याद नहीं कर पाए पर रट्टा बकायदा मारा करते थे।   हमारी एक बुआ जी थी उन्हें तो ऐलान कर दिया था कि पढ़ेगा लिखेगा नहीं तो इ

अंग्रेज़ भारत से क्यों भागे.? लेखक :- श्रीमन प्रशांत पोळ

  *मुंबई का नौसेना आंदोलन*  -   प्रशांत पोळ  यह आर्टिकल श्री प्रशांत पोळ जी फेसबुक वॉल से आभार सहित प्राप्त किया है द्वितीय विश्वयुध्द के बाद की परिस्थिति सभी के लिए कठिन थी. ब्रिटन के तत्कालीन प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल भारत को स्वतंत्रता देने के पक्ष में नहीं थे. वे अपनी युवावस्था में भारत में रह चुके थे. ब्रिटीश आर्मी में सेकेंड लेफ्टिनंट के नाते वे मुंबई, बंगलोर, कलकत्ता, हैदराबाद आदि स्थानों तैनात थे. नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रॉविंस में उन्होंने अफगान पठानों के विरोध में युद्ध भी लडा था. १८९६ और १८९७ ये दो वर्ष उन्होंने भारत में गुजारे. भारत की समृद्धि, यहां के राजे - रजवाडे, यहां के लोगों का स्वभाव… यह सब उन्होंने देखा था. यह देखकर उन्हें लगता था कि अंग्रेज भारत पर राज करने के लिये ही पैदा हुए हैं. इसलिये द्वितीय विश्वयुद्ध के समय विंस्टन चर्चिल की ओर से सर स्टेफोर्ड किप्स को भारतियों का सहयोग प्राप्त करने के लिए भारत भेजा गया. इस क्रिप्स मिशन ने भारतीय नेताओं को यह आश्वासन दिया गया की युद्ध समाप्त होते ही भारत को सीमित स्वतंत्रता दी जाएगी.  इस आश्वासन को देने के बाद भ