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Public sector company LIC of India is issuing shares, special attention of policyholders

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Life Insurance Corporation of India is issuing IPO. Policy holders will be benefitted the most. This is a historic move in the stock market. Knowledgeable people say that the stock market is standing with outstretched arms for the IPO.  Only 15 days are allowed to update PAN in our database. The Policy holders have 10% reservation in IPO.  *PAN Number is the idenifier for our Policyholders*. The PAN number in IPO Application will be checked with our database.  Enlighten our field force to create awareness in Policyholders to  update the PAN in our policy masters. Never miss the chance to be a part of LIC IPO, the biggest IPO in history. *The policyholders can directly update PAN online*. *PAN can be updated at any branch .. Now All Policy Holder can register  Update  PAN no.  Mobile no.  E mail Id On LIC Policies on this link Kindly share it with all.  https://linkpan.licindia.in/UIDSeedingWebApp/

The common citizen of Pakistan has become a terrorist

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The common citizen of Pakistan has become a terrorist   The people of Sialkot took his life by making allegations of blasphemy. He was working as an export manager in a company.   This is sad news for Sri Lanka but it is a natural phenomenon for Pakistan.    Bharat ke purv mantri ne ji han main Salman Khurshid ki baat kar raha hun hindutv is different from Hindu. And this wise writer compared Hindutva to terrorist organizations. Priyantha Kumara was a Hindu Tamil citizen of Sri Lankan origin.    This event cannot happen in an ideal nation under any circumstances. In fact, a message has been spread all over the world from this incident that the majority of the population of Pakistan has been taught a lesson of hatred. In fact, a message has been spread all over the world from this incident that the majority of the population of Pakistan has been taught a lesson of hatred. There is only and only hatred in the basis of the path Pakistan is walking. Pakistani media is m

क्या ब्रह्मा चेलानी ने सही कहा न्यायालय के आदेश बारे में

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ब्रह्मा चेलानी जी ने ट्वीट करके सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक बहुत ऐसी टिप्पणी की है जिसे समझने की अब जरूरत है। The principle of separation of powers means the judiciary in no democracy shall exercise executive or legislative powers. But in India, alas, the Supreme Court, through the threat of action, has forced the state of Delhi to shut all schools in the name of fighting air pollution!   ब्रह्मा चेलानी कहते हैं कि-"शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत का अर्थ है कि किसी भी लोकतंत्र में न्यायपालिका कार्यकारी या विधायी शक्तियों का प्रयोग नहीं करेगी। लेकिन भारत में, अफसोस, सुप्रीम कोर्ट ने कार्रवाई की धमकी के माध्यम से, वायु प्रदूषण से लड़ने के नाम पर दिल्ली राज्य को सभी स्कूलों को बंद करने के लिए मजबूर कर दिया है!"   सिद्धांत: यह बात बिल्कुल सही है . लेकिन चेलानी साहब यह जानते ही होंगे कि-" न्यायपालिका कार्यपालिका और व्यवस्थापिका का अंतिम उद्देश्य  भारतीय नागरिकों को सुरक्षित रखना। और अगर तीनों के द्वारा राष्ट्रहित में कोई निर्णय लिया जाता है उसे कटघरे में खड़ा कर

आभासी खनक पर भारत सरकार का हथौड़ा चल सकता है..?

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आभासी खनक पर  भारत सरकार का हथौड़ा चल सकता है                    गिरीश बिल्लोरे मुकुल        4 फरवरी 2021 डाज़ी क्वाइन  2013 में प्रस्तुत की गई थी जिसे प्रमोट करके एलन मस्क ने अचानक लगभग 34 बिलियन डालर का  व्यवसाय तक बढ़ा दिया। एलन मस्क जैसा व्यक्ति  अगर किसी प्रोडक्ट को प्रमोट किया है तो लोगों का विश्वास पर बढ़ जाएगा ।                चित्र स्रोत यहां है       डॉज़ी क्वाइन की वैल्यू 69% बढ़ गई। जब अचानक सबके दिमाग में खलबली मची तब आप सोच रहे होंगे कि क्या वजह है कि भारत सरकार क्रिप्टो करेंसी पर हथोड़ा चलाने की बात कर रही है। अगर आपने बजट पूर्व 10 जनवरी 2021 के आसपास प्रकाशित समाचार पत्रों को ध्यान से पढ़ा होगा तो आपको पता चल गया होगा कि-"भारत सरकार और उसका रिजर्व बैंक भारत में क्रिप्टो करेंसी पर नकेल कसने वालें हैं ।    ऐसा नहीं है कि रिजर्व बैंक ने क्रिप्टो करेंसी को प्रतिबंधित ना किया हो जी हां याद कीजिए सन 2018 में क्रिप्टो करेंसी पर भारतीय रिजर्व बैंक के जरिए भारत सरकार ने प्रतिबंध लगाया था।    सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद यह प्रतिबंध हट गया था। क्रिप

What is Melody of Life मेलोडी ऑफ लाइफ क्या है ?

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मेलोडी ऑफ लाइफ क्या है ?       इसे समझने के लिए बहुत बड़ा दिल चाहिए। पर मेरे पास बहुत बड़ा दिल नहीं है तब मैं किस तरह जीवन के आल आपको सुन सकूंगा या उस अलाप की अनुगूंज का आभास कर सकूंगा। दरअसल मेलोडी ऑफ लाइफ वीतरागियों को  हासिल होती है सबको यह सब हासिल कैसे हो सकता है?    अक्सर हम बड़े बुजुर्गों को टोका टाकी करते हुए देखते हैं। पर इग्नोर इसलिए करते हैं कि वह उम्र के उस पड़ाव पर है जहां से उन्हें नए सिरे से कोई शिक्षा नहीं दी जा सकती। देना भी नहीं चाहिए वे मां बाप भाई मित्र या कोई भी हो सकता है।    परंतु इसका अर्थ यह नहीं की ऐसी स्थितियां दिल को कचोटती ना हो ।     जीवन आनंद का उत्सव है जीवन प्रेम का पंथ है। जीवन शोषण का और शोषित करने का मौका नहीं है।    मैं अगर ईश्वर वादी हूं तो मुझे अपने साथ बाकी सब को ईश्वर का अंश मानना ही होगा। पर मैं ऐसा नहीं करता हूं अपने आपको तो ईश्वर का अंश मान लेता हूं परंतु दूसरे को नहीं। ऐसी स्थिति में दूसरों गलतियां कमियां और उससे उत्पन्न विशाद मन पर हावी हो जाता है। मन की आज्ञा अनुसार हम वैसे ही कर्म करने लगते हैं। और यह कर्म हमें उत्तेजना ए

सांप्रदायिकता बनाम बेतरतीब सृजित मंतव्यों की स्थापना के प्रयास

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  बहुत दिनों से कन्वेंशनल एवं सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक सहिष्णुता का पाठ पढ़ाया जा रहा है। कुछ उदाहरण प्रस्तुत है कि कहीं से सकारात्मक वातावरण की उत्पत्ति होती है उसका स्वागत करना चाहिए। इन सवालों से ऊपर है काफिर और गज़वा ए हिंद जैसे शब्द..!    मनुष्य एक मानव का जन्म लेता है और फिर वह अपनी मान्यता के अनुसार या कहीं परंपरा के अनुसार उस मत को स्वीकार कर लेता है .     वह या तो मूर्ति पूजक हो जाता है या निरंकार ब्रह्म की उपासना में अपने आपको पता है। इन दिनों जो वातावरण निर्मित किया गया है वह है सनातन के विरुद्ध शंखनाद रने का। निरंकार  ब्रह्म तथा साकार ब्रह्म की उपासना पर किसी को कोई संघर्ष जैसी स्थिति निर्मित नहीं करनी चाहिए। जब स्वयं सिद्ध है कि भारतीय एक ही डीएनए के हैं तो सांस्कृतिक एकात्मता गुरेज़ कैसा. ?  इस सवाल की पतासाजी करने पर पता चला कि लोग एक दूसरे की पूजा प्रणाली पर भी सवाल उठाने लगे। काफिर का मतलब है कि जो बुरा है और बुरा वह है जो मूर्ति की पूजा करता है या जो उन डॉक्ट्रींस को नहीं मानता जो किसी ने कहे हैं। भाई यही संघर्ष का कारण है। अगर मैं कहूं कि मैं क़यामत का

भारत के संदर्भ में राष्ट्रवाद

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राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति की अवधारणा     आजकल राष्ट्रवादी विचारधारा बेहद प्रासंगिक और प्रभाव शिल्पी है। बावजूद इसके खुद को राष्ट्रवादी साबित करने के लिए लोग यह प्रयास करते हैं कि वह धर्म की वकालत करें या उस पर चर्चा करते रहे।     और जो अपने आप को राष्ट्रवादी नहीं मानते वह भी इतने कुंठा ग्रस्त नजर आते हैं कि किसी बहुसंख्यक आबादी को निशाना बनाने से खुद को बचा नहीं पाते। जहां तक भारत के संदर्भ में राष्ट्रवाद का प्रश्न है राष्ट्रवाद की परिभाषा का पुनरीक्षण या उसकी स्पष्ट व्याख्या जरूरी है।   वर्तमान में जो परिभाषा दी है सबसे पहले उसे देख लेते हैं:- " राष्ट्रवाद  (nationalism) यह विश्वास है कि लोगों का एक समूह इतिहास, परंपरा, भाषा, जातीयता या जातिवाद और संस्कृति के आधार पर खुद को विभाजित करता है। इन सीमाओं के कारण, वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि उन्हें अपने स्वयं के निर्णयों के आधार पर अपना स्वयं का संप्रभु राजनीतिक समुदाय, 'राष्ट्र' स्थापित करने का अधिकार है।"     बुद्धिमान और विद्वान इस संदर्भ में मौन है। और उनकी यही चुप्पी न केवल राष्ट्रवाद को सही