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पोट्रेट्स

  अक्सर उसे किसी न किसी को अपमानित करते अथवा किसी की चुगली करते देखना लोंगों का अभ्यास सा बन गया था .   सुबह दोपहर शाम निंदा और चुगलियाँ करना   उसके जीवन का मौलिक उद्देश्य था . कई लोगों ने कई बार सोचा कि उसे नसीहत दी जावे पर इस प्रकार का काम करने का लोग जोखिम इस वज़ह से नहीं उठाना चाहते क्योंकि वे जानते हैं कि अति के दुःखद परिणामों का आना निश्चित ही होता है .   संस्थानों में ऐसे दुश्चरित्रों से लोग बाकायदा सुविधाजनक अंतराल स्थापित कर ही लेते हैं . करना भी चाहिए नगर निगम की नालियों से बहने वाली गन्दगी में कोई पत्थर फैंक कर अपने वस्त्र क्यों खराब करे ..भला  !   समय के साथ साथ फतेहचंद का चेहरा  गुणानुरूप विकृत सा दिखाई देने लगा था सामने से टूटे हुए दांत ये साबित कर रहे थे कि बाह्य शारीरिक बल के प्रयोग से यह बदलाव आया है . ये लग बात है कि उसे किस रूप में परिभाषित किया जा रहा था किन्तु ज्ञान सभी को था . फिर भी बुद्धि चातुर्य के सहारे फ़तेह अक्सर अपनी मजिल फतह कर ही लेता था . मित्रो किसी ने उसे सुझाया कि वो एक बेहतरीन विश्लेषक है तो क्यों नहीं चित्रकारी करे लोगों को पोट्रेट करे

रेलवे क्रासिंग वाला किशोर और बाइक वाला

साहेब ये  घोड़ा है … इसकी पीठ पर सवार बादशाह की रौबीली मूंछ सुनहरी रकाब , ये देखिये घोड़े की  झबरीली पूंछ     दस रुपये में ..... आपको घोडा तो क्या  बादशाह भी नहीं मिलेगा .... खरीद लीजिये न ..... आपके दस रुपये बहुत काम आएंगे ....... आपकी बेटे  के चेहरे पर हंसी , बेटी  के मुखड़े पर मुस्कान लाएँगे ..... सा ’ ब दे दूँ..... दो ले लीजिये बीस रुपए बेकार नहीं जाएंगे ... बोलो साब बोलो ..... जल्दी बोलो ..... गाड़ी आने वाली है गेट खुल जाएगा । आपका घोडा यहीं रह जाएगा ...           अनचाहे विक्रेता से खीज कर आलीशान कार के काँच ऊपर चढ़ गए । शाम आसरा भी टूटता नज़र आया हताश किशोर की हताश आंखें पीछे वाले बाइक सवार नें पढ़ लीं , कार का शीशा चढ़ते हुये जो देख रहा था ...... बाइक सवार ने पचास का नोट देकर कहा ये ये मुझे दे दो सा ’ ब , छुट्टे ... बीस दीजिये न ... नहीं है ...... कोई बात नहीं कल लौटूँगा न तब वापस ले लूँगा ..... रोज़ निकलता हूँ । सा ’ ब आप ले जाओ ... छुट्टे कल दे देना !           बाइक सवार युवक ने लगभग डपट कर उसे बीस की जगह पचास थमा दिये । किशोर ने बाइक का नंबर नोट