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‘बाणस्तंभ’ - प्रशांत पोळ

  व्हाट्सएप पर प्राप्त    प्रशांत पोळ का आलेख ‘ बाणस्तंभ ’ मिसफिट पर प्रकाशित करते हुए हर्षित हूँ . ‘ इतिहास ’ बडा चमत्कारी विषय हैं. इसको खोजते प्रशांत पोळ खोजते हमारा सामना ऐसे स्थिति से होता हैं , की हम आश्चर्य में पड जाते हैं. पहले हम स्वयं से पूछते हैं , यह कैसे संभव हैं.. ? डेढ़ हजार वर्ष पहले इतना उन्नत और अत्याधुनिक ज्ञान हम भारतीयों के पास था , इस पर विश्वास ही नहीं होता..! गुजरात के सोमनाथ मंदिर में आकर कुछ ऐसी ही स्थिति होती हैं. वैसे भी सोमनाथ मंदिर का इतिहास बड़ा ही विलक्षण और गौरवशाली रहा हैं. १२ ज्योतिर्लिंगों में से पहला ज्योतिर्लिंग हैं सोमनाथ..! एक वैभवशाली , सुंदर शिवलिंग..!! इतना समृध्द की उत्तर-पश्चिम से आने वाले प्रत्येक आक्रांता की पहली नजर सोमनाथ पर जाती थी. अनेकों बार सोमनाथ मंदिर पर हमले हुए. उसे लूटा गया. सोना , चांदी , हिरा , माणिक , मोती आदि गाड़ियाँ भर-भर कर आक्रांता ले गए. इतनी संपत्ति लुटने के बाद भी हर बार सोमनाथ का शिवालय उसी वैभव के साथ खड़ा रहता था. लेकिन केवल इस वैभव के कारण ही सोमनाथ का महत्व नहीं हैं. सोमनाथ का मंदिर भारत के पश्चिम