सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पोस्ट

माँ तुझे प्रणाम लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

माँ....तुझे प्रणाम...माँ तुझे सलाम

अभिनव बिंद्रा , की कोशिश से स्वर्ण किरण ,मेरे आँगन में बिखरीं , और वो जो - वो पैरों से नहीं हौसलों से चलता है !" जी हाँ वो जो तारे जमीं पर , ले आता है .....जी हाँ वो जीमज़दूर है किसान है जी हाँ वही जो आभास -दिलाता है सु इश्मीत , सी यादें जो पलकों,की किनोरें भिगो देतीं हैं उन सबको मेरा सलाम माँ तुझे प्रणाम माँ तुझे सलाम