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"ज्ञानरंजन जी अब पहल बंद कर देंगे "

--> पंकज स्वामी   गुलुश   नें बताया की ज्ञान जी ने अपना निर्णय सुना ही दिया की वे पहल को बंद कर देंगे   कबाड़खाना   ने इस समाचार को को पहले ही अपने ब्लॉग पर लगा दिया था.   व्यस्तताओं   के चलते या कहूं   “ तिरलोक   सिंह ” होते तो ज़रूर यह ख़बर मुझे समय पर मिल गई होती   लेकिन इस ख़बर के कोई और मायने निकाले भी नहीं जाने चाहिए . साहित्य जगत में यह ख़बर चर्चा का   बिन्दु   इस लिए है की मेरे   कस्बाई   पैटर्न   के शहर जबलपुर को पैंतीस बरस से विश्व के नक्शे पर   अंकित   कर रही पहल के   आकारदाता   ज्ञानरंजन   जी ने पहल बंद कराने की घोषणा कर दी . पंकज स्वामी की बात से करने बाद   तुंरत   ही मैंने ज्ञान जी से बात की .ज्ञान जी का कहना था :"इसमें हताशा , शोक   दु:ख जैसी बात न थी न ही होनी चाहिए .दुनिया भर में सकारात्मक   जीजें   बिखरीं   हुईं हैं . उसे समेटने और   आत्मसात करने का समय आ गया है" पहल से   ज्ञानरंजन   से अधिक उन सबका रिश्ता है जिन्होंने उसे   स्वीकारा. पहल अपने चरम पर है और यही बेहतर वक़्त है उसे बंद करने का . हाँ , पैंतीस वर्षों से