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ये भी नहीं अरे भाई ये न ये भी नहीं !

1928 में आई एक फिल्म में सेलफोन की क्लिपिंग  आज जिस बिंदु पर चर्चा करना चाहता हूँ वो सनातन शब्द – नेति नेति या    नयाति नयाति ... अर्थात ये भी नहीं अरे भाई ये न ये भी नहीं ! दिनों से एक बात कहनी थी   परन्तु सोचता था कि – संभव है कि आगे आने वाले और बीते समय की यात्रा की जा सकती है. परन्तु वास्तव में यह एक असत्य थ्योरी ही है. जिसे मानवीय मनोरंजन के लिए गढ़ा गया है . ये अलहदा तथ्य है कि “असीमित संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता” पराशक्तियाँ भी हैं जो ऐसा कुछ करा सकतीं हैं. अगर परा शक्तियां कुछ कर या सकतीं सकतीं हैं तो केवल इतना कि आपको बीता समय हूबहू स्मरण करा दे अथवा भविष्य की झलक स्वप्न   के रूप में दिखा दे पर भविष्य का स्वप्न केवल आभासी होगा . किशोरावस्था में   असंख्य बार मैंने महसूस किया था कि मैं सायकल और बाइक चला रहा हूँ. ऐसा अनुभव जागते हुए तो कदापि नहीं केवल स्वप्न में यह संभव था . जबकि मुझे जानने वाले सभी जानते हैं कि ऐसा संभव कदापि नहीं है. क्योंकि मेरे दाएं अंग में पक्षाघात है मसल्स हैं ही नहीं शरीर यंत्र का संचलन असामान्य एवं अतिरिक्त गैजेट्स (सहायक-उपकरण) प