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16 दिसम्बर क्या तुमने कभी सोचा था कि तुम इस तरह याद किये जाओगे

            पिंड दान कराने गये एक पंडित जी ने कहा - "तुम्हारे पिता को सरिता के मध्य में छोड़ना है ..वहां से सीधे स्वर्ग का रास्ता मिलेगा !" नाविक ने कहा- "पंडिज्जी.. पिंड का चावल तो मछलियां खुद तट पर आ के खा लेंगी आप नाहक मध्य-में जाने को आमादा हैं. मध्य में तो भंवर है.. कुछ हुआ तो .." पंडिज्जी- हे नास्तिक नाविक, तुम जन्म और कर्म दौनो से अभागे इसी कारण से हो क्योंकि तुमको न तो धर्म का ज्ञान है न ही जन्म जन्मांतर का बोध.. यजमान बोलो सच है कि नहीं.. शोकमग्न यजमान क्या कहता शांत था कुछ कहा न गया उससे .. नाविक ऐसे वक़्त में उस पर  अपनी राय थोंप कर मानसिक हिंसा नहीं करना चाहता था . चला दिया चप्पू उसने सरिता के मध्य की ओर.. मध्य भाग में वही हुआ जिसका भय था नाविक को नाव लड़खड़ाई.. जैसे-तैसे नाविक ने नाव को साधा वापस मोड़ ली नाव और कहा -  पंडिज्जी, यदि मेरी वज़ह से आप दौनों अकाल मृत्यु का शिकार होते तो मुझे घोर पाप लगता.. अस्तु मैं सुरक्षित स्थान पर पिंडप्रवाह करा देता हूं.  पंडिज्जी मौन थे... सारे  ज्ञान चक्षु खुल गये थे उनके........ किसी के लिये मुक्ति का मार्ग कोई द