सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पोस्ट

शेर लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

चंद शेर : गिरीश"मुकुल"

बदला ? कोई सवाल   नहीं   क्या लेके करूंगा दिल जीतने निकला हूँ, दिल जीत ही लूंगा ..!! ::::::::::: मेरे तुम्हारे बीच में क्या रफ़्तार का नाता ? तुम तेज़ी से आ रहे हो मैं पर्वत सा खडा हूँ :::::::::::: आओ कहीं मिल बैठ के बचपन को पुकारें आएगा क्या हम जैसा ही छिप जाएगा कहीं :::::::::::: मेरी ख़ाक बिखेर देना  हरियाली ही मिलेगी   फसले - बहार हूँ, कोई  सेहरा नहीं हूँ मैं  !! :::::::::::: दामन पे मेरे दाग ! ज़रा बच के निकलना षडयंत्र तुम्हें तुम्हारे  कहीं याद न आएं  ? :::::::::::: आँखों में मेरी  झौंक गया किरकिरी सी रेत फिर आके पूछता है ज़रा रास्ता बताइये ?   :::::::::::: आँखों की किरकिरी हूँ वज़ह कोई तो होगी  जा गुलबकावली का अर्क खोज के ले आ !