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" सोलह जून से आज तक और आज के बाद भी !"

 केदारनाथ मंदिर   केदारनाथ त्रासदी के बाद समूचा देश सदमें में है, अचानक आई त्रासदी के सामने नि:शब्द सा अवाक सा पर जो कुछ भी घटता है उसके पीछे किसी दोषी को तलाशना कितना सही है ? ये वक्त है निर्मम त्रासदी पर शोकाकुल हो जाने का उनके लिए शोक मग्न होने का जो जानते भी नहीं थे कि उनका गुनाह क्या है ।                     इस बीच बहुत से मसलों पर बात हुई कहीं उत्तेजक वार्ताएं कहीं तनाव कहीं छिद्रांवेषण तो कहीं किसी के ज़ेहन में उम्मीदों का लकीरें फिर अचानक रुला देने वाली खबरें यानी कुल मिला कर एक अनियंत्रित अनिश्चित वातावरण का एहसास सोलह जून से आज तक यही सब कुछ . हिरोशिमा नागासाकी से लेकर टाइटैनिक हासदा  जापान की सुनामी चीन की बाढ़  भारत के भूकंप जाने ऐसी ऐसी कितनी त्रासदियाँ होंगी जो  अवाक कर देतीं हैं .                     हर त्रासदी के पीछे कोई न कोई वज़ह होती है . भोपाल गैस त्रासदी को ही लीजिये    हिरोशिमा नागासाकी से कमतर नहीं थी आज भी मिक के शिकार बीमार शरीर लिए दिख जाते हैं .                        विकास की पृष्टभूमि जब जब भी लिखी जाती है तो मानिए कि  त्रासदियाँ  तय हैं मन