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आम आदमी का ब्लाग ट्रायल

                सुदूर समंदर में एक द्वीप है जहां से मैं एक वाकया आपके सामने पेश करने की गुस्ताखी कर रहा हूं.. उस द्वीप का वातावरण ठीक हमारे आसपास के वातावरण की मानिंद ही है. वहां एक अदालत में  एक आदमजात  किसी अपराध में कठघरे में खड़ा किया गया था.. लोग बतिया रहे थे  उस पर आरोप है  कि उसने सरकार से कुछ बेजा मांग की थी. वो सरकार से  सरकार और उसकी बनाई व्यवस्था पर लगाम लगाने की गुस्ताखी कर बैठा .        द्वीप की सरकार बड़ी  बेलगाम थी विरोधी दल के  लोग   सरकार को लगाम लगाने की सलाह दे रहे थे . सो सरकार ने    लगाम के उत्पादन अवैधानिक घोषित कर दिया भाई हैं कि अपना लगाम बनाने का कारखाना बंद न करने पे आमादा थे.. हज़ूर के कान में बात जब दिखाई दी तो उनने अपने से बड़े हाक़िम को दिखाई बड़े ने और बड़े को और बड़े ने उससे बड़े को फ़िर क्या बात निकली दूर तलक जानी ही थी.. सबने बात देखी वो भी कान से.. आप सोच रहे हो न कि बात कान से कैसे देखी होगी.. ?              सवाल आपका जायज़ है ज़नाब पर आप जानते ही हो कि  आजकल अहलकार से ओहदेदार .. हाक़िम से हुक़्मरान तक सभी के कान आंख बन गये हैं वे सब कान से