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सोशल फ़ोर्स क्या है ...?

किसी ने मुझसे सवाल किया कि क्या सामाजिक बदलाव की भूमिका में न्यायपालिका व्यवस्थापिका कार्यपालिका प्रेस की भूमिका होती है क्या यदि हाँ तो कैसी   ? श्रीमान मुझे बताएं कि आप कैसे बदलाव की बात कर रहे हैं   ? मेरे प्रतिप्रश्न को अपनी ओर आया प्रहार समझ कर भाई साहब जरा सा तनावग्रस्त दिखे । मित्र को यह समझाना पड़ा कि भाई बदलाव बदलाव दो तरह के होते हैं.. सृजनात्मक    एवं विध्वंसक . मित्र जरा शीतल हुए.. उनने सृजनात्मक बदलाव को चुना . जो कुछ बात हुई    उसे अपनी शैली में आप सबसे बाँट रहा हूँ. सकारात्मक बदलाव    में प्रमुख भूमिका होती है सामाजिक-बल अर्थात   Social Force  की. जिसका प्रवाह एक खास तरह का वर्ग करता है...    जिसमें एक या दो अथवा अधिकतम पांच फीसदी लोग संलंग होते हैं. यही समूह   निर्माणकर्ता    है सोशल फ़ोर्स का . जिसमें विचारक चिंतक आध्यात्मिक विश्लेषक कलाकार साहित्यकार चित्रकार किस्सा बाज़ी करने वाले    लोग शामिल    हैं . इनके सतत सृजन से वैचारिक बदलाव आता है. जो प्रसारित होकर सामान्य दिनचर्या वाले लोगों की सोच में बदलाव लातें हैं.    वैचारिक बदलाव से ही एक प्रभावी    सा