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जी हां मैं मुम्बई से सीधा प्रसारण करूंगा :गिरीश बिल्लोरे

प्रेस विज्ञप्ति शुक्रवार दि. 09 दिसंबर 2011 को सुबह 10 बजे से कल्याण पश्चिम स्थित के. एम. अग्रवाल कला, वाणिज्य एवम् विज्ञान महाविद्यालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग संपोषित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद््घाटन सुनिश्चित हुआ है।  संगोष्ठी का मुख्य विषय है  ``हिन्दी ब्लागिंग : स्वरूप, व्याप्ति और संभावनायें।''  यह संगोष्ठी शनिवार 10 दिसंबर 2011 को सायं. 5.00 बजे तक चलेगी। संगोष्ठी के उद््घाटन सत्र में  डॉ. विद्याबिन्दु सिंह  - पूर्व निदेशिका उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ,  श्री. रवि रतलामी  - वरिष्ठ हिन्दी ब्लॉगर मध्यप्रदेश एवम्  डॉ. रामजी तिवारी  - पूर्व अध्यक्ष हिंदी विभाग मुंबई विद्यापीठ, मुंबई के उपस्थित रहने की उम्मीद है। विशिष्ट अतिथि के रूप में नवभारत टाईम्स, मुंबई के मुख्य उपसंपादक  श्री. राजमणि त्रिपाठी  जी भी उपस्थित रहेंगे। संगोष्ठी का उदघाटन  संस्था के सचिव  श्री. विजय नारायण पंडित  करेंगे। एवम् अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष  डॉ. आर. बी. सिंह  करेंगे। इस संगोष्ठी का `वेबकास्टिंग' के माध्यम से पूरी दुनिया में जीवंत प्रसारण (लाईव टेलीकॉस्ट) करने की यो

दिल्ली ब्लागर्स मीट : प्रेस कान्फ़्रेंस लाइव जबलपुर एवम इंदौर से

गिरीश बिल्लोरे मुकुल द्वारा जबलपुर से सुनने के लिये चटका लगाएं                                   " लाइव " पर ____________________________________________ अर्चना चावजी इंदौर से               

अंगुली-पुराण

(आपने शायद भारत ब्रिगेड पर यह सटायर  देखा होगा .... न देखा हो तो कोई हर्ज़ नहीं उस अधूरे आलेख को पूरा कर आदर-सहित पेश कर रहा हूं यहां....) अंगुली करने में हम  भारत  वालों की कोई तोड़ नहीं है ।हमें हर मामले में उंगली करनें में महारत हासिल है .....!              गोया कृष्ण जीं ने गोवर्धन पर्वत को अंगुली पे क्या उठाया हमने उनकी तर्ज़ पर हर चीज़ को अंगुली पे उठाना चालू कर दिया है । मेरे बारे मे आप कम ही जानते हैं ...! किन्तु जब अंगुली करने की बात हो तो आप सबसे पहले आगे आ जायेंगें कोई पूछे तो झट आप फ़रमाएंगे "बस मौज ले रहा था ?" अंगुली करने की वृत्ति पर अनुसंधान करना और ब्रह्म की खोज करना दोनों ही मामलों में बस एक ही आवाज़ गूंजती है "नयाति -नयाति" अर्थात "नेति-नेति" सो अब जान लीजियेजिसे जो भी सीखना है सीख सकता है बड़ी आसानी से ...! जानते हैं कैसे ? अरे भाई केवल अंगुली कर कर के !! मुझ जैसे लोग जो कम्प्यूटर को कम भी न जानते थे बस अंगुली कर कर के कम्प्यूटर-कर्म सीख गया देखिये मेरी अंगुली को आज तक कुछ भी नहीं हुआ ...! ये अलहदा बात है कि कम्प्यूटर ज़रूर थोड़ा खर

प्रीत की तुम मथानी ले मेरा मन मथ के जाती हो

प्रीत की तुम मथानी ले  मेरा मन मथ के जाती हो कभी फ़िर ख्वाब में  आके  मुझे  ही  थपथपातीं हो ! क़िताबों में तुम्हीं तो हो ,दीवारों पे तुम्ही तो हो - बनके  मीठी  सी  यादें तुम मन  को  गुदगुदातीं हो..! विरह की पोटली ले के कहो अब मैं किधर जाऊं आ भी जाओ कि क्यों कर तुम मुझे अब आज़माती हो  

अलबेला खत्री लाइव फ़्राम जबलपुर

सूरत से सिंगरौली व्हाया जबलपुर जाते समय जबलपुरियों हत्थे चढ़ गये राज़ दुलारे अलबेला के साथ आज न कल देर रात तक फ़ागुन की  आहट का स्वागत किया  गया बिल्लोरे निवास पर डाक्टर विजय तिवारी "किसलय" बवाल ,और हमने यक़ीं न हीं तो देख लीजिये   तयशुदा कार्यक्रम के मुताबिक हम कार्यालयीन काम निपटा के हज़ूरे आला की आगवानी के वास्ते जबलपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफ़ार्म नम्बर चार पर खडे़ अपने ड्रायवर रामजी से बतिया रहे थे. समय समय पर हमको  अलबेला जी कबर देते रहे कि अब हम यहां हैं तो अब हम आने ही वाले हैं किंतु पता चला कि महानगरी एक्सप्रेस नियत प्लेटफ़ार्म पर न आकर दो नम्बर प्लेट फ़ार्म पर आने वाली है. सो बस हम भी जबलपुर रेलवे स्टेशन के मुख्य-प्लेट फ़ार्म पर आ गये. जहां ट्रेन आने के बावज़ूद भाई से मुलाक़ात न हुई. मुझे लगा कि कि खत्री महाशय ने फ़टका लगा दिया. कि फ़िर एक फ़ोन से कन्फ़र्म हुआ कि ज़नाब यहीं हैं. कार में सवार हुये  अलबेला जी को  इस बात का डर सता सता रहा कि मेरे घर उनका अतिशय प्रिय पेय मिलेगा या नहीं, मिलेगा तो पता नहीं पहुंचने के कितने समय बाद मिलेगा जिस पेय के वे तलबगार हैं....

कुछ चुनिन्दा वेबकास्ट

हिन्दी ब्लागिंग पर पि्यूष पाण्डॆ जी SAMEERLAL ON THE WAY JBP TO DELHI "Hai Baton me Dam" Lalit Sharma Live From Raipur ललित शर्मा जी से बातचीत के बीच विवेक रस्तोगी (बैंगलोर) से बातचीत "Hai Baton me Dam" Lalit Sharma Live From Raipur राजीव तनेजा साहब से बात चीत Talk Show With Rajeev Taneja Dehli Happy Republic Day :Singer archana विनत श्रद्धांजली पंडित भीमसेन गुरुराज जोशी जन्म 4 फरवरी 1922 महानिर्वाण 24 जनवरी 2011 ब्लॉगप्रहरी नेटवर्क के संचालक एवं न्यू मीडिया एक्सपर्ट : कनिष्क कश्यप दिल्ली से बातचीत ब्लॉगप्रहरी नेटवर्क के संचालक एवं न्यू मीडिया एक्सपर्ट : कनिष्क कश्यप दिल्ली से बातचीत ब्लॉगप्रहरी नेटवर्क के संचालक एवं न्यू मीडिया एक्सपर्ट : कनिष्क कश्यप दिल्ली से बातचीत ब्लॉग वार्ताकार

वेबकास्ट अमृतस्यनर्मदा : लेखक अमृतलाल वेगड़

               जबलपुर संस्कारधानी के लेखक,कलाकार,श्रीयुत अमृतलाल वेगड़ की कृति  अमृतस्यनर्मदा का वेब कास्ट सुधि साथियों के लिये सादर प्रस्तुत है .  

महफ़ूज़ मुझे खुद मुझसे ज़्यादा प्रिय हो..!

प्रिय महफ़ूज़ "असीम-स्नेह" बज़ से जाना कि अब बिलकुल ठीक हो हम सबके लिये   खुशी की बात है. तुम्हारी कविता तुमको याद है न  Fire is still alive. But what of the fire? Its wood has been scattered, But the embers still dance. Though the fire is tiny, It survived. Though the fire is weak, It's still alive. Mahfooz Ali   महफ़ूज़ भाई तुम्हारे जीवन की कविता है सच  तुम वो आग हो जिसे कोई सहजता से खत्म कैसे कर सकता है. मैं क्या सारे लोग तुम्हारी ज़िंदगी के लिये अपने अपने तरीक़े से प्रार्थनारत थे. कौन हो किधर से हो कैसे हो मैं नहीं जानना चाहता. पर नेक़ दिल हो तभी तो "महफ़ूज़" हो. सारी बलाएं जो भी जब भी तुम पर आतीं हैं जिसकी आशंका मुझे सदा रहती है ईश्वर की कृपा से सच ज़ल्द निपट ही जातीं हैं.ज़िन्

हेनरी का हिस्सा

पिता की मौत के बाद अक्सर पारिवारिक सम्पदा के बंटवारे तक काफ़ी तनाव होता है उन सबसे हट के हैनरी  बैचेन और दु:खी था कि पिता के बाद उसका क्या होगा. पिता जो समझाते   वो पब में उनकी बात का माखौल उड़ाता उसे रोजिन्ना-की गई  हर उस बात की याद आई जो पिता के जीवित रहते वो किया करता था. जिसे पापा मना करते रहते थे.सबसे आवारा बदमाश हेनरी परिवार का सरदर्द ही तो था ही बस्ती के लिये उससे भी ज़्यादा सरदर्द था. पंद्रह साल की उम्र में शराब शबाब की आदत दिन भर सीधे साधे लोगों से मार पीट जाने कितनी बार किशोरों की अदालत ने उसे दण्डित किया. पर हेनरी के आपराधिक जीवन  में कोई परिवर्तन न आया. अंतत: उसे पिता ने बेदखल कर दिया कुछ दिनों के लिये अपने परिवार से. पिता तो पिता पुत्र के विछोह  की पीड़ा मन में इतने गहरे पहुंच गई कि बस खाट पकड़ ली पीटर ने. प्रभू से सदा एक याचना करता हेनरी को सही रास्ते पे लाना प्रभु..? पीटर  ज़िंदगी के आखिरी सवालों को हल करने लगा. मरने से पहले मित्र जान को बुला सम्पदा की वसीयत लिखवा ली पीटर ने. और फ़िर अखबारों के ज़रिये हेनरी को एक खत लिखा.   प्रिय हेनरी अब तुम वापस आ जाओ, तुम्हारा निर्वासन समाप