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जबलपुरिया होली : ढोलक-मंजीरे की थाप तो गोया थम ही गईं

टिमकी वाली फ़ाग न सुन पाने का रंज गोलू भैया यानी जितेंद्र चौबे को भी तो है                   होली की हुल्लड़ का पहला सिरा दूसरे यानी आखिरी सिरे से बिलकुल करीब हो गया है यानी बस दो-चार घण्टे की होली. वो मेरा ड्रायवर इसे अब हादसा मानने लगा है. कह रहा था :-"बताईये, त्यौहार ही मिट गये शहरों का ये हाल है तो गांव का न जाने क्या होगा. " उसका कथन सही है. पर उसके मन में तनाव इस बात को लेकर था कि शुक्रवार  को मैने उसे समय पर नहीं छोड़ा. होलिका दहन के दिन वो चाह रहा था कि उसे मैं इतना समय दूं कि वो दारू-शारू खरीद सके समय रहते. मुन्नी की बदनामी पे नाचना या शीला की ज़वानी पर मटकना होगा... उसे.               यूं तो मुझे भी याद है रंग पंचमी तक किसी पर विश्वास करना मुहाल था दसेक बरस पहले. अगले दिन के अखबार बताते थे कि फ़ंला मुहल्ले में तेज़ाब डाला ढिकां मुहल्ले में चाकू चला.अपराधों का बंद होना जहां शुभ शगुन है जबलपुरिया होली के लिये तो दूसरी तरफ़ ढोलक-मंजीरे की थाप तो गोया थम ही गईं जिसके लिये पहचाना जाता था मेरा शहर अब बरसों से फ़ाग नहीं सुनी....इन कानों ने. अब केवल शीला मुन्नी का शोर स

मेरे मुहल्ले मे आये थे अमिताभ बच्चन जी

ग्वारीघाट की शाम कोशिश थी कि सबसे पहले माई को गुलाल अर्पण करूं  कल 19 मार्च 2011 की तस्वीर है उसपार होली के लिये सज़ा संवरा गुरुद्वारा  इस पार चिन्मय शुभम गोलू भैया के साथ दीप दान की जुगत लगा रहे थे आज तो गज़ब ही हो गया हमारी सुबह देर रात तक मोहल्ले में व्यस्त रहने की वज़ह से  अरे क्या सजल अमिताभ बच्चन जी से लम्बा है इस साल इसके हाथ  पीले करना है मिलें या लिखें आपका नाम व पता किसी को नही बताऊंगा  वैसे उज्जवल भी लाइन में लगा . जो रह जाए बाद में ट्राय करते रहना  वैसे शादी तो करेंगे पर बेचेंगे नहीं  हम इन को  गौर दादा जी को तिलक लगाते अमिताभ बच्चन  और फ़िर फ़ोटो खिचवा ही लिया लम्बू जी ने सच आज़ आये थे अमिताभ जी जबलपुर  मुहल्ले में टोली का घूमना एक मज़ेदार और अनोखा पहलू है आज़ फ़िर एक बार मलय जी की लायब्रेरी को देखने का मौका मिला  मलय जी,बाबूजी,मिश्रा जी, वर्मा जी, सभी तो थे साथ साथ  कविवर मलय का ये अदभुत चित्र जी भूल ही गया था भतीजा चिन्मय बच्चों मे खोजे न मिल रहा था आज़,  जाने  क्या खोजतीं आखैं वर्मा जी की राख का ढेर है शोला है न चिंगारी है..  कल रात जली हुई राख बनी

बवाल मिथलेश और अनीता कुमार जी एक साथ

यह एपिसोड होली के दिन रिकॉर्ड किया है जिसे हू ब हू पेश कर रहा याद आप यहाँ न सुन पाए तो ''इधर'' चटका लगाइए जी    _________________________________________________ प्रतीक्षा कीजिए शीघ्र ही होगी पाबला जी से धमाकेदार मुलाक़ात हिन्दी ब्लागिंग में जारी झंझावातों पर खुल के बोले पाबला जी  ________________________________________ 

होली हंगामा पॉडकास्ट भाग 01

पूज्य एवं प्रियवर होली हंगामा पॉडकास्ट  भाग एक में हार्दिक स्वागत है इस भाग में आप मिलिए  शरद कोकस,संगीता पुरी,अविनाश वाचस्पति,अनिता कुमार, दीपक मशाल जी से और कल रात्रि अजय झा , शहरोज़, और रानी विशाल जी से,

होली पर आमंत्रण

मेरे जबलपुर में होली के शुब अवसर पर आप सभी लोग मय-[बचे-हुए-बाल सहित ] बाल-बच्चों के सादर आमंत्रित हैं। मुख्य समारोह पाते नामक संस्था के स्थायी पते tहाने के बाजू में ,mitr - निवास पर होगा । जिसके इंत" ज़ाम " अली होंगे "राजेश पाठक "चतुर" यूँ तो इनका उपनाम "प्रवीण" है समानार्थी शब्द का इस्तेमाल करने की इजाज़त हमने हिरण्यकश्यपों से ले ली है । किसी ..ने कोई असहमति नहीं जतायी। सबको मालूम है के वे चतुर ही हैं। अब कितना बड़ा "...हाउस" चला रहे हैं बरसों से ।स्वागत की हमने पूरी-पूरी व्यवस्था कर रखी है मुख्य रेलवे स्टेशन से ही आपका स्वागत शुरू हों जाएगा आपको जी हाँ ... आपको इतना करना है कि डा०सन्ध्या जैन तथा डा० ठाकुर "दादा" को उनके फोन नम्बर पे फोन लगाइये वे फोन पे आपको कह देंगे:- "संस्कार-धानी" में आपका स्वागत है...!!" बाद, kavita , भी सुनाएंगे ऐसी इससे बेहतर भी ये शब्द सुने बिना आप स्टेशन से बाहर न जाएं बाहर आपको क्या करना है कृपया रिजर्वेशन तो करा आइये फिर बताउंगा आपको क्या करना है...? लगता है हमारी पहली न्यौतार को आमंत्