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न्यू-मीडिया : नये दौर की ज़रूरत

                        अंतर्जाल पर भाषाई के विकास के साथ ही एक नये दौर में मीडिया ने अचानक राह का मिल जाना इस शताब्दी की सबसे बड़ी उपलब्धि है.विचारों का प्रस्फ़ुटन और उन  विचारों को प्रवाह का पथ मिलना जो शताब्दी के अंत तक एक कठिन सा कार्य लग रहा था अचानक तेजी से इतना सरल और सहज हुआ कि बस  सोचिये की बोर्ड पर टाइप कीजिये और एक क्लिक में मीलों दूरी तय करा दीजिये....प्रस्फ़ुटित विचारों की मंजूषा को. बेशक एक चमत्कार वरना अखबार का इंतज़ार,जिससे आधी अधूरी खबरें..मिला करतीं थीं श्रृव्य-माध्यम यानी  एकमात्र आकाशवाणी वो भी सरकार नियंत्रित यानी सब कुछ एक तरफ़ा और  तयशुदा कि देवकी नंदन पाण्डेय जी कितना पढ़ेगें आठ बजकर पैंतालीस मिनिट वाली न्यूज पर. यानी खुले पन का सर्वथा अभाव समाचार सम्पादकों की मर्ज़ी पर खबरों का प्रकाशन अथवा प्रसारण तय था .सरकारी रेडियो टीवी (दूरदर्शन) की स्वायत्तता तो आज़ भी परिसीमित है.        निजी चैनल्स एवम सूचना प्रसारण के निजी साधनों का आगमन कुछ दिनों तक तो आदर्श रहा है किंतु लगातार विचार प्रवाह में मीडिया घरानो संस्थानों का धनार्जन करने वाला दृष्टिकोण न तो समाचारों

न्यू मीडिया में हिंदी की दशा और दिशा : कनिष्क कश्यप

            न्यू मीडिया , विशेष तौर पर हिंदी न्यू मीडिया जिसका सबसे लघु इकाई एक ब्लॉग को कहा जा सकते , अब तक का सर्वाधिक उपेक्षित और गैर-प्रभावी बता कर उपेक्षा की दृष्टि सहता रहा है. यह सत्य है कि ” न्यू मीडिया ” शब्द के मायने इतने संकीर्ण नहीं कि मात्र ब्लॉग लेखन ही उसकी परिधि में  आये. यह एक तकनिकी क्रांति के बाद और विशेष तौर पर   डाटा ट्रान्सफर ओवर वर्ल्ड वाइड   वेब के क्षेत्र में आये चमत्कारी परिवर्तन के कारण इतना आग्रही हो गया कि इसे समान्तर मीडिया की तरह देखने और आंकने की  बौद्धिक मजबूरी पैदा होती गयी. आभार: ब्लॉग ठाले बैठे  इसकी परिधि एक ब्लॉग , एक वेबसाईट से लेकर फेसबुक , ट्वीटर , विकिपीडिया और यु-ट्यूब के प्रभावी हस्तक्षेप से कहीं आगे   कनवर्जेन्स   तक को समेटे हुए है.   कनवर्जेन्स   का अर्थ है आपके मोबाइल फोन (आई-फोन) , पॉम पैड में पुरे सुचना तंत्र का विलय हो जाना . अब चाहे वह टीवी हो , अखबार का ऑनलाइन संस्करण हो , रेडियो प्रसारण हो , फेसबुक हो या आपका ब्लॉगस्पोट का ब्लॉग. यह सब सिमट कर एक छोटे डिवाइस में आ जाना ही कनवर्जेन्स कहलाता है. अब बुनियादी सवाल यह उठता है , कि आ