सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

पोस्ट

महिला लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पालने से पालकी तक बेटियों के लिये

"पुत्री वती भव: कहने में डर कैसा"

"पुत्री वती भव: कहने में डर कैसा" ताज़ातरीन समाचार एक ब्लॉग "रांचीहल्ला"से तथा समीर लाल की मज़ाहिया किंतु गहरे अर्थ वाली पोस्ट प्रेरित हो सोचता हूँ “औरतों की दशा जितनी चिकित्सा विज्ञान ने बिगाड़ के रखी है उससे अधिक ज़िम्मेदार है मध्य वर्ग की सामाजिक विवशता यहाँ मध्यवर्ग को सरे आम अपमानित करना मेरा लक्ष्य बिलकुल नहीं है किंतु वास्तविकता यही है "पति बदलू कथानकों पे आधारित एकता कपूर छाप सीरियल देखतीं महिलाओं के ज़ेहन में घरेलू जिम्मेदारी के अलावा यह भी जिम्मेदारी है की अखबारों/संचार-माध्यमों में शाया आंकड़ों पे नज़र डाल लें किंतु जैसे ही कन्या सौभाग्यवती होती है उसे करवाचौथ,संतान सप्तमीं,वट-सावित्री जैसे व्रत वर्तूले याद रह जाते क्या महिलाओं के लिए ये सब शेष है सच यदि महिलाएं स्वयं लिंग परीक्षण के विरुद्ध एक जुट हो जाएँ तो यकीनन सारा परिदृश्य ही बदल जाएगा आप सोच रहें होंगे कि किन कारणों से ये ज़बाव देही मैं महिलाओं पे डाल रहा हूँ जन संख्या आयुक्त और महापंजीयक जेके भाटिया का कहना है कि 1981 में लड़कियों की सं`या 1000 लड़कों के मुकाबले में 960 थी जो अब गिरकर 927 पर आ

प्रोवोग

अंतस तक छू लिया इस फ़िल्म ने , महिला बाल विकास विभाग के भोपाल मुख्यालय में "घरेलू हिंसा के विरुद्ध"हम सभी अधिकारियों को जब ये फ़िल्म दिखाई गई तो लगा नारी के खिलाफ़ हिंसक सोच को रोकने यदि हमको अवसर मिल रहा है तो इसमें बुराई क्या है।