सहोदर प्रदेशों यानी मध्य-प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के ब्लॉगर इन दिनों निरंतर नवाचारों में व्यस्त हैं . इन नवाचारों का सीधा संकेत यह भी है कि ब्लागिंग को किस तरकीब से स्तरीय और पठनीय बनाया जावे. ब्लॉग बनाम पांचवे खम्बे की ज़रुरत और उसकी उपादेयता अब किसी से छिपी नहीं है. हिंदी-ब्लागिंग यानि चिट्ठाकारिता के विकास की इस पहल से जो भी कुछ बेहतर होगा आज से पांच बरस बाद सबके सामने होगा. तभी तो भिलाई में जिस महत्वपूर्ण बात का खुलासा किया गया वो भारतीय भाषाओं के अंतर्जालीयकरण का मेल-स्टोन ही कहा जावेगा. पांचवे स्तम्भ को प्रोत्साहित करने भिलाई चिंतन बैठक में चिट्ठाचर्चा को डोमिन पर पंजीकृत करा लिया है ऋतु परिवर्तन-पर्व यानी संक्रांति के दिन से आरम्भ हो ही जावेगा. सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में खबर-रटाऊ सबसे आगे वाले फार्मूले से मुक्ति दिलाती हिंदी चिट्ठाकारिता ने वैचारिक-आदानप्रदान को भी बढावा दिया है.इस बात को नकारना असंभव है. अब तो भिलाई और जबलपुर इतने करीब हैं जितने कभी न थे. . छत्तीसगढ़ के ब्लागर्स का यह अनूठा प्रयास सफल होगा सभी आश्वस्त हैं पूत के पाँव पालने में ही नज़र आ जातें हैं.... ? इनके चेहरे तथा आत्म विश्वास को अनदेखा करना अथवा नकारना हमारी भूल होगी. साधू वाद दीजिये इनको
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