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एक साथी एक सपना ...!!

एक साथी एक सपना साथ ले हौसले संग भीड़ से संवाद के । ००००० हम चलें हैं हम चलेगे रोक सकते हों तो रोको हथेली से तीर थामा क्या मिलेगा मीत सोचो । शब्द के ये सहज अनुनाद .. से .....!! ०००००० मन को तापस बना देने, लेके इक तारा चलूँ । फर्क क्या होगा जो मैं जीता या हारा चलूँ ......? चकित हों शायद मेरे संवाद ... से ......!! ०००००० चलो अपनी एक अंगुल वेदना हम भूल जाएं. वो दु:खी है,संवेदना का, गीत उसको सुना आएं कोई टूटे न कभी संताप से ......!!