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स्वातंत्र्यवीर श्री मांगीलाल गुहे दिवंगत

श्रीयुत मांगीलाल जी गुहे दिवंगत 90 वर्षीय क्रांतिकारी स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी श्रीयुत गुहे जी का दु:खद निधन आज प्रात: जबलपुर में हो गया। अंतिम  यात्रा   दिनांक 30.9.2013  ( प्रात: 10 बजे) को उनके निवास  गौरैया प्लाट मदन महल जबलपुर से  ग्वा रीघाट मुक्तिधाम के लिए प्रस्थान करेगी . नार्मदीय  ब्राह्मण समाज एवं परिजन - क्रांतिवीर श्रीयुत गुहे जी को  विनत  श्रद्धांजलि एवं  शोकाकुल परिवार को दुःख सहने की शक्ति हेतु  माँ नर्मदा से प्रार्थना  रत हैं

सुर्खियों से दूर रहे स्वातंत्र्यवीर : श्री मांगीलाल गुहे

श्रीयुत गुहे ने गांधी जी के निर्देशों पर सदा अमल किया 1942 में महा. गांधी के “करो या मरो” नारे से प्रभावित होकर अंग्रेज सरकार की पत्राचार व्यवस्था को खत्म करने हरदा के लेटर बाक्सों को बम से नेस्तनाबूत किया,साथ ही डाक गाड़ी के दो डब्बों के बीच यात्रा करते हुए रस्सी में हंसिया बांध कर रेल लाइन के किनारे के टेलीफ़ोन तारों को काटा ताकि टेलीफ़ोनिक एवम टेलीग्राफ़िक संचार व्यवस्था छिन्न भिन्न हो हुआ यही .उनकी ज़रा सी चूक जान लेवा हो सकती थी. पर युक्तियों और सतर्क व्यक्तित्ववान श्री गुहे ऐसा कर साफ़ बच निकले. श्री गुहे बताते हैं कि मुझसे लोग दूरी बनाते थे . ऐसा स्वभाविक था. लोग क्यों अग्रेजों के कोप का शिकार होना चाहते. श्रीयुत गुहे हमेशा कुछ ऐसा कर गुज़रते जो विलायती कानून की खिलाफ़त और बगावत की मिसाल होता पर हमेशा वे सरकारी की पकड़ में नहीं आ पाते .कई बार ये हुआ कि अल्ल सुबह हरदा की सरकारी बिल्डिंग्स पर यूनियन जैक की जगह तिरंगा दिखाई देता था. ये करामात उसी क्रांतिवीर की थी जिसे तब उनकी मित्र मंडली मंगूभाई के नाम से सम्बोधित पुकारती थी.उनका एक ऐसा मित्र भी था जो सरकारी रिश्वत की गिरफ़्त