संदेश

अक्तूबर, 2010 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

प्रभाष जोशी जी ने कहा :- “.... अपना ईमान बेचा,”

चित्र
अपने अंतर्मन की जिज्ञासा  को तृप्त करना चाहता है समाज  उसे चाहिये सकारात्मकता उसे चाहिये व्यापक दृष्टिकोण उसे चाहिये सार्थक नज़रिया. कोई भी यह करने तैयार है तो आगे आये आज एक खबरी चैनल ने अभिषेक- ऐशवर्या  के दाम्पत्य जीवन पर एक खबर प्रसारित की जिसमें पति-प्त्नि के बीच के मन मुटाव को सरे बाज़ार कर दिया. यदि यही है पत्रकारिता तो  अब बस और नहीं इस का अवसान ज़रूरी है  खत्म कर दो ये रवैया वरना ये दुनियां में इतनी नकारात्मकता हो जावेगी कि खुद तुम्हारा जीना और  सांस लेना दूभर हो जाएगा.देश वासियो ये तो उदाहरण मात्र था सर्वत्र  सबसे पहले हमें इस तरह की नकारत्मक्ता को नियंत्रित करना ही होगा.  प्रज़ातंत्र के चारों स्तम्भ  नेगेटिविटी की गिरफ़्त में आ जाएं तो प्रजातन्त्र की समीक्षा अत्यावश्यक हो जाती है.. लोक कल्याणकारी राष्ट्र की कल्पना करते हुए शहीदों ने ये तो न सोचा था न .सेक्स,विवाहेत्तर-संबंध,फ़िल्म,गाशिप, राजनैतिक छीछालेदर,खबरों से सजे मीडिया अनुशासित है क्या..? आपका सोचना जो भी हो मैं सोचता हूं नहीं.ये साजिश है भारतीय सकारात्मक पहलू को खत्म करने की. ये पश्चिमी बुनावट की "पत्रकार

गरीबी रेखा की सूची में सेठ गरीब दास

                             दीवाली के पहले गरीबी से परेशान हमारे गांव में लंगड़ , दीनू , मुन्ना , कल्लू , बिसराम और नौखे ने विचार किया इस बार लक्ष्मी माता को किसी न किसी तरह राजी कर लेंगें . सो बस सारे के सारे लोग माँ को मनाने हठ जोगियों की तरह रामपुर की भटरिया पे हो लिए जहां अक्सर वे जुआ - पत्ती खेलते रहते थे पास के कस्बे की चौकी पुलिस वाले आकर उनको पकड़ के दिवाली का नेग करते ये अलग बात है की इनके अलावा भी कई लोग संगठित रूप से जुआ - पत्ती की फड लगाते हैं ….. अब आगे इस बात को जारी रखने से कोई लाभ नहीं आपको तो गांव में लंगड़ , दीनू , मुन्ना , कल्लू , बिसराम और नौखे की कहानी सुनाना ज़्यादा ज़रूरी है . _________________________________________ तो गांव में लंगड़ , दीनू , मुन्ना , कल्लू , बिसराम - नौखे की बात की वज़नदारी को मान कर “ रामपुर की भटरिया ” के बीचौं बीच जहां प्रकृति ने ऐसी कटोरी नुमा आकृति बनाई है बाहरी अनजान समझ नहीं पाता कि “ वहां छुपा जा सकता है . जी हां उसी स्थान पर ये लोग पूजा - पाठ की गरज से अपेक्षित एकांतवासे में चले गए .. हवन सामग्री उठाई तो लंगड़ के हाथौं

दर्शन बावेजा अनोखे ब्लागर हैं

चित्र
  नाम:-दर्शनवावेजा                                  पेशा:-अध्यापन नाम -दर्शन लाल बवेजा पद -विज्ञान आध्यापक,govt.sr.sec.school Alahar ,Yamuna nagar   पता -यमुना नगर ,हरियाणा शैक्षिक योग्यता -B.Sc.B.Ed.,MA pol.sc .,eco.,M.Com. शौंक -विज्ञान संचार,ग्रामीण विद्यार्थीयों को विज्ञान शिक्षा के लिए प्रेरित करना,अंधविश्वास निवारण,विज्ञान कथा लेखन विशेष -कम लागत के विज्ञान मोडल्स विकसित करना,कम लागत के विज्ञान प्रयोगों की कार्यशाला लगाना,विज्ञान क्लब संचालन  यमुना नगर हरियाणा आयु मुझसे आठ बरस छोटे यानी चालीस के ज्ञान में बरसों आगे विज्ञान के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ब्लॉग लिखने वाले भाई दर्शन बावेजा  के  ब्लॉग ज़रा हटके और नेट पर हिंदी में विज्ञान संबंधी जानकारियां मुहैया कराते हैं तभी तो मुझे आकृष्ट किया मेरे जैसे पाठकों के लिए यदि तलाश है विज्ञान की बातें सरलतम और सलीके से अंतर्जाल पर मिले तो अवश्य ही दर्शन भाई के ब्लॉग को खंगालें . अक्सर बच्चे जिज्ञासा से सवाल करतें हैं और हम कुछ ज़वाब नहीं दे पाते क्योंकि हमारे पास ज्ञान का अभाव होता है मेरे साथ भी यही हुआ भतीजा चिन्मय पूछ बैठा :- चाचा गि

जबलपुर ने रखे क़दम डिज़िटल अखबार की दुनिया में

चित्र
"jabalpur2day" अजय त्रिपाठी => 094253 24174 ajaynews@mail.com धीरज शाह  => 0925150508   संस्कारधानी जबलपुर के दो युवा पत्रकार  अजय त्रिपाठी एवम धीरज़ शाह की वजह से जबलपुर का  डिज़िटल अखबार की दुनियां में पहला क़दम . खबरिया चैनल्स से जुड़े इन युवाऒं के इरादे अभी इतने ही नहीं हैं. वे चाहते हैं अंतर्ज़ाल पर जबलपुर की सही और सटीक खबरों की आमद इसी पोर्टल के ज़रिये ही हो सभी सूचनाएं एवम स्वस्थ्य समाचारों के लिये जबलपुर2डे में ब्लाग एवम स्तरीय हिंदी साहित्य का पन्ना भी जुड़ना लगभग तय है. होम संस्कारधानी स्पेशल क्राइम  गतिविधियां  राज्य राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय खेल बालीवुड हालीवुड टीवी फैशन बाज़ार, स्वास्थ्य ज्योतिष अन्य विचार खबर  ज़रा  हटके  टेंडर गैलरी आस्था कुछ हटके खबरें यहां हैं भई अपनी सासू से डरते हैं पुरुष? (2010-10-23) 'रेप करा देगा यह विज्ञापन (2010-10-23) सबसे तेजी से चलने वाली ट्रेन (2010-10-21) बंदरों से मुक्ति दिलाएं, वोट पाएं (2010-10-21) फेल तो हो कॉलेज देगा 5,000 पाउंड (2010-10-19) कान के रास्ते निकाला टूटा दांत (

हेनरी का हिस्सा

चित्र
पिता की मौत के बाद अक्सर पारिवारिक सम्पदा के बंटवारे तक काफ़ी तनाव होता है उन सबसे हट के हैनरी  बैचेन और दु:खी था कि पिता के बाद उसका क्या होगा. पिता जो समझाते   वो पब में उनकी बात का माखौल उड़ाता उसे रोजिन्ना-की गई  हर उस बात की याद आई जो पिता के जीवित रहते वो किया करता था. जिसे पापा मना करते रहते थे.सबसे आवारा बदमाश हेनरी परिवार का सरदर्द ही तो था ही बस्ती के लिये उससे भी ज़्यादा सरदर्द था. पंद्रह साल की उम्र में शराब शबाब की आदत दिन भर सीधे साधे लोगों से मार पीट जाने कितनी बार किशोरों की अदालत ने उसे दण्डित किया. पर हेनरी के आपराधिक जीवन  में कोई परिवर्तन न आया. अंतत: उसे पिता ने बेदखल कर दिया कुछ दिनों के लिये अपने परिवार से. पिता तो पिता पुत्र के विछोह  की पीड़ा मन में इतने गहरे पहुंच गई कि बस खाट पकड़ ली पीटर ने. प्रभू से सदा एक याचना करता हेनरी को सही रास्ते पे लाना प्रभु..? पीटर  ज़िंदगी के आखिरी सवालों को हल करने लगा. मरने से पहले मित्र जान को बुला सम्पदा की वसीयत लिखवा ली पीटर ने. और फ़िर अखबारों के ज़रिये हेनरी को एक खत लिखा.   प्रिय हेनरी अब तुम वापस आ जाओ, तुम्हारा निर्वासन समाप

"जन्म दिन मुबारक़ हो अर्चना चावजी !!"

अर्चना चावजी एक ब्लागर एक गायिका एक संघर्ष शील नारी जो दृढ़्ता का पर्याय है.... उनके ब्लाग " मेरे मन की " में वो सब है जो उनका एक परिचय यहां भी दर्ज़ है यानि उनकी बहन रचना बजाज   के ब्लाग " मुझे भी कुछ कहना है " पर. अर्चना जी, रचना जी, भाई देवेन्दर  जी , सबको गोया  शारदा मां ने कंठ वाणी में खुद शहद से "मधुरता" लिख दी है. मेरे ब्लाग की सह लेखिका अर्चना जी को हार्दिक शुभ कामनाएं.                                                        H   A     P       P         Y B   I     R        T          H            D              A                 Y             TO " ARCHANA CHAVAJI "

विश्व कवि मुक्तिबोध का स्मरण

चित्र
गजानन माधव 'मुक्तिबोध', मुक्तिबोध की रचनाएँ कविता कोश में ,भूरी-भूरि खाक धूलि तो अंतर जाल पर उपलब्ध हैं उससे हटके मेरी नज़र में गजानन माधव "मुक्तिबोध" सदकवियों, विचारकों सामान्य-पाठकों , शोधार्थियों के लिए अनवरत ज़रूरी है.   मुझे जो रचनाएं  बेहद पसंद है वे ये रहीं जो विकी से साभार लीं जाकर सुधि पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है, मुक्ति बोध का य चित्र जबलपुर में शशिन जी ने उतारा था भूल ग़लती / गजानन माधव मुक्तिबोध पता नहीं... / गजानन माधव मुक्तिबोध ब्रह्मराक्षस / गजानन माधव मुक्तिबोध दिमाग़ी गुहान्धकार का ओरांगउटांग! / गजानन माधव मुक्तिबोध लकड़ी का रावण / गजानन माधव मुक्तिबोध चांद का मुँह टेढ़ा है. / गजानन माधव मुक्तिबोध डूबता चांद कब डूबेगा / गजानन माधव मुक्तिबोध एक भूतपूर्व विद्रोही का आत्म-कथन / गजानन माधव मुक्तिबोध मुझे पुकारती हुई पुकार / गजानन माधव मुक्तिबोध मुझे क़दम-क़दम पर / गजानन माधव मुक्तिबोध मुझे याद आते हैं / गजानन माधव मुक्तिबोध मुझे मालूम नहीं / गजानन माधव मुक्तिबोध मेरे लोग / गजानन माधव मुक्तिबोध मेरे सहचर मित्र /

बात निकलेगी तो---देवेन्द्र की आवाज में

 सुनिए एक नज़्म---(आभार शरद जी का सुधार करवाने के लिए....मगर संगीत कहाँ से लाउं???)

एक अपसगुन हो गया. सच्ची...!

                                   दो तीन दिन के लिए कल से प्रवास पर हूँ अत: ब्लागिंग बंद क्या पूछा न भाई टंकी पे नहीं चढा न ही ऐसा कोई इरादा अब बनाता बस यात्रा से लौटने तक  . न पोस्ट पढ़ पाउंगा टिपिया ना भी मुश्किल है. सो आप सब मुझे क्षमा करना जी . निकला तो कल था घर से किंतु एक  अपसगुन हो गया. सच्ची एक अफसर का फून आया बोला :-"फलां केस में कल सुनवाई है आपका होना ज़रूरी है.  कल निकल जाना ! सो सोचा ठीक है. पत्नी ने नौकरी को सौतन बोला और हम दौनों वापस . सुबह अलबेला जी का फून आया खुशी  हुई जानकर कि  उनसे जबलपुर स्टेशन पे मुलाक़ात हो जाएगी. किंतु अदालत तो अदालत है. हमारे केस की  बारी आई तब तक उनकी ट्रेन निकल चुकी थी यानी कुल मिला कर इंसान जो सोकाता है उसके अनुरूप सदा हो संभव नहीं विपरीत भी होता है. श्रीमती जी को समझाया.  वे मान  गईं . उनकी समझ में आ गया. आज ट्रेन से हरदा के लिए रवानगी डालने से पेश्तर मन में आया एक पोस्ट लिखूं सो भैया लिख दी अच्छी लगे तो जय राम जी की अच्छी न लगे तो राधे राधे    तो  "ब्लॉगर बाबू बता रए हैं कि "Image uploads will be disabled for two hours due to m

मानव-अधिकारों का हनन क्यों ?

भड़ास वाले ब्लॉगर यशवंत जी की माता जी के साथ जो भी हुआ है उचित कदापि नहीं. अब एक माँ  को चाहिए न्याय... एक बेटी से अपेक्षा है कि वे यशवन्त जी ने पूरे आत्म नियंत्रण के साथ जो पोस्ट लिखी घटना के 72 घंटे बाद देखिये क्या हुई थी घटना :-"वो मायावती की नहीं, मेरी मां हैं. इसीलिए पुलिस वाले बिना अपराध घर से थाने ले गए. बिठाए रखा. बंधक बनाए रखा. पूरे 18 घंटे. शाम 8 से लेकर अगले दिन दोपहर 1 तक. तब तक बंधक बनाए रखा जब तक आरोपी ने सरेंडर नहीं कर दिया. आरोपी से मेरा रिश्ता ये है कि वो मेरा कजन उर्फ चचेरा भाई है. चाचा व पिताजी के चूल्हे व दीवार का अलगाव जाने कबका हो चुका है. खेत बारी सब बंट चुका है. उनका घर अलग, हम लोगों का अलग. उस शाम मां गईं थीं अपनी देवरानी उर्फ मेरी चाची से मिलने-बतियाने. उसी वक्त पुलिस आई. ये कहे जाने के बावजूद कि वो इस घर की नहीं हैं, बगल के घर की हैं, पुलिस उन्हें जीप में बिठाकर साथ ले गई. ( आगे यहां से )." इस घटना का पक्ष ये है कि किन कारणों से किसी भी अपराध के आरोपी को तलाशने का तरीक़ा कितना उचित है.जबकी कानून इस बात की कितनी इज़ाज़त देता है इसे  &q

चन्द्रशेखर स्त्रोत्र.......देवेन्द्र ने गाया.........

आज सुनिये ....चन्द्रशेखर स्त्रोत्र.....

महफ़ूज़ खतरे से बाहर

चित्र
जो भी कुछ महफ़ूज़ के साथ घटा वो  समाज के लिये शर्मनाक़ है इसमें कोई दो राय नहीं. सभी चिंतित हैं. कल तय शुदा सरकारी  प्रसारण के चलते आज़ मुझे रिकार्डिंग पर जाना था . रिकार्डिंग रूम में घुस ही रहा था की ललित जी जी ने अपुष्ट खबर की मुझसे पुष्टि चाही. किंतु तब सम्भव न था फ़िर भी फ़ोन बुक में मौज़ूद नम्बर्स पर सीधे महफ़ूज़ को काल किया कोई बात न हो सकी. पाबला जी से चर्चा हुई पर पुष्टि नहीं हम भगवान से प्रार्थना कर रहे थे कि वो खबर झूठी हो . परंतु खबर सच निकली अब संतोष इस बात का है कि उनके शरीर से गोलियां निकाल दी गईं है  वे बात कर पा रहें है शिवम मिश्रा जी ने बताया वे बता रहे थे कि :-"तीन जगह गोली लगी " कल से आज़ तक सब बेचैन पागल से उनकी बेहतरी की दुआ कर रहे हैं . हो भी क्यों न सबका अपना सा है महफ़ूज़. आराधना चतुर्वेदी "मुक्ति" , इंदु  पूरी  गोस्वामी संगीता  पूरी , अजय  झा  , पद‍्म सिंह Padm Singh , प्रतिभा  कटियार  , प्रशांत  प्रियदर्शी  , ललित शर्मा  -, राजीव  ओझा  , आराधना चतुर्वेदी "मुक्ति" , Dr. Mahesh Sinha , शिवम्  मिश्रा  , अनूप शुक्ला  - प्रवीण त्रिवेदी

आईये दुआ करें

आईये दुआ करे उनके लिये जो अपनों से महफ़ूज़ न हो...!! जो सदा दर्द के सागर में तैरता हो वो जिससे कईयों का नेह भरा नाता हो वो जो दुश्मन के भी गुण गाता हो ? जी हां उसी अपने से पराये-आदमी की बेहतरी के लिये आईये दुआ करे

कौन है जो

चित्र
साभार : गूगल बाबा के ज़रिये  कौन है जो आईने को आंखें तरेर रहा है कौन है जो सब के सामने खुद को बिखेर रहा है जो भी है एक आधा अधूरा आदमी ही तो जिसने आज़ तक अपने सिवा किसी दो देखा नहीं देखता भी कैसे ज्ञान के चक्षु अभी भी नहीं खुले उसके बचपन में कुत्ते के बच्चों को देखा था उनकी ऑंखें तो खुल जातीं थी एक-दो दिनों में पर...................?

सरकतीं फ़ाईलें : लड़खड़ाती व्यवस्था

चित्र
साभार : गूगल बाबा साभार:गूगल बाबा    भारतीय-व्यवस्था में ब्यूरोक्रेटिक सिस्टम की सबसे बड़ी खामी उसकी संचार प्रणाली है जो जैसी दिखाई जाती है वैसी होती नहीं है. सिस्टम में जिन शब्दों का प्रयोग होता है वे भी जितना अर्थ हीन हो रहें हैं उससे व्यवस्था की लड़खड़ाहट को रोका जाना भी सम्भव नहीं है. यानी कहा जाए तो ब्यूरोक्रेटिक सिस्टम अब अधिक लापरवाह  और गैर-जवाबदेह साबित होता दिखाई दे रहा है.  दूसरे शब्दों में कहा जाए तो भार को अंतरित कर देने की प्रवृत्ति के चलते एक दूसरे के पाले में गेंद खिसकाते छोटे बाबू से बड़े बाबू के ज़रिये पास होती छोटे अफ़सर से मझौले अफ़सर के हाथों से पुश की गई गेंद की तरह फ़ाईल जिसे नस्ती कहा जाता है अनुमोदन की प्रत्याशा में पड़ी रहती है. और फ़िर आग लगने  पानी की व्यवस्था न कर पाते अफ़सर  अक्सर नोटशीट के नोट्स जो बहुधा गैर ज़रूरी ही होतें हैं मुंह छिपाए फ़िरतें हैं. वास्तव में जिस गति से काम होना चाहिये उस गति से काम का न होना सबसे बड़ी समस्या है कारण जो भी हो व्यवस्था और भारत दौनों के हित में नहीं.इन सबके पीछे कारणों पर गौर किया जावे तो हम पातें हैं कि व्यवस्था के संचालन के