सोमवार, अप्रैल 26

अक्षय कात्यानी की मदद हेतु एकाउंट नम्बर 09322011002264 में सहयोग राशि जमा कीजिये

 CAVS संचार पर प्रकाशित इस आलेख को ध्यान से देखिये 

अक्षय को मदद चाहिए....

अथवा मोहल्ला लाईव पर प्रकाशित इस आलेख को  

जिसमें अक्षय कात्यानी की बीमारी के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है. मित्रों इस आलेख को पोस्ट करने के कुछ क्षण पूर्व श्री सुधीर कात्यानी जी से इस पोस्ट की तस्दीक हुई है. आपसे विनम्र आग्रह है कि आप अक्षय कात्यानी की मदद हेतु ओरिएंटल बैंक आफ़ कामर्स भोपाल,अरेरा कालोनी ब्रांच एकाउंट नम्बर 09322011002264 में सहयोग राशि जमा कीजिये
बात अक्षय की जो एक बीमारी से पीडित है। बीमारी ने उसे ऐसा जकड़ा कि इलाज में पिता की जीवन भर की पूंजी खर्च हो गई इसके बाद भी वो ठीक नही हुआ क्योंकि तब तब इस बीमारी की सही थेरेपी नही आई थी। अब जबकि बीमारी के इलाज की कारगर पद्धति आ गई है पिता के पास बेटे के इलाज के लिए पैसे नही है। यदि समय पर इलाज नही मिला तो युवक का जीवन बचाना मुश्किल होगा।
नाम अक्षय कत्यानी हटटा कटटा गबरू जवान 70 किलो वजन दिखने में स्मार्ट, लेकिन एक बीमारी ने उसे 40 किलो का हाडमांस का पुतला बना दिया । पढाई पूरी की तो टीवी जर्नलिस्ट बन गया लेकिन इस बीमारी के कारण नौकरी छोडनी पड गई और बिस्तर पकड लिया। प्रायवेट बिजनेस करने वाले पिता सुधीर कात्यानी ने बेटे के इलाज के लिए अपने जीवन भर की कमाई खपा दी। गाड़ी बंगला बेच दिया। लेकिन वो ठीक नही हुआ। अब अचानक डाक्टरों ने बताया कि इस बीमारी का कारगर इलाज आ गया है। सिर्फ दो लाख खर्च होंगे। लेकिन अब जबकि वो दाने - दाने को मोहताज हो गए हैं। बेटे के इलाज के लिए दो लाख कहां से लाएं तो क्या इकलौते जवान बेटे को यूँ ही हाथ से चले जाने दे।
मजबूर पिता क्या करे? मदद के लिए सबने हाथ खडे कर दिए हैं। बेटे को अल्सरेटिव्ह कोलाईटिस है। खून की उल्टी दस्त होते हैं। खाना खाते नही बनता। कैंसे माँ - बाप अपने जिगर के टुकडे को तिल - तिल मरते देखें। एक तो बीमारी दूसरा मां - बाप की बेबसी बेटे से देखी नही जाती वो भी ऐंसी जिंदगी से निराश होता जा रहा है। आखिर क्या करे वो कहां जाए। उसकी भी इच्छा है कि मां-बाप के सपनो को पूरा करे। अभी तो पूरी जिंदगी पडी है उसके सामने। सिर्फ दो लाख के पीछे क्या जान जली जाऐगी उसकी। फिलहाल पैसे के अभाव में इलाज रूका है। क्या इस नौजवान को हम दुनिया से विदा हो जाने दें। ऐसे समय में समाज को सामने आना होगा। इस नौजवान की मदद के लिए आईए और इसकी मदद कीजिए। रोशन कीजिए अक्षय की दुनिया को जी लेने दीजिए एक जवान को अपनी पूरी जिंदगी ।
(अतुल पाठक , संपर्क : atul21ap@gmail.com_)
यदि आप अक्षय की कोई मदद करना चाहते हैं तो इन नम्बरों पर संपर्क कर सकते हैं :
योगेश पाण्डेय - 09826591082,
सुधीर कत्यानी (अक्षय के पिता) - 09329632420,
अंकित जोशी (अक्षय के मित्र) - 09827743380,०९६६९५२७८६६
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आलेख :लेखक : अतुल पाठक,CAVS संचार से साभार
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विनम्र अपील :- 

रविवार, अप्रैल 25

क्षमा वीरस्य भूषणं :विवाद समाप्त होते है माफ़ी मांगने और माफ़ कर देने से

साथियो, एक दिन मेरे अधीनस्त चपरासी राजू का स्वास्थ्य खराब हो जाने एवम ,एक क्लर्क लापरवाही से ,एक सरकारी काम अनावश्यक बाधा उत्पन्न हुई.सारे काम को अगले एक घंटे में पूरा करना था .मेरा पारा सातवें आकाश पर था . जो जी में आया वो बोल रहा था, चपरासी को गुस्से में यह कह दिया :- सर ही दु:ख रहा था न ? मर नही जाते तुम नौकरी करो तमीज़ से करो. 
बात आई गई हो गई.  किंतु मन में कुछ चल रहा था, क्रोध और उतावला पन बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है, राजू पर मेरा अनावश्यक क्रोध व्यक्त करना मुझे ही सालने लगा, मन खिन्न था अगले दिन . रात भर सोचता रहा राजू के जीवन से ज़्यादा जरूरी काम तो न था बस फ़िर तय किया कि कल चपरासी से माफ़ी मागूंगा. वो भी अकेले में नहीं  सारे स्टाफ़ के सामने .... यह कदम प्रशासनिक दृष्टि से सर्वथा गलत हो सकता है किंतु मानवीय दृष्टि से बहुत ही ज़रूरी . यही है आध्यात्म. बस अगले दिन पूरे स्टाफ़ को बुलाया पिछले दिन के बर्ताव के लिये बे हिचक राजु से कहा:-”भाई, मुझे माफ़ करना, सच कल मैने तुम्हारे लिये जिस वाक्य का प्रयोग किया वो अमानवीय था,इसमें  इंसानियत तनिक भी न थी जाने क्यों मन निर्दयी हो गया जो मैने तुम्हारे लिये कहा कि - सर ही दु:ख रहा था न ? मर नही जाते तुम नौकरी करो तमीज़ से करो”इस बात के लिये मुझे तुमसे माफ़ी चाहिये 
राजु सहित सारे लोग अवाक मुझे टकट्की लगाये देख रहे थे,..... राजु की आंखें मैं नमीं थी, और मेरी आंखो में हल्का पन राजु ने कहा:-सा’ब, आप से इतना सुन के ही मन का मैल धुल गया. आप माफ़ी न मांगिये ...! 
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इस घटना के बाद पिछले दिनों शास्त्री जी ने अपने ब्लाग ललित भाई के ब्लागिंग छोड़ने के ऐलान के दूसरे दिन ही फ़ोटो पर माला डाल के जो किया मेरा मन बहुत दु:खी था. लगा शास्त्री जी से कह दूं.  अनिता कुमार जी से हुई पाडकास्ट चिट्ठाचर्चा में इसका ज़िक्र भी किया किंतु आज़ जब कडुवा सचपर  श्याम भाई की पोस्ट देखी तो लगा कि साहसी है श्याम कोरी उदय जी ............. उससे ज़्यादा खुशी हुई तब जब आदरणीय शास्त्री जी ने टिप्पणी में कहा :-

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक April 25, 2010 9:56 AM   श्याम कोरी "उदय" जी ईश्वर जानता है कि इस पोस्ट को लगाने के पीछे मरी कोई दुर्भावना नही थी!
मुझे नही पता था कि आप इसको इतना तूल देंगे! अब तो मैंने वो सब पोस्ट हटा दीं है! आप सब ही तो मेरी ऊर्जा हैं! सादर सद्भावी!
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक April 25, 2010 9:58 AM   यदि कहीं जाने-अनजाने में कोई भूल हुई हो तो उसके लिए तो एक ही शब्द है "क्षमा"
अंत भला सो सब भला 

शनिवार, अप्रैल 24

पाडकास्ट चिट्ठाचर्चा के बाद.... ऑन लाइन ''अन्त्याक्षरी''का प्रयोग ?

ब्लॉग 4 वार्ता पर आपने अनिता कुमार जी से हुई   प्रथम पाडकास्ट चिट्ठा चर्चा के प्रयोग को जो स्नेह दिया उसके लिए आभारी हूं  यह पाडकास्ट मूल स्वरुप में पेश किया है अत: तकनीकी कमियां हैं जिसे सुधार ने के जुगाड़ में हूं शीघ्र ही सारी कमियां दूर हों इस हेतु आप सुधि जन भी मुझे युक्ति शुझा सकतें हैं.... अत: कल आन लाइन अन्त्याक्षरी वाला प्रयोग करने जा रहा था कुछ  समय के लिए स्थगित कर रहा हूं

आप के सुझाव सादर आमंत्रित हैं
चलते चलते दीपक 'मशाल',महाशक्ति ,महफूज़  मियाँ  ,मिथलेश दुबे सहित सभी ''बेचारे-कुंवारों    को स्नेह सहित समर्पित गीत सुनिए यहां

बुधवार, अप्रैल 21

सोमवार, अप्रैल 19

माचिस की तीली के ऊपर बिटिया की पलती आग:भाग तीन [पाड्कास्ट में]

सुधि  श्रोतागण एवम पाठक/पाठिका गिरीश का हार्दिक अभिवादन स्वीकारिये आज़ मैने किसी का साक्षात्कार रिकार्ड नहीं किया अपनी ही आवाज़ में अपने सबसे लम्बे गीत के वे अंश प्रस्तुत कर रहा हूं जो बाह्य और अंतस की आग को चित्रिर करतें हैं सफ़ल हूं या असफ़ल फ़ैसला आप सुधिजनों के हाथ है...........
इसे सुनिये =>


अथवा पढिये =>
माचिस की तीली के ऊपर बिटिया की से पलती आग
यौवन की दहलीज़ को पाके बनती संज्ञा जलती आग .
********
एक शहर एक दावानल ने निगला नाते चूर हुए
मिलने वाले दिल बेबस थे अगुओं से मज़बूर हुए
झुलसा नगर खाक हुए दिल रोयाँ रोयाँ छलकी आग !
********
युगदृष्टा से पूछ बावरे, पल-परिणाम युगों ने भोगा
महारथी भी बाद युद्ध के शोक हीन कहाँ तक होगा
हाँ अशोक भी शोकमग्न था,बुद्धं शरणम हलकी आग !
********
सुनो सियासी हथकंडे सब, जान रहे पहचान रहे
इतना मत करना धरती पे , ज़िंदा न-ईमान रहे !
अपने दिल में बस इस भय की सुनो सियासी-पलती आग ?
********
तुमने मेरे मन में बस के , जीवन को इक मोड़ दिया.
मेरा नाता चुभन तपन से , अनजाने ही जोड़ दिया
तुलना कुंठा वृत्ति धाय से, इर्षा पलती बनती आग !
********
रेत भरी चलनी में उसने,चला सपन का महल बनाने
अंजुरी भर तालाब हाथ ले,कोशिश देखो कँवल उगा लें
दोष ज़हाँ पर डाल रही अंगुली आज उगलती आग !!

रविवार, अप्रैल 18

उफ़्फ़ शरद कोकास भीषण गर्मी को भी एन्जोय करते है ?

http://www.bhaskar.com/2009/05/01/images/demo_6499267300420091111.gifइस बात में कोई दो राय नहीं प्यासे पाखी-और पेड पानी पियॆं इसके लिये सजग हमको रहना है बस हमें जो करना है कि उनके लिये छत आंगन में पानी और  सूखते झुलसते पेडों पौधौं को पानी पिलाना है जी हां यही तो कह रहें हैं शरद कोकास जीसुनिये क्या कहा है उनने

पारे की उछाल :बवाल हुये लाल

जी आज अखबारों ने बताया कि पारा 45 डिग्री को छू रहा है . ब्लॉगर मित्र मियाँ बवाल सवा नौ बजे पधारे कहने लगे गिरीश भाई बाहर तो खूब गरम है "आल इज़ नॉट वैल"..... गरमी से बेहाल हुए "लाल” को लस्सी पिला के पाडकास्ट रिकार्ड किया पेश ए ख़िदमत है :- मज़ेदार बात चीत


इसे इधर भी सुना जाये

शनिवार, अप्रैल 17

ब्लाग वाणी का शुक्रिया

ब्लागवाणी द्वारा  नये शामिल किये चिट्ठों को साइड बार में  दिखाना चालू किया है ये ब्लाग लम्बी अवधि के लिए
देखिये शायद कोई रचनाकार आपको मोह ले........ मित्रो इनकी सराहना उत्साहवर्धन ज़रूरी है बगैर यह जाने की ये ब्लाग कहां का है किसका है काले रंग के व्यक्ति ने लिखा या गोरे ने हिन्दू का है कि मोमिन का यानि जब मन इन से उपर उठ के बात हो तो फ़िर क्या कहना  ये रहे कुछ लिंक ब्लागवाणी से साभार
बुरांस बात बेबात अजनबी दुनिया राष्ट्र जागरण JOLLY UNCLE's Jokes & Article's उल्लू वाणी अनकही... गणतंत्र दस रुपया एक दिन नास्तिकों का ब्लॉग JANTA KI FIR Rosa Centrifolia :) :) :) शब्द-शब्द अनमोल भारत-भाग्य honestyprojectrealdemocracy छत्तीसगढ़ ख़बर इधर - उधर की एक बात ... anjana Mere Yatra ki kahaniyan मेरी यात्रा की कहानियाँ Guldasta Awadhesh Pandey ( अवधेश पाण्डेय )
 साथियो आज से नई-सुबह की शुरुआत हो इस आकांक्षा के साथ


 

बुधवार, अप्रैल 14

वापस आ जाओ आस्तीन में

http://2.bp.blogspot.com/_fJf2BDEpVfI/SfqauIDhbmI/AAAAAAAAABQ/SzODuCMR_A8/s320/cobra.jpgप्रिय तुमने जबसे मेरी आस्तीन छोड़ी तबसे मुझे अकेलापन खाए जा रहा है । तुम क्या जानो तुम्हारे बिना मुझे ये अकेला पन कितना सालता है । हर कोई ऐरा-गैरा केंचुआ भी डरा देता है।

भैये.....साफ-साफ सुन लो- "दुनियाँ में तुम से बड़े वाले हैं खुले आम घूम रहें हैं तुम्हारा तो विष वमन का एक अनुशासन है इनका....?"जिनका कोई अनुशासन है ही नहीं ,यार शहर में गाँव में गली में कूचों में जितना भी विष फैला है , धर्म-स्थल पे , कार्य स्थल पे , और-तो-और सीमा पार से ये बड़े वाले लगातार विष उगलतें हैं....मित्र मैं इसी लिए केवल तुमसे संबंध बनाए रखना चाहता हूँ ताकि मेरे शरीर में प्रतिरक्षक-तत्व उत्पन्न  विकसित हो सके.
जीवन भर तुम्हारे साथ रह कर कम से कम मुझे इन सपोलों को प्रतिकारात्मक फुंकारने का अभ्यास तो हों ही गया है।भाई मुझे छोड़ के कहीं बाहर मत जाना । तुम्हें मेरे अलावा कोई नहीं बचा सकता मेरी आस्तीनों में मैनें कईयों को महफूज़ रखा है। तुम मेरी आस्तीन छोड़ के अब कहीं न जाना भाई.... । देखो न आज़ कल तुम्हारे विष के महत्व को बहु राष्ट्रीय कम्पनीयां महत्व दे रहीं हैं.वे  तुम्हारे विष को डालर में बदलने के लिए लोग तैयार खड़े हैं जी । सुना है तुम्हारे विष की बडी कीमत है । तुम्हारी खाल भी उतार लेंगें ये लोग , देखो न हथियार लिए लोग तुम्हारी हत्या करने घूम हैं । नाग राज़ जी अब तो समझ जाओ । मैं और तुम मिल कर एक क्रांति सूत्र पात करेंगें । मेरी आस्तीन छोड़ के मत जाओ मेरे भाई।
मुझे गिरीश कहतें हैं कदाचित शिव का पर्याय है जो गले में आभूषण की तरह तुमको गले में सजाये रहते हैं हम तो बस तुमको आस्तीन में बसा लेना चाहतें हैं. ताकि वक्त ज़रूरत अपनी उपलब्धियों के वास्ते ‘पक्के-वाले‘ मित्रों के सीनों पर लोटने तुमको भेज सकूं . ये पता नहीं किस किस को सीने पे लोटने की अनुमति दे रहे हैं आज़कल ?
प्रिय विषधर, अब बताओ तुम्हारे बिना मेरा रहना कितना मुश्किल है.  कई दिनों से कुछ दो-पाया विषधर मुझे हडकाए पडे हैं मारे डर के कांप रहा हूं. अकेला जो हूं ..... हम तुम मिलकर शक्ति का भय दिखायेंगे . तुम्हारा विष ओर मेरा दिमाग मिल कर निपट लेंगें दुनियां से इसी लिये तो दोस्त तुमसे अनुरोध कर रहा हूं दोस्त ज़ल्द खत मिलते ही चले आओ ......वरना मुझे तुमको वापस लाने के सारे तरीके मालूम हैं.
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सुनिए भी
       

                       
   
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मंगलवार, अप्रैल 13

अलविदा नाना जी : त्रयोदशी दिनांक १३ अपैल २०१० पर विशेष

नाना जी को विदा करने सारे कुटुम्ब के लोगों  ने वही किया जो नानाजी तय कर चुके थे, उनके कहे और लिखे मुताबिक शवयात्रा के दौरान कोई रोयेगा नहीं सिर्फ़ और सिर्फ़ भजन गाये जावें . उन्हौने जैसा कहा वैसा हुआ. नाना जी ने कहा था ओर लिखा भी था - पुरुष की मृत-देह पर पत्नि के सिर से  सौभाग्य चिन्ह मिटाना, चूडियां तुडवाना न केवल अशोभनीय है बल्कि नारी के लिये अपमान कारक भी .......मैं अपनी पत्नि को सौभाग्य चिन्ह मिटाने या न मिटाने के निर्णय का अधिकार सौंपने का पक्षधर हूं....ये बातें नाना जी ने अपनी लिखित वसीयत में कही . अपने सेवा काल में उन्हौने एक मकान खरीदा उसमें रहे किंतु अचानक सत्य-साई-सेवा संगठन जबलपुर के द्वारा निर्मित हो रहे साई-परिसर के निर्माण के लिये उसे बेच कर धन देना सबको चकित कर गया . एक बार मेरे मन में आया कि पूछूं कि आपने यह क्यों किया किंतु जब मुझे ध्यान आया कि लोभ  मुक्त होने का सबक दे रहे हैं नाना जी तो मुंह से वो सवाल निकलता कैसे. ?
वन विभाग में नाकेदार के पद से भर्ति हुए न्यायिक सेवा में आये और फ़िर नाना जी ने  विधि की परीक्षा स्वर्ण-पदक के साथ पास की. हाथों  में पदक डिग्री, लिये घर आये किंतु शायद यह सवाल उनके दिमाग को परेशान कर रहा था कि पदक में सोने के नाम पर सोने का पालिश मात्र है सो कुलपति से पत्राचार कर सचाई का एहसास दिलाने की कोशिश की किंतु कोई उत्तर न मिलने पर नानाजी ने माननीय न्यायालय से अपील कर दी जो अभी फ़ैसले के इंतज़ार में है....?
नाना जी की अन्तिम इच्छा  थी कि उनकी मृत्यु का स्वागत हो हिन्दू रीति रिवाज़ो का पालन हो शोक न मनाए मृत्यु के बाद घर का वातावरण अध्यात्म मय भक्ति मय हो मै ईश्वर से मिलने जा रहा हूं तब शोक क्यो करना . 
उनकी इच्छा के अनुरूप एकादश गात्र के दिन सह-पिण्डी का कार्य क्रम किया गया. सहपिण्डी पूजन के समय वेद मंत्रोत्तचार के साथ शहनाई पर हिण्दू भजनों की धुने रमज़ान भाई ने गुंजाई.......साथ ही गरीबों को जिन्हैं ”साई-ने नारायण माना है” को पूरे कुटुम्ब ने उत्साह से सम्मान से भोज कराया .
रात में चुपचाप कम्बल उढाना,कु्ष्ठाश्रम,वृद्धाश्रम ,सरकारी अस्पतालों में ज़रूरत मंदों को तलाशते नानाजी अब हमारे बीच नहीं उनके किये कार्य कम से कम मुझे तो प्रेरणा देते रहेंगे

शनिवार, अप्रैल 10

सांड कैसे कैसे

.

एक बुजुर्ग लेखक  अपने शिष्य को समझा रहे थे -"आव देखा न ताव टपका दिये परसाई के रटे रटाए चंद वाक्य परसाई के शब्दों का अर्थ जानने समझने के लिये उसे जीना होगा. परसाई को बिछौना समझ लिये हो का.?, दे  दिया विकलांग श्रद्धा को रोकने का नुस्खा हमको. अरे एक तो चोरी खुद किये उपर से कोतवाल को लगे बताने चोर का हुलिया . अगर  पुलिस के चोर खोजी कुत्ते नें सूंघ लिया तो सांप सूंघ जायेगा . ....?
 तभी दौनो के पास से एक सांड निकला चेला चिल्लाया-जाने सांड कैसे कैसे ऐरा घूम रहे हैं इन दिनों कम्बख्त मुन्सीपाल्टी वाले इनको दबोच कानी हाउस कब ले जावेगें राम जाने.
बात को नया मोड देता चेला गुरु से बोला:-गुरु जी, अब बताइये दस साल हो गये एक भी सम्मान नसीब न हुआ मुझे ?
तो, क्या कबीर को कोई डी-लिट मिली,तुलसी को बुकर मिला ?
अरे गुरु जी , मुझे तो शहर के लोग देदें इत्ता काफ़ी है .
सम्मान में क्या मिलता है बता दिलवा देता हूं ?
गुरु, शाल,श्रीफ़ल,मोमेन्टो...और क्या.....?
मूर्ख, सम्मान के नारीयल की ही चटनी बनाये गा क्या...इत्ती गर्मी है शाल चाहता है, कांच के मोमेंटो चाहिये तुझे इस के लिये हिन्दी मैया की सेवा का नाटक कर रहा था ? जानता हूं तुझे आदमी से हट के रुतबा चाहिये उन अखबारों में नाम चाहिये जिसको रद्दी-पेप्पोर बाला पुडे बनाने बेच आता है, या कोई बच्चे की ................ साफ़ करने में काम आता है उसमें फ़ोटो छपाना है..वाह से हिन्दी-सुत, तुझे सूत भर भी अकल नईं है. जा जुमले रट के बने साहित्यकार. मैने तुझे मुक्त किया जा भाग जा घूम उसी छुट्टॆ-सांड सा जो पिछले नुक्कड पे मिला था.
गुरु से मुक्त हुआ साहित्यकार इन दिनों ब्लागिंग कर रहा है जहां साड सा एन सडक पे गोबर कर देता है. चाहे किसी का पैर कोई आहत हो उसे चरे हुए को निकालना है सो निकाल रहा है. इधर न तो संपादक के खेद सहित का डर न ही ज़्यादा प्रतिस्पर्धी ........ कभी इसकी पीठ खुजा आता तो कभी उसकी........ बेचारा करे भी तो क्या. दफ़्तर में मुफ़्त का कम्प्यूटर फ़िर हिन्दी की सेवा का संकल्प... हा हा हा......?

शुक्रवार, अप्रैल 9

सानिया कहा था न कल्लू पहलवान हुंकार भरेंगें

ये रिंग है कल्लू भाई
                                                 ++++++++++++++++++++++++++++++++++++++                                                                        
  लो भाई सानिया मिर्ज़ा को और उनके परिवार भोपाल की एक समाजी संस्था  ने कौम  से बाहर का रास्ता  दिखा दिया है. ?ये खबर सानिया मिर्ज़ा दूल्हे मियां सोएब मलिक और सानिया के अम्मी अब्बू की सेहत पर कितना असर डालती है  कोई नहीं जानता  किंतु    अध्य्क्ष कल्लू पहलवान ज़रूर प्रदेश भर में छाये रहे दिन भर .  मियां कल्लू पहलवान कुछ भी कल्लो बो तो ले गिया भिया पैले से इतिल्ला कर देते शोयेब को  और सानिया को तो शायद वो आपकी पेलवानी  {”पहलवानी”} का मान रख लेते भाई मियां ! अब क्या जाओ रमजानी के टपरे से ज़र्दे वाला पान लियाओ आज़ अखबार में नाम छपा है शायद मुफ़्त में इज़्ज़त सहित रमज़ानी गिलौरी पेश करे ...
भाई- मियां हम तो सुनते हैं ये गीत भाई 

बुधवार, अप्रैल 7

अरविंद मिश्रा जी हाईप तो सानिया मिर्ज़ा को किया गया है न कि महफ़ूज़ को

 मित्रो आज़ अगर महफ़ूज़ अली की उपलब्धि के समाचार को मैने पोस्ट किया अरविंद मिश्रा जी ने ओर उसके पहले ”गुमनाम ब्लाग समाचार नामक व्यक्ति” अज़ीबो गरीब टिप्पणियां कीं हैं मित्रो सच तो ये है कि हम आकाश की ओर मुंह करके थूकने की अभद्र कोशिश में लगे रहतें हैं
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पाडकास्ट के पहले भाग में सुनिए श्री बी एस पाबला,महेंद्र मिश्रा जी ,महफूज़ अली एवं मेरी वार्ता 
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    निर्णय आपके हाथ है
दूसरे भाग में चर्चा में शामिल; हुए मेरे साथ अजय झा,महफूज़
       

                       
   
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fire is still alive

''महफ़ूज़ अली की कविता ''

fire is still alive

But what of the fire ?
Its wood has been scattered.,
But the embers still dance .
Though the fire is tiny
It survived.
Though the fire is weak
It's still alive 

रविवार, अप्रैल 4

नियमों की भेंट न चढ जाये संजय की खेल प्रतिभा

https://mail.google.com/mail/?ui=2&ik=f28b6629c4&view=att&th=127c7f2999c1dab8&attid=0.2&disp=inline&realattid=f_g7mmn01o1&zw 

   सानिया से ज़्यादा ज़रूरी है संजय पर बात                          


जबलपुर नगर का युवा पावर लिफ़्टिंग खिलाडी संजय बिल्लोरे  का चयन मंगोलिया की राजधानी उलानबटर में दिनांक ०१ मई से ५ मई तक आयोजित एशियन पावर लिफ़्टिंग चैम्पियन शिप २०१० हेतु इंडियन-पावर-लिफ़्टिंग फ़ेडरेशन व्दारा किया गया  है. किंतु इस   खेल के  नान औलौंपिक श्रेणी का होने के कारण न तो राज्य सरकार से और न ही भारत सरकार से   खिलाडी को कोई मदद शासकीय तौर पर मिलना कठिन हो गया है. एक मध्यम वर्गीय युवा खेल-प्रतिभा को  मंगोलिया तक की  यात्रा के साधन जुटाने में जो ज़द्दो-ज़हद करनी पड रही आत्म विश्वास से भरे इस युवक को पूरा भरोसा है अपने बेहतर प्रदर्शन के लिये: संजय का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हौने वर्ष २००७ में ताईवान में आयोजित एशियन पावर लिफ़्टिंग प्रतियोगिता में रज़त-पदक जीता था.ओर्डिनेंस फ़ैक्ट्री खमरिया में मशीनिष्ट के पद पर कार्यरत संजय बिल्लोरे को इस खेल यात्रा के लिये लगभग एक लाख रुपयों की ज़रूरत है. यदि वे १५ अप्रेल तक फ़ेडरेशन को यात्रा व्यय हेतु राशि न भेज सके तो उनका चयन निरस्त कर दिया जायेगा. संजय ने यात्रा-व्यय के लिये अपने विभाग को आवेदन कर दिया है किंतु नियमों का हावाला देते हुए विभाग ने उनसे उम्मीद न रखने की  सलाह दी है यद्यपि फ़ेडरेशन ने  उनका आवेदन कलकत्ता स्थित मुख्यालय को भेज दिया है. 
सलैक्शन लैटर 

शुक्रवार, अप्रैल 2

श्रीराम चौरे जी का निधन

मेरे नाना जी सदाचार  की प्रतिमा  उच्च-न्यायालय,मध्य-प्रदेश सेवा निवृत अतिरिक्त रजिस्ट्रार सत्य साई सेवा समिति के संस्थापक सदस्य, नार्मदीय-ब्राह्मण-समाज के वरिष्ठ नागरिक  एवम श्री राजेन्द्र चौरे श्री विजय चौरे के पिता वयोवृद्ध श्री श्रीराम चौरे का दु:खद निधन 90 वर्ष की आयु में नागपुर में हुआ. आज इस महामना को अंतिम विदा देने प्रस्थान कर रहा हूं