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बुधवार, दिसंबर 03, 2008
सही साधा सटीक इरादा ज़ाहिर किया है सरकार
# पाकिस्तान के साथ सांस्कृतिक/साहित्यिक/आर्थिक संबंधों पर तुरंत ही समाप्त कर दी जाएँ
# स्टार प्लस सोनी जी टी वी इस देश के कलाकारों को लेकर बनने वाले रियलिटी शो से उन कलाकारों को बिदा कर देना चाहिए
# इमरान खान जैसे क्रिकेटर'स के विज्ञापन दिखाना बंद किया जाए
भारत सरकार के नए विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी का ताज़ा बयान स्पष्ट करता है कि देश की अस्मिता को अब चुनौती देना आसान कदापि नहीं है। सही साधा सटीक इरादा ज़ाहिर किया है सरकार नें इस मसले पर सभी की एक धारणा एक संकल्प होना चाहिए ।
ताकि कड़ाई जारी रहे. आतंक और आतंकी सपोलों को विश्व के मानचित्र से समाप्त कराने के लिए सबसे अहम् बात ये होगी कि -
" नकारात्मक विचार और विचार धाराएँ सख्ती से समाप्त किए जाएँ "
भारत ही विश्व को ज़रूरत है सर्वत्र शान्ति की ताकि उत्कृष्टता के साथ मानवीय विकास के परिणाम लाए जा सकें . यहाँ स्पष्ट करदेना चाहता हूँ की सनातन व्यवस्था में सर्वे जना: सुखाना भवन्तु का संदेश सदियों से है.... सभी धर्मों का आधार-भूत संदेश भी यही है
सुनो मीडिया वालो हिम्मत है तो इमरान खान वाला विज्ञापन दिखाना बंद कर दो
# पाकिस्तान के साथ सांस्कृतिक/साहित्यिक/आर्थिक संबंधों पर तुरंत ही समाप्त कर दी जाएँ
# स्टार प्लस सोनी जी टी वी इस देश के कलाकारों को लेकर बनने वाले रियलिटी शो से उन कलाकारों को बिदा कर देना चाहिए
# इमरान खान जैसे क्रिकेटर'स के विज्ञापन दिखाना बंद किया जाए
# क्रिकेट के लिए ज़ारी विदेश मंत्री का बयान ठीक है ,
इन सूत्रों पर अमल करना अब ज़रूरी है
सोमवार, दिसंबर 01, 2008
तय करो की वोट बचाना है या की देश ?
वंदे-मातरम
यदि देश की अस्मिता और देश को बचाना है- तो चलिए इस
देश को चुनावी अखाडे में तब्दील होने से बचाएं , सब के सब
एक सुर में गायें "शुजलाम सुफलाम् मलयज शीतलाम "
हम को तय कराना ही होगा
"तय करो की वोट बचाना है या की देश "
इस पोस्ट की चर्चा की हरिभूमि ने अपने नियमित कालम "ब्लॉग की दुनिया से " में ०२/१२/२००८ को हरिभूमि का आभार ब्लॉग-चर्चा के लिए और पोस्ट को शामिल कराने के लिए
रविवार, नवंबर 30, 2008
आ मीत लौट चलें
वक़्त अर्चना का है -आ आरती संवार लें ।
भूल हो गई कोई गीत में कि छंद में
या हुआ तनाव कोई , आपसी प्रबंध में
भूल उसे मीत मेरे सलीके से सुधार लें !
छंद का प्रबंध मीत ,अर्चना के पूर्व हो
समेटी सुरों का अनुनाद भी अपूर्व हो,
अपनी एकता को रेणु-तक प्रसार दें ।
राग-द्वेष,जातियाँ , मानव का भेद-भाव
भूल के बुलाएं पार जाने एक नाव !
शब्द-ध्वनि-संकेत सभी आज ही सुधार लें !
आज मैं एक सूची जारी करना चाहता हूँ :- इसे स्वीकारना ही होगा
- भारत में कोई भी व्यक्ति या समुदाय किसी भी स्थिति में जाति, धर्म,भाषा,क्षेत्र के आधार पर बात करे उसका बहिष्कार कीजिए ।
- लच्छेदार बातों से गुमराह न हों ।
- कानूनों को जेबी घड़ी बनाके चलने वालों को सबक सिखाएं ख़ुद भी भारत के संविधान का सम्मान करें ।
- थोथे आत्म प्रचारकों से बचिए ।
- जो आदर्श नहीं हैं उनका महिमा मंडन तुंरत बंद हो जो भी समुदाय व्यक्ति ऐसा करे उसे सम्मान न दीजिए चाहे वो पिता ही क्यों न हो।
- ईमानदार लोक सेवकों का सम्मान करें ।
- भारतीयता को भारतीय नज़रिए से समझें न की विदेशी विचार धाराओं के नज़रिए से ।
- अंधाधुंध बेलगाम वाकविलास बंद करें ।
- नकारात्मक ऊर्जा उत्पादन न होनें दें ।
- देश का खाएं तो देश के वफादार बनें ।
- किसी भी दशा में हुई एक मौत को सब पर हमला मानें ।
- देश की आतंरिक बाह्य सुरक्षा को अनावश्यक बहस का मसला न बनाएं प्रेस मीडिया आत्म नियंत्रण रखें ।
- केन्द्र/राज्य सरकारें आतंक वाद पे लगाम कसने देश में व् देश के बाहर सख्ती बरतें । पुलिस , गुप्तचर एजेंसीयों को सतर्क,सजग,निर्भीक रखें उनका मनोबल न तोडें ।
शनिवार, नवंबर 22, 2008
शनिचरी - निठल्ले के साथ चिट्ठो का चिट्ठा
महाशक्ति समूह की चिंता को पाठकों स्पर्श न करना सिद्ध कर गया समंदर की हवाएं अब तरो-ताज़ा नहीं करतीं. हैं किंतु कोई यदि ये कहे कि- सर्द मौसम... और तुम्हारी यादें... तो बाक़ी मौसमों में क्या करतें हैं जी ? हाँ शायद “ इंतजार” कर रहें होंगे इस मौसम का . युवाओं में विवाह के प्रति बढ़ती अनास्था की समस्या को देखते हुए सबकी चिंता जायज़ है न इसी लिए तो समाचार मिलता है कि- “ दो वर्ष में तीस हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार ? अच्छी खबरिया ले आएं हैं इसे पड़कर. कुंवारी बेटी के बाप दूसरे समाचार से प्रभावित है. सभी कहतें है सूर्य उदय हो गया है . जयश्री का ब्लॉग सच देखने काबिल हैफ़ैमिली डॉक्टर की ज़रूरत है कबाड़खाने को. सियासी मैदान में ज़मीन तलाशती औरतें और इस समाचार के साथ पुरूष घरेलू कामकाज सीखरहे है, इस मसले पर ब्लॉग लिखने जा रहे हैं कुछ ख़बर चुनाव क्षेत्र से : संवाद दाता ताऊ भेज रहें है ज़रूर बांचिए '
जय शनि देव
गुरुवार, नवंबर 13, 2008
माचिस की तीली के ऊपर बिटिया की से पलती आग
►
माचिस की तीली के ऊपर बिटिया की से पलती आग
यौवन की दहलीज़ को पाके बनती संज्ञा जलती आग .
********
एक शहर एक दावानल ने निगला नाते चूर हुए
मिलने वाले दिल बेबस थे अगुओं से मज़बूर हुए
झुलसा नगर खाक हुए दिल रोयाँ रोयाँ छलकी आग !
********
युगदृष्टा से पूछ बावरे, पल-परिणाम युगों ने भोगा
महारथी भी बाद युद्ध के शोक हीन कहाँ तक होगा
हाँ अशोक भी शोकमग्न था,बुद्धं शरणम हलकी आग !
********
सुनो सियासी हथकंडे सब, जान रहे पहचान रहे
इतना मत करना धरती पे , ज़िंदा न-ईमान रहे !
अपने दिल में बस इस भय की सुनो 'सियासी-पलती आग ?
हाँ अशोक भी शोकमग्न था,बुद्धं शरणम हलकी आग
सोमवार, नवंबर 10, 2008
"ज्ञानरंजन जी अब पहल बंद कर देंगे "
पंकज
स्वामी गुलुश नें बताया की ज्ञान जी ने अपना निर्णय
सुना ही दिया की वे पहल को बंद कर देंगे कबाड़खाना ने इस समाचार को को पहले ही अपने ब्लॉग पर लगा दिया था. व्यस्तताओं के चलते या कहूं “तिरलोक सिंह” होते तो ज़रूर यह ख़बर मुझे
समय पर मिल गई होती लेकिन इस ख़बर के कोई और मायने निकाले भी नहीं जाने चाहिए . साहित्य जगत
में यह ख़बर चर्चा का बिन्दु इस लिए है की मेरे कस्बाई पैटर्न के शहर जबलपुर को पैंतीस बरस से विश्व
के नक्शे पर अंकित कर रही
पहल के आकारदाता ज्ञानरंजन जी ने पहल बंद कराने की घोषणा कर दी .
पंकज
स्वामी की बात से करने बाद तुंरत ही मैंने ज्ञान जी से बात की .ज्ञान जी
का कहना था :"इसमें हताशा,शोक दु:ख
जैसी बात न थी न ही होनी चाहिए .दुनिया भर में सकारात्मक जीजें बिखरीं हुईं
हैं . उसे समेटने और आत्मसात करने का समय आ गया
है" पहल से ज्ञानरंजन से अधिक उन सबका रिश्ता है जिन्होंने उसे स्वीकारा.
पहल अपने चरम पर है और यही बेहतर वक़्त है उसे बंद करने का . हाँ,पैंतीस
वर्षों से पहल से जो अन्तर-सम्बन्ध है उस कारण पहल के प्रकाशन को
बंद करने का निर्णय मुझे भी कठोर और कटु लगा है किंतु बिल्लोरे अब बताओ
सेवानिवृत्ति भी तो ज़रूरी है.
ज्ञान
जी ने एक प्रश्न के उत्तर में कहा :-"हाँ क्यों नहीं, पहल की शुरुआत में तकलीफों को मैं उस तरह देखता
हूँ की बच्चा जब उम्र पता है तो उसके विकास में ऐसी ही तकलीफों का आना स्वाभाविक
है , बच्चे के दांत निकलने में उसे तकलीफ नैसर्गिक
रूप से होती है,चलना सीखने पर भी उसखी
तकलीफों का अंदाज़ आप समझ सकते हैं "उन घटनाओं का ज़िक्र करके मैं जीवन के
आनंद को ख़त्म नहीं करना चाहता. सलाह भी यही है किसी भी स्थिति में
सृजनात्मकता-के-उत्साह को कम न किया जाए. मैं अब शारीरिक कारण भी
हैं पहल से अवकाश का ।
-->
ब्लागर्स के लिए ज्ञान जी का कहना है
:"पहल का विराम कोई अन्तिम विराम नहीं है
सकारात्मकता के साथ स्वयं के और समाज के
विकास के ढेरों दरवाज़े खुले हैं कभी भी कभी भी
सकारात्मकता को विराम नहीं मिला
हमें चाहिए कि सकारात्मकता
को साथ लेकर आगे बढें जो जो भी
करें बेहतर करें !
|
ज्ञान जी पूरे उछाह के साथ पहल का प्रकाशन बंद कर रहें हैं किसी से कोई दुराग्रह, वितृष्णा,वश नहीं . पहल भारतीय साहित्य की अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित एवं पठित ऐसी पत्रिका है जो कल इतिहास बन के सामने होगी बकौल मलय:"पहल,उत्कृष्ट विश्व स्तरीय पत्रिका इस लिए भी बन गई क्योंकि भारतीय रचना धर्मिता के स्तरीय साहित्य को स्थान दिया पहल में . वहीं भारत के लिए इस कारण उपयोगी रही है क्योंकि पहल में विश्व-साहित्य की श्रेष्ठतम रचनाओं को स्थान दिया जाता रहा'' मलय जी आगे कह रहे थे की मेरे पास कई उदाहरण हैं जिनकी कलम की ताकत को ज्ञान जी ने पहचाना और साहित्य में उनको उच्च स्थान मिला,
- ज्ञान जी
अब क्या करेंगें ?
- ज्ञान जी
ने क्यों पहल बंद कर दी
- ज्ञान जी
की पहल; का विकल्प
- इनमें से
अधिकाँश मुद्दों पर ज्ञान जी ने ऊपर स्पष्ट कर दिया है किंतु एक बार प्रथम
बिन्दु की और सुधि पाठकों का ध्यान आकृष्ट कराना चाहूंगा ज्ञान जी ने
कहा:-"As a councilor
i am available " ज्ञान जी ने यह भी कहा मुझे और सृजन करना है वो तो
करूंगा ।
- पहल के विकल्प
के सम्बन्ध में ज्ञान जी का कथन है : "जो भी होगा अच्छा होगा ऐसा नहीं
है कि पहल के बाद सब कुछ ख़त्म हो गया "
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