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दिसंबर, 2014 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

परसाई जी बनाम आमिर खान और फुरसतिया वर्सेज़ मिसफिट

                     पी के ने तीन सौ   करोड़ से ज़्यादा रकम भीतर कर ली हंगामा तब मचा कि आमिर भाई एक तरफा बात करती है इस फिलम के भीतर ...... आमिर बाबू बोले भाई अपुन तो आर्टिस्ट है जे बात आप निर्माता निर्देशक से कहियों   !            कोई कुछ भी कहे   एक बात तो स्वीकारनी  होगी कि इंसानी आस्थाओं के खिलाफ लोगबाग सदियों से आधी रोटी में दाल लेकर उचकते नज़र आते हैं ... हमाए बाबा परसाई जी कम न थे गणेशोत्सव हो या अन्य कोई उत्सव हिन्दू धर्म के खिलाफ वो लिखना न चूकते ऐसा जबलपुर वालों का मत रहा  है । परंतु परसाई जी कट्टर भगत लोग इस बात को अस्वीकारते हैं  सारे  भगत मानतें हैं कि - "परसाई जी सभी धर्मों की कट्टरताओं के खिलाफ थे । "             तो भगत  भाई लोग  ये  बताओ कि - किसी भी प्रकार का धार्मिक  विद्वेष के लिए  ऐसे विषय औवेसी ब्रांड वक्तव्य अथवा किसी भड़काऊ विषय को सामने  लाना ज़रूरी है क्या ?        " नहीं न................ तो समझ लो लोग निब्बू वाले प्रकाश में ( लाइम  लाइट में ) बने रहने अथवा नोट कमाने के लिए अथवा टी आर पी के चक्कर में ऐसा काम करने से चूकते नहीं । अब अपने अन

जो कभी भी न मिला, न मैं उसको जानता- वो भी पत्थर आया लेके जाने उसको क्या गिला है.

आप बोलोगें मुकुल जी, आपका तो जलजला है by girishbillore फ़न उठा कर मुझको ही डसने चला है, सपोला वो ही मेरी, आस्तीनों में पला है.! वक़्त मिलता तो समझते आपसे तहज़ीब हम - हरेक पल में व्यस्तता है तनावों का सिलसिला है. जो कभी भी न मिला, न मैं उसको जानता- वो भी पत्थर आया लेके जाने उसको क्या गिला है. जीभ देखो इतनी लम्बी, कतरनी सी खचाखच्च - आप अपनी सोचिये, बयानों में क्या रखा है .? ये अभी तो ”मुकुल” ही है- पूरा खिलने दीजिये- आप बोलोगें "मुकुल जी, आपका तो जलजला है..!!" 

हरदे वाला बाबूलाल

हरदे* वाला बाबूलाल  एक टांग पर खड़ा  एक हाथ उंचा आकाश को निहारता  अक्सर देखा जाता था  घंटाघर में  जोर जोर से कुछ बोलता था  जाने क्या कौन जाने  काला   कम्बल  कब सोता था उसे ओढ़कर  कौन जाने ? किसानों की छकड़ी से  बाबूलाल को तकते बच्चे  पूछते - " यो  काई बोलच दाजी " .... कुण जाणा  कई बोले है .... पोरया, अ वो धसाढ़नई  मुड़ो  भित्तर कर ....... बच्चे छिप जाते गाड़ी के भीतर  हरदे वाला बाबूलाल  एक टांग पर खड़ा  एक हाथ उंचा आकाश को निहारता  लोग कहते थे  गरिया रहा है  अंग्रेजों को.…………………।  मेरे  घर के ऐन  सामने वाला बूढ़ा भी  है  रोज़िन्ना ...................... लोगों को गरियाता है मातृ-भगनी अलंकरण करता   पर वो बाबूलाल नहीं है हरदे वाला    यह कविता श्रीमती जी से आज सुबह हुई चर्चा पर आधारित है      * हरदे= हरदा    

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह जी ने पेशावर ट्रेजेडी पेंटिंग पर किए हस्ताक्षर

17.12.2014 रात्रि  08 : 00  बजे बालभवन जबलपुर    18 . 12. 2014  अपरान्ह   12 :00 बजे मानसभवन जबलपुर   मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह जी ने  पेंटिंग पर अपने हस्ताक्षर करते हुए   संभागीय बालभवन जबलपुर के बच्चे  पाकिस्तान के पेशावर में 16 दिसंबर 2014 को स्कूली बच्चों पर हुए आतंकी हमले से बेहद दु:खी थे । सामूहिक प्रार्थना के उपरांत बच्चों ने विश्व में आतंक के खात्मे पर खुला के बातचीत की । सभी बच्चों  के मन में आक्रोश था ।  सभी दु:खी थे कुछ बच्चे भावुक भी थे आंखों में नमी लिए हमसे पूछा – “आतंक का अंत क्या है ? ”        बच्चों को हमने बताया कि जितना अधिक से अधिक सकारात्मकता एवं तेजी से  को बढ़ावा दिया जाएगा उतना तीव्रता से आतंक का अंत होगा । हम एक महान देश के नागरिक हैं हमें विश्व को शांति का संदेश देते रहना होगा । अगर हम कलाकार हैं तो कला के जरिये , कवि हैं तो हमारी कविताएं सकारात्मक होनी चाहिए । सबसे पहले हम मन से कुंठा निकालें और विश्व को शांति का संदेश देने की कोशिश करें चित्रों से गीतों से कविताओं से साहित्य से ......... !!             बस फिर क्या था किसी  ने कलम उठाई

इन्द्रधनुष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को भेंट की गई बाल भवन, जबलपुर के बच्चों की पेंटिंग शक्तिरूपा

                          निराश्रित बालिकाओं के उत्थान के लिए पहल की है  दिशा में जबलपुर प्रदेश का नेतृत्व कर रहा है : शिवराज सिंह              मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जिले में निराश्रित बालिकाओं के उत्थान के लिए की जा रही पहल सराहनीय है। इस पहल से बेटियों के हित में किए जा रहे शासन के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कड़ी जुड़ेगी ।             श्री चौहान मानस भवन में आयोजित इन्द्रधनुष – आओ रंग बिखेरें कार्यक्रम के शुभारंभ समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे । उन्होंने कहा कि वे प्रतिपालक बधाईके पात्र हैं जो निराश्रित अथवा जीविकोपार्जन के लिए श्रम करने को बाध्य बालिकाओं की जिम्मेदारी लेनेआगे आए हैं ।  मुख्यमंत्री ने इस अभिनव पहल के लिए आईजी (महिला अपराध) श्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव की भी प्रशंसा की । श्री चौहान ने कहा कि बेटियां भगवान की अद्भुत कृति हैं।     मुख्यमंत्री ने कहाकि भारत राष्ट्र की हजारों वर्ष पुरानी परम्परा संस्कृत के इस श्लोक से उद्भासित होती रही है – यत्रनार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता: अर्थात् देवता वहीं निवास करते

शिव की आँखें खुलीं थी उस रात में !

रास्ते खोजते भीगते भागते, जिसके दर पे  थे  उसने  बचाया  नहीं कागज़ों पे लिखे गीत सी ज़िंदगी- जाने क्या क्या हुआ उस रात में ? तेज़ धारा बहा ले गई ज़िंदगी रेत से बह रहे थे नगर के नगर  – क्रुद्ध बूंदों ने छोड़ा नहीं एक भी, शिव की आँखें खुलीं थी उस रात में ! हर तरफ़ चीखतीं भयातुर देहों को तिनका भी मिला न था इक हाथ में- बोलिये क्या लिखें क्या सुनें क्या कहें- जो बचा सोचता ! क्यूं बचा बाद में ? जो कुछ भी हुआ था वज़ह हम ही थे- पर सियासत को मुद्दों पे मुद्दे मिले.   बेरहम  चैनलों पे लोग थे,   गिद्धों की तरह  आदमी थे जुटे-  काटकर  अंगुलियां  मुद्रिका ले गये  हाथ काटे गये चूड़ियों के लिये निर्दयी लोगों के इस नगर में कहो क्या लिखूं, शब्द छुपते हैं आघात में . मत कहो गीत गीले होते नहीं, अबके गीले हुये हैं वो बरसात में...                                                                           * गिरीश बिल्लोरे ”मुकुल”   

Bhopal : A Prayer For Rain के निर्देशक हैं जबलपुर के डाक्टर रवि कुमार शकरगाए

इस वक्त में   दुनियां की सबसे   चर्चित   फिल्म   " Bhopal : A Prayer For Rain "   का निर्देशन     लेखन जबलपुर के अनिवासी भारतीय चिकित्सक ने किया है ।           मुझे स्मरण हो आया अपने स्वर्गीय मित्र क्रिकेटर   स्व. डाक्टर संजय श्रीवास्तव का जिनके डा. रवि बाल सखा है ।  डा. रविकुमार राइट टाउन जबलपुर निवासरत शकरगाए परिवार सदस्य हैं यह परिवार नार्मदीय ब्राह्मण परिवारों में से एक है जो बहुधा संयुक्त परिवार की मिसाल होते हैं  ।      पिता श्री मदन मोहन शकरगाए स्वयं  सेवानि:वृत   बुजुर्ग हैं परंतु वृद्ध होने का एहसास वे होने नहीं देते । नार्मदीय ब्राह्मण समाज में सतत सक्रिय शकरगाए दादा जी गायकी के शौकीन हैं आज भी गीत भजन गाते हैं   ,   जब मन हुआ यात्रा पर कुल मिला कर आत्मसाहस के साथ ज़िंदादिली के साथ जीवन का आनंद लेते शकरगाए जी के मन में उत्साह का संचार होना स्वाभाविक है .... डा. रवि का जन्म 11 अक्टूबर 1961 को मध्यप्रदेश के  बैरागढ़ भोपाल में हुआ । प्रारम्भिक शिक्षा दीक्षा भी भोपाल में ही हुई ।                       घर के मुखिया  की सरकारी नौकरी के चलते समूचा   परिवार को 1976

मेरा मानना है कि उच्च दर्जे की आय अर्जित कर सकेंगे हिन्दी ब्लागर : रवि रतलामी

हिन्दी के मशहूर ब्लागर श्री रविशंकर श्रीवास्तव   जिनको हम रविरतलामी के नाम से जानते  हैं  गूगल की विज्ञापन नीति से से उत्साहित हैं । उनका मानना है कि भविष्य में ब्लागिंग रोजगार का जरिया हो सकती है । इस सिलसिले में उनसे हुई बातचीत का पॉडकास्ट सुनिए .....                   " रवि रतलामी  से गिरीश मुकुल की वार्ता "

गूगल की हिन्दी ब्लागिंग के लिए विज्ञापन नीति पर अनूप शुक्ल फुरसतिया जी का वक्तव्य

 गूगल की हिन्दी ब्लागिंग के लिए विज्ञापन नीति पर अनूप शुक्ल फुरसतिया जी का वक्तव्य पॉडकास्ट के रूप में प्रस्तुत है - SoundCloud Dot Com Cirish_Billore V/s Furasatiya

सुनो साक़ी ! अपनी पायलों में ताज़गी लाना ।

न मैखाने का पैमाना , न पैमाने का मैखाना कोई नाता नहीं इनमें गर सूना हो मैखाना । यही समझाने आया हूँ कि हर रिश्ते में कारण है – ये दुनियाँ इक तिजारत है इसे जब चाहो को अज़माना ।। *************** मयकश आने वाला है सुराही सामने लाओ सुनो साक़ी ! अपनी पायलों में ताज़गी लाना ।    उसे जो हो  पसंदीदा - गज़ल वो साज पे गाओ - उसी की हो यकीं ये  उसको हर कतरे से समझाना ।। ********************** बिना मयकश के मैखाना उजड़ी इक इबारत है कौन साक़ी ? कैसा प्याला ? सुराही क्या ? क्या मैखाना ? कवि कोई कैसे लिखता जीवन की मधुशाला ... ? मयकश है तो मधुशाला मयकश है तो पैमाना ।।    **********************