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शुक्रिया दोस्तो जी चुका हूं आधी सदी..!

उपेक्षा का दंश : खून निकलता नहीं ……… खून सूखता है

एक मदालस शाम एक अप्रतिम वापसी

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया है मेरे आगे

इन ऊंटों पर क्यों बैठूं सुना है इन पर बैठ कर भी कुत्ता काट लेता है कभी कभी !!

तुझे क्या मिलेगा नमाज़ में...:फ़िरदौस ख़ान

दादा ईश्वरदास रोहाणी : कुछ संस्मरण...

भगवान तो सस्ते में दे रहा हूं.. !