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मार्च, 2012 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

राजेश उत्साही के ब्लाग गुल्लक पर देखिये भवानी प्रसाद मिश्र की तीन कविताएं

          29 मार्च कवि भवानी प्रसाद मिश्र का जन्‍मदिन है। प्रस्‍तुत हैं उनकी तीन कविताएं। अबके मुझे पंछी बनाना अबके या मछली या कली और बनाना ही हो आदमी तो किसी ऐसे ग्रह पर जहां यहां से बेहतर आदमी हो आगे कविताएं पढ़ने यहां चटका लगाएं "राजेश उत्साही के ब्लाग गुल्लक "              ***

ज्ञान जी को कविता का बहुत गहरा ज्ञान है : मनोहर बिल्लौरे

                        बात उन दिनों की है जब  ज्ञानरंजन    जी नव-भास्कर का संपादकीय पेज देखने जाते थे। सन याद नहीं। तब वे अग्रवाल कालोनी (गढ़ा) में रहा करते थे. सभी मित्र और चाहने वाले अक्सर शाम के समय, जब उन के निकलने का समय होता, पहुँच जाते. चंद्रकांत जी दानी जी मलय जी, सबसे वहाँ मुलाकात हो जाती। आज इंद्रमणि जी याद आ रहे हैं। वे भी अपनी आवारा जिन्दगी में ज्ञान जी के और हमारे निकट रहे और अपनी आत्मीय उपसिथति से सराबोर किया। उस समय जब ज्ञान जी ने संजीवनीनगर वाला घर बदला और रामनगर वाले निजी नये घर में आये तब काकू (सुरेन्द्र राजन) ने ज्ञान जी का घर व्यवसिथत किया था. जिस यायावर का खुद अपना घर व्यवसिथत नहीं वह किसी मित्र के घर को कितनी अच्छी तरह सजा सकता है, यह तब हम ने जाना, समझा। ज्ञानरंजन की बदौलत हमें काकू (सुरेन्द्र राजन) मिले. मुन्ना भाइ एक और दो में उनका छोटा सा रोल है। बंदिनी सीरियल में वे नाना बने हैं। उन्हें तीन कलाओं में अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड मिले है। वे कहते हैं कि फिल्म में काम हम इसलिये करते हैं ताकि महानगर में रोटी, कपड़ा और मकान मिलता रहे। ज्ञानरंजन जी, प्रमुख

A TRIBUTE TO SHIRDEE SAI BABADEVOTIONAL ALBUM "BAWARE FAQEERA"

A TRIBUTE TO SHIRDEE SAI BABADEVOTIONAL ALBUM                                   "BAWARE FAQEERA"                               VOICE :-                                *ABHAS JOSHI -*SANDEEPA PARE                              MUSIC:-                               *SHREYASH JOSHI                                LYRICS:-                               *GIRISH BILLORE"MUKUL"    _____________________________  ______________________________  _____________________________  ______________________________

गिरीश बिल्लोरे मुकुल की तीन कविताएं

आ मीत लौट चलें गीत को सँवार लें

आ मीत लौट चलें गीत को सँवार  ले अर्चना का वक़्त है आ बातियाँ सुधार लें ******************** भूल हो गयी अगर गीत में या छंद में जुट जाएं मीत आ सुधार के प्रबंध में कोई रूठा हो अगर तो प्रेम से पुकार लें आ मीत .................................!! ******************** कौन जाने कुंठित मन कितने घर जलाएगा कौन जाने मन का दंभ- "कितने गुल खिलाएगा..?" प्रेम कलश रीता तो, चल अमिय उधार लें ..!! आ मीत .................................!! ******************** आत्म-मुग्धता का दौर,शिखर के लिये  ये दौड़ न कहीं सुकून है,न मिला किसी को ठौर शंखनाद फिर  कभी ! आज  तो  सितार लें ॥! आ मीत .................................!! ********************

बावरे-फ़क़ीरा की लांचिंग को चार बरस पूरे :गिरीश बिल्लोरे

१४ मार्च २००९ की शाम कुछ यादें आराधना और प्रभू का आभार   विकलागों की सेवा का संकल्प लेकर उसे पूरा करना उसे आकार देना अनुकरणीय है.मुझे बेहद प्रसन्नता है की सव्यसाची कला ग्रुप जबलपुर द्वारा जिस भक्ति एलबम “बावरे-फ़कीरा” का लोकार्पण किया जा रहा है सराहनीय कार्य है “-तदाशय के विचार दिनांक 14 मार्च 2009 को सायं:07:30 बजे स्थानीय मानस भवन में आयोजितभक्ति एलबम “बावरे-फ़कीरा” का लोकार्पण समारोह अवसर पर ईश्वर दास रोहाणी ने व्यक्त किये . कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री मुकेश गर्ग महानिदेशक संगीत संकल्प ने कार्यक्रम के उद्द्येश्य की सफलता के लिए समुदाय से अनुरोध किया जबकि अस्थि रोग विशेषज्ञ डाक्टर जितेन्द्र जामदार के बावरे-फकीरा एलबम टीम के सदस्यों आभास जोशी , गिरीश बिल्लोरे , श्रेयस जोशी , सहित सभी सदस्यों के कृतित्व पर प्रकाश डाला. डाक्टर जामदार का कथन था कि “गिरीश और ज़ाकिर हुसैन वो लोग हैं जो बैसाखियों से नहीं बैसाखियाँ उनसे चलतीं है. जाकिर हुसैन  बेहद अध्यात्मिक-उर्जा से परिपूर्ण वातावरण में एलबम का विमोचन कराने साईं बाबा बने एक बच्चे ने मशहूर पोलियो ग्रस्त गायक जाकिर हुसैन एवं आभास

50 वर्ष पूर्व अरबवासियों के प्रति दृष्टि :डैनियल पाइप्स

डैनियल पाइप्स 1962 में अत्यंत आकर्षक, चिकने आवरण पर 160 पृष्ठों की  The Arab World  शीर्षक की पुस्तक में तात्कालिक रूप में कहा गया, "कभी अत्यन्त समृद्ध और फिर पराभव को प्राप्त विस्तृत अरब सभ्यता आज परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। कुछ फलदायक अव्यवस्था प्राचीन जीवन की निश्चित परिपाटी को बदल रही है" । इस संस्करण ने इस बात का दावा किया कि इसकी तीन विशेषतायें आधी शताब्दी के बाद भी इसे समीक्षा के लिये बाध्य करती हैं। पहला, उस समय की उच्चस्तरीय अमेरिकी साप्ताहिक पत्रिका लाइफ ने इसे प्रकाशित किया जिसमें कि सांस्कृतिक केंद्रीयता निहित थी । दूसरा, एक सेवा निवृत्त विदेश मंत्रालय के अधिकारी जार्ज वी एलेन ने इसकी प्रस्तावना लिखी थी जिससे कि पुस्तक के मह्त्व की ओर संकेत जाता था। तीसरा, एक ख्यातिलब्ध ब्रिटिश पत्रकार, इतिहासकार और उपन्यासकर्ता डेसमन्ड स्टीवर्ट ( 1924 – 1981) ने इस पुस्तक को लिखा । द अरब वर्ल्ड अत्यंत प्रभावी रूप से दूसरे काल के समय को प्रस्तुत करता है; वैसे तो पूरी तरह अपने विषय को बहुत मधुर बनाकर नहीं रखा है लेकिन स्टीवर्ट ने सहज और शालीन भाव से अपनी

संस्कारधानी ने कायम की है मिसाल शालीन होली की :प्रभात साहू

   “संस्कारधानी ने कायम की है मिसाल शालीन होली की उसी की एक बानगी आज़ यहां देखने को मिल रही है , वैसे समय के साथ बदलते शहर में फ़ागुन के इस त्यौहार का स्वरूप बदल दिया है किंतु कुछ लोग आज़ भी संस्कृति के संरक्षण के लिये सतत प्रतिबद्ध है. हमलोग संस्था की कोशिश भी इसी दिशा में उठाया गया एक क़दम है. जिसकी जितनी भी सराहना की जाए कम होगी – तदाशय के विचार श्री प्रभात साहू महापौर जबलपुर ने गेटनम्बर चार के निवासियों के संगठन हमलोग के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किये. इस अवसर पर कार्यक्रम के विशेष आमंत्रित पूर्व-महापौर श्री सदानन्द गोडबोले ने कहा-“एकता एवम सादगी का दस्तावेज बन रहे इस कार्यक्रम की जितनी भी सराहना की जाए कम होगी जहां कला एवम संस्कृति के रंग बिखेरे गये सादगी एवम पारिवारिक माहौल में जहां एक ओर दिवंगतों को स्मरण किया गया वहीं बुजुर्गों को सम्मानित कर युवाओं ने अनूठी मिसाल कायम की. गेट नम्बर चार निवासियों के संगठन “हमलोग ” द्वारा होलिका-दहन की शाम को रंगारंग बना कर होली को और यादगार बना दिया.  कार्यक्रम का शुभारम्भ दिवंगत एड.स्व.श्री जगदीश तिवारी जी के स्मरण के साथ हुआ

आज बसंत की रात गमन की बात न करना :गोपालदास नीरज़

वसंत का श्रृंगारी स्वरूप कवि मन को प्रभावित न करे ..!-असंभव है.. हर कवि-मन  कई कई भावों बगीचे से गुज़रता प्रकृति से रस बटोरता आ कर अपने लिखने वाले टेबल पे रखी डायरी के खाली पन्ने पर अपनी तरंग में डूब कर लिख लेता है गीत..नज़्म...ग़ज़ल.. यानी.कविता  उकेरता है शब्द-चित्र . जो दिखाई भी देतें हैं सुना भी जाता है उनको .. अरे हां.. गाया भी तो जाता है.. गीत सुरों पे सवार हो कर व्योम के विस्तार पर विचरण करता है .. बरसों बरस.. दूर तक़ देर तलक... इसी क्रम में नीरज जी की एक रचना अपने सुर में पेश कर रही हूं..   आज बसंत की रात गमन की बात न करना धूल बिछाए फूल-बिछौना बगिया पहने चांदी-सोना बलिया फेंके जादू-टोना महक उठे सब पात हवन की बात न करना आज बसंत की रात……. बौराई अमवा की डाली गदराई गेंहू की बाली सरसों खड़ी बजाये ताली झूम रहे जलजात शमन की बात न करना आज बसंत की रात…….. खिड़की खोल चंद्रमा झांके चुनरी खींच सितारे टाँके मना करूँ शोर मचा के कोयलिया अनखात गहन की बात न करना आज बसंत की रात……. निंदिया बैरन सुधि बिसराई सेज निगोड़ी करे ढिठाई ताना मारे सौत जुन्हाई

बूंद से नदी बन जाने की उत्कंठा

बेशक बूंदें ही रहीं होंगी जिनने एकसाथ  सोचा होगा-"चलो मैली चट्टानों को रेतीली मटमैली ढलानों को धो आते हैं..!! ऊसर बंजर को हरियाते हैं !! मर न जाएं प्यासे बेज़ुबान चलो उनकी प्यास बुझा आतें हैं...!!" कुछेक बोली होंगी- "हम सब मिलकर धार बनेंगी.. सारी नदियों से विलग हम उल्टी बहेंगी उल्टे बहाव का कष्ट सहेंगी..? न हम तो...! तभी उनको कुछ ने डपटा होगा एक जुट बूंदों ने बहना शुरु किया होगा तब हां तब जब न हम थे न हमारी आदम जात तब शायद कुछ भी न था पर एक सोच थी बूंदों में एक जुट हो जाने की बूंद से नदी बन जाने की उमंग और उत्कंठा ..! लो ये वही नदियां हैं जिनको कहते हैं हम नर्मदा या गंगा !! नदियां जो धुआंधार हैं- काले मटमैले पहाड़ों को धोती तुमसे भी कुछ कह रहीं हैं एकजुट रहो तभी तो चट्टानों के घमंड तोड़ पाओगे .... वरना ऐसे ही बूंद-बूंद ही मर    जाओगे..!!

जबलपुर सम्भाग अटल बाल मिशन का सम्भाग स्तरीय प्रशिक्षण

                         जबलपुर। बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से जिले स्तर पर अटल बिहारी बाजपेयी बाल आरोग्य एवं पोषण मिशन के तहत् जिला स्तरीय कार्य योजनाऐं तैयार कराई गयी । मिशन मोड में‘‘ कुपोषण से मुक्ति के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम को प्रभावपूर्ण एवं परिणाम मूलक बनाने के उद्देष्य से संभाग स्तर पर 5-5 दिवसीय प्रशिक्षण सत्र संचालित किये जा रहे है । श्री एस.सी. चौबे संयुक्त संचालक महिला बाल विकास जबलपुर संभाग के मार्गदर्शन में आयोजित प्रथम सत्र में जबलपुर,मंडला,बालाघाट,सिवनी छिंदवाड़ा,नरसिंहपुर,कटनी जिलों के 47 प्रतिभागी प्रशिक्षण में शामिल है । विभाग के मैदानी अमले को प्रशिक्षण प्रदान करेंगे ।जबलपुर सम्भाग स्तरीय  ट्रेनिंग आफ़ ट्रेनर्स के पहले चरण में दिये गए प्रशिक्षण में क्लास रूम प्रशिक्षण के अलावा क्षेत्रीय भ्रमण, रोल-प्ले,समूह-चर्चा का भी प्रावधान किया गया था.          जबलपुर संभाग में आयोजित इन प्रशिक्षण सत्रों की उपादेयता को रेखांकित करते हुए संयुक्त संचालक श्री एस. सी चौबे ने बताया कि ‘‘ मिशन मोड में कुपोषण नियंत्रण एवं पोषण स्तर में सकारात्मक सुधार के

प्रवासी कथा साहित्य और स्त्री – डॉ. अनिता कपूर (अमरीका)

ऐसा माना जाता है की साहित्य समाज का दर्पण होता है फिर चाहे वो भारतीय समाज हो या अपनाये हुए देश का समाज हो. प्रवासी भारतीयो की सोच भारत में हो रही गतिविधियों से भी संचालित होती है, और यह संचालित सोच प्रवासी लेखन में बखूबी दिखाई भी देती हैं, फिर चाहे वो कोई भी विधा हो. प्रवासी कथा साहित्य जिसका रंग-रूप भारत के पाठकों के लिए एक नयेपन का बोध देता है, कारण है,  प्रवासी कथा साहित्य में अपने अपनाए हुए देश के परिवेश, संघर्ष, विशिष्टताओं, रिश्तों और उपलब्धियों पर जानी -माने प्रवासी कथाकारों ने अपने लेखन के द्वारा एक भिन्न समाज से परिचय करवाया है। विषय समाज की ठोस समस्याओं से जुड़े होते हैं और नारी चरित्रों एवं परिवेश के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों और अन्याय का अनावरण भी किया जाता है। प्रवासी के लिए यह आसान नहीं होता कि वह अपने अपनाए हुए देश की संस्कृति, सभ्यता और रीति-रिवाज से पूरी तरह जुड़ पाए। उनकी जड़ें अपनी मातृभूमि, संस्कारों एवं भाषा से जुड़ी होती हैं। और जहां तक स्त्री की बात आती है तो सभी धर्मों और देशों में नारी का रुतबा हमेशा से दोयम दर्जे का रहा है। जो प्रवासी  रचनाकारों  की कथा