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गर इश्क है तो इश्क की तरहा ही कीजिये

डूबे जी छा गए दिलो दिमाग पर !

मुझे रोकने का किसी के पास कोई अधि कार नहीं है

आज वो ये गातीं नज़र आ जाएँ एक बार फ़िर

ब्लॉग-पार्लियामेन्ट की जुगत ज़मने लगी है:

दोहे

जो पंगु गिरी को सहज ही लांघे तो मेरे रहबर बवाल होगा

ठीकरा फोड़ समारोह

किताबें बुकसेल्फ़ में रखी नज़र आतीं हैं बड़े से ताबूत में सोयी बेज़ुबाँ लाशें !

शुभ कामनाएं