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जनवरी, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

कश्मीर 19 जनवरी 1990

  कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है , 14वी शताब्दी से  लगातार इस कश्मीर एक आतंक के साए जीने के लिए मजबूर था । भारत सरकार ने 5 अगस्त 2019 को राज्यसभा में एक ऐतिहासिक जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम २०१९ पेश किया जिसमें जम्मू कश्मीर राज्य से संविधान का अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य का विभाजन जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के दो केंद्र शासित क्षेत्रों के रूप में करने का प्रस्ताव किया गया ।   और यह धारा 35 स्थाई प्रबंध था और इसका अंत कश्मीर की वादियों में चुभन भरी हवा से मुक्ति के लिए किया गया। नई  व्यवस्था लागू होने के साथ भारत के कश्मीरी पंडितों के साथ आधा न्याय मिल गया। भारत के सभी हिस्से में बदलाव की जरूरत थी । बदलाव हुआ और इस बदलाव में कश्मीरी पंडितों को अपनी जन्मभूमि में वापिस पहुंचने उस पर माथा टेकने का एक मौका मिलने की उम्मीद बढ़ती जा रही है। किंतु परिस्थितियां अभी भी बहुत अनुकूल नहीं कि कहीं जा सकती इसी विषय पर मीनाक्षी रैना कश्मीर से निकलकर कनाडा में जा बसी लेखिका की अभिव्यक्ति के आधार पर यह वीडियो तैयार किया है उम्मीद है कि आप भी सम्मिलित होंगे और वैश्विक स्तर पर इस बात की नहीं छोड़ेंगे कि क

कोविड का टीका : वाक़ई है तीखा

कोविड का टीका : वाक़ई है तीखा ।     बाबा की सबसे गंदी आदत है कि इस उसकी भैंस बांध के ले आते हैं। जब भैंस से नहीं मिलती तो बकरियां बांध लेते हैं जिसको बुंदेलखंड में छिरियाँ बांध लेते हैं।     यह सोचकर हम एक बार बाबा की बाखर का वीडियो मंगाए। वीडियो में आंख घुसा घुसा के देखें तब भी हमको भैंसिया नजर नहीं आई। अपने भाइयों की बकरियां तलाशनी चाही बाबा वह भी हम को नजर नहीं आई। हमने दुर्गेश भैया से पूछा भाई वह तो कुछ नहीं है फिर आप चिल्ल-पौं काय मचाते रए हो । दुर्जन भैया हमसे गुस्सा हो गए हमको उनने फेसबुक पर ब्लॉक करने की भयंकर अपमानजनक धमकी दे डाली।      आज के दौर में अगर आपको कोई ब्लॉक कर दे उससे बड़ा अपमान विश्व में कोई हो सकता है क्या ?     सोशल मीडिया से पता चलता है कि आपका स्टेटस क्या हुआ अरे आप का डाला हुआ स्टेटस नहीं आपका समाज में स्तर क्या है ? जे बोल रहा हूं । आप समझ रहे हो ना ?    व्हाट्सएप पर ब्लॉक करना  या ग्रुप से निष्कासित कर देना दूसरा बड़ा डिफॉर्मेशन है।    मार्क जुकरबर्ग तुम आओ भारत हमारे मोहल्ले में आए तो समझ लेना हम तुम्हारी ऐसी भद्रा उतारेंगे कि तुम्हें ऐसे

एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार क्या सचमुच हुई फिशिंग का शिकार ?

NDTV   की पत्रकार निधि राजदान इन दिनों चर्चा में है। यदि वर्तमान में एनडीटीवी की भूतपूर्व पत्रकार कहा जाना ज्यादा उपयुक्त होगा क्योंकि निधि ने 2020 में ही एनडीटीवी से इस्तीफा दे दिया। 43 वर्ष की उम्र में एक शानदार स्टेटस पाने के बाद अचानक एनडीटीवी को छोड़ना विचारणीय मुद्दा तो था लेकिन कोविड-19 की आपाधापी में यह मुद्दा गंभीरता से नोटिस नहीं किया गया। बीबीसी से लेकर तमाम मीडिया चैनल्स जहां एक और निधि राजदान को फिशिंग का विक्टिम मान रहे हैं वहीं दूसरी ओर आज निधि ट्रोलिंग के मामले में सबसे बड़ी शिकार साबित हुई है। ऑप इंडिया चैनल वाले अजीत भारती हो या यूट्यूब पर लाइव चैनल चलाने वाले वन मैन प्रोड्यूसर है सभी ने अपनी अपनी भड़ास निकाली।     निधि राजदान के बारे में एक वीडियो यह भी आया कि उनके द्वारा पहले झूठ बोला गया और अब जब सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रही हैं साथ ही हावर्ड यूनिवर्सिटी से इनके विरुद्ध लीगल एक्शन की तैयारी हो रही है तो  निधि स्वयं को विक्टिम साबित करने की कोशिश कर रही हैं। जहां तक मेरा मानना है के निधि राजदान ने विषय को गंभीरता से समझे बिना कथित ईमेल का परीक्षण किए बिना

नेशनल न्यूज़ पर दहाड़ा जबलपुर का शेर

न्यू्ज नेशन से साभार         आज मकर संक्रांति के दिन न्यूज नेशन राष्ट्रीय चैनल पर "N.C.E.R.T. की 12वीं की इतिहास की पुस्तक में षड्यंत्र पूर्वक शामिल किए गए तथ्य जिसमें मुगलों को मंदिरों के विनाशक के साथ पुनर्निर्माण कर्ता बताया गया है" विषय पर एक डिबेट का आयोजन किया गया । इस डिबेट मेंं एम यू के फिरोज साहब वामपंथी प्रोफेसर सतीश प्रकाश, प्रोफेसर बद्रीनारायण  मौलाना  अली कादरी  प्रोफ़ेसर संगीत रागी , शुबही खान प्रोफेसर बद्रीनारायण के साथ जबलपुुुर प्रोफेसर डॉ आनंद राणा ने भी हिस्सा लिया। बहस  के मुद्दे पर केवल सतीश प्रकाश को छोड़कर सभी नियंत्रित रहे ।     वर्तमान में भारत के इतिहास को लेकर एक लंबी बहस छिड़ चुकी है। देश में यह स्वीकार आ गया कि आजादी के बाद जब इतिहास लिखने की बात आई तो तत्सम कालीन नीति नियंताओं इस भय से कि भविष्य में कहीं  धर्म एवं संप्रदाय को मानने वालों  के बीच में वैमनस्यता पैदा ना हो ऐसा इतिहास लिखा जाए। इस बिंदु पर जाकर मेरा मस्तिष्क अचानक बुद्धिहीनता पर चकित हो जाता है। मित्रों जैसे ही पत्रकार दीपक चौरसिया ने जो देश की बहस को संचालित कर रहे थे डॉ आनंद राणा को

बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड यू के फ़ॉर पोट्रेट में शामिल हुई स्वामी विवेकानंद की 8 हज़ार वर्ग फ़ीट अनाजों से बनी रंगोली

ग्रामीण कलाकार सतीश गुर्जर ग्राम कुकराबद जिला हरदा  एक ऐसे लोग कलाकार हैं जो अनाज का उपयोग कर विशालकाय पोट्रेट बनाते हैं। विगत सप्ताह उन्होंने अपनी 60 सदस्यीय टीम के साथ स्वामी विवेकानंद की तस्वीर रंगोली के माध्यम से हरदा डिग्री कॉलेज कंपाउंड में बनाई। इस कलाकृति के निर्माण में टीम को 3 दिन लगे। बनाई गई कृति में लगभग 50 क्विंटल अनाज का उपयोग किया गया। प्रत्यक्षदर्शी श्रीमती शुभा पारे एवं श्री राजेन्द्र गुहे बताया कि इस अनाज से बनी रंगोली को देखने विवेकानंद जयंती यानी आज 12 जनवरी 2021 से 13 जनवरी 2021 तक का समय निर्धारित है।  बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड फ़ॉर पोट्रेट यू के  में अब तक इस श्रेणी में 8000 वर्ग फीट की कृति नहीं बनी थी जिसे श्री सतीश गुर्जर एवं उनके साथियों ने बनाया। कलेक्टर हरदा तथा हरदा की विधायक उद्घाटन के मौके पर विशेष रूप से उपस्थित रहे हैं। इस कलाकृति में 10 सदस्य के रूप में बिल्लोरे परिवार की की एक बेटी का नाम भी दर्ज हो गया है ।   नार्मदीय ब्राह्मण समाज  की बिटिया कु. सलोनी बिल्लौरे  टिमरनी पिता स्व. श्री कृष्ण कांत बिल्लौरे निवासी टिमरनी भी इस में सदस्य के रूप म

कन्फ्यूज़्ड बचपन (हास्य व्यंग्य)

*1960 से 1980 तक जन्मे* इस श्रेणी के बच्चे कन्फ्यूजन की सीमाओं से आगे तक कन्फ्यूज़ड थे। पिटने के बाद पता चलता था कि हम क्यों पीटे गए थे । हमारे गाल पिटते पिटते *गलवान* तथा पीठ  पिटते पिटते *शक्ति पीठ* बन गईं हैं । हमाये शरीर मैं भगवान ने सुनने के लिए कान दिए हैं। लेकिन हमारे पेरेंट्स ने इन्हें दवा दबाकर विकासशील बना दिया है अभी तक पूर्ण विकसित नहीं हो पाए हैं। गदेलियां तो मास्साब ने छड़ी पड़े छम छम विद्या एक घमघम  के सूत्र वाक्य को प्रूफ करने में प्रयोग में लाई गई । हम 1960 से लेकर 1980 तक की पैदाइशें पप्पू गुड्डू टिंकू मुन्ना छोटे गुड्डू बड़े गुड्डू छोटा पप्पू बड़ा पप्पू आदि नाम से अलंकृत हो जाते थे ।    कई बार तो भ्रम होता था हम मनुष्य प्रजाति में हैं या गधा प्रजाति के प्राणी है क्योंकि जिसे देखो वह हमें गधा घोषित करने पर पूरी ताकत लगा देता था।     हमारे दौर में ट्यूशन सिर्फ गधे बच्चे पढ़ने जाते थे। अपने आप को होशियार बताने के चक्कर में 19 का पहाड़ा आज तक याद नहीं कर पाए पर रट्टा बकायदा मारा करते थे।   हमारी एक बुआ जी थी उन्हें तो ऐलान कर दिया था कि पढ़ेगा लिखेगा नहीं तो इ

अंग्रेज़ भारत से क्यों भागे.? लेखक :- श्रीमन प्रशांत पोळ

  *मुंबई का नौसेना आंदोलन*  -   प्रशांत पोळ  यह आर्टिकल श्री प्रशांत पोळ जी फेसबुक वॉल से आभार सहित प्राप्त किया है द्वितीय विश्वयुध्द के बाद की परिस्थिति सभी के लिए कठिन थी. ब्रिटन के तत्कालीन प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल भारत को स्वतंत्रता देने के पक्ष में नहीं थे. वे अपनी युवावस्था में भारत में रह चुके थे. ब्रिटीश आर्मी में सेकेंड लेफ्टिनंट के नाते वे मुंबई, बंगलोर, कलकत्ता, हैदराबाद आदि स्थानों तैनात थे. नॉर्थ वेस्ट फ्रंटियर प्रॉविंस में उन्होंने अफगान पठानों के विरोध में युद्ध भी लडा था. १८९६ और १८९७ ये दो वर्ष उन्होंने भारत में गुजारे. भारत की समृद्धि, यहां के राजे - रजवाडे, यहां के लोगों का स्वभाव… यह सब उन्होंने देखा था. यह देखकर उन्हें लगता था कि अंग्रेज भारत पर राज करने के लिये ही पैदा हुए हैं. इसलिये द्वितीय विश्वयुद्ध के समय विंस्टन चर्चिल की ओर से सर स्टेफोर्ड किप्स को भारतियों का सहयोग प्राप्त करने के लिए भारत भेजा गया. इस क्रिप्स मिशन ने भारतीय नेताओं को यह आश्वासन दिया गया की युद्ध समाप्त होते ही भारत को सीमित स्वतंत्रता दी जाएगी.  इस आश्वासन को देने के बाद भ

इसरो विज्ञानी तपन मिश्रा और वैज्ञानिकों की सुरक्षा की प्रासंगिकता

इसरो के वैज्ञानिक तपन मिश्रा ने दावा किया है कि उनको मारने की कोशिश की गई । आप उन स्थितियों को स्मरण कीजिए जब हमारे देश के महान वैज्ञानिक संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाए गए । जी हां स्वर्गीय विक्रम साराभाई जी । आजतक की एक रिपोर्ट के अनुसार .. चार साल में देश के 11 परमाणु वैज्ञानिकों की रहस्यमय मौत  2009 से 2013 तक कि अवधि में हुई ।   मित्रो अब सरकार को इन वैज्ञानिकों की सम्पूर्ण सुरक्षा अवश्य ही कर लेनी चाहिए ।  उम्मीद है इस नैरेटिव को एक जुट होकर स्थापित करने की ज़रूरत है । 

देहदान : की उच्चतम अनुकरणीय पहल

    श्री कर्मवीर शर्मा कलेक्टर    जबलपुर की चिंतनधारा शिक्षा, सँस्कृति, सामाजिक-सरोकारों में गहरी रुचि के तत्व मौज़ूद हैं । वे उन लोगों के लिए अत्यंत भावात्मक रूप से संवेदनशील हैं जो त्याग के लिए ततपरता प्रदर्शित करते हैं । श्रीमती अर्चना और श्री विकास खंडेलवाल ने 2021 के पहले दिन देहदान का संकल्प लिया । कलेक्टर जबलपुर श्री शर्मा  ने देहदान करने वाले परिवारों के बीच मनाया !       नया वर्ष बारह दिन में 15 लोगों ने किया देहदान जबलपुर - नए साल में समाज के लिए कुछ करने के उद्देश्य से जिले में देहदान अभियान के सूत्रधार एवं प्रणेता कलेक्टर  श्री कर्मवीर शर्मा की पहल से प्रेरित होकर जवाहर गंज गढाफाटक  निवासी विकास खंडेलवाल एवं उनकी पत्नी अर्चना खंडेलवाल, द्वारका नगर निवासी पुष्पराज और हाथी ताल निवासी श्रीमती रेखा हिरानी ने अपने परिवार के साथ आज कलेक्टर के समक्ष मरणोपरांत शरीर दान करने का इच्छा पत्र सौपा।   जिले में देहदान अभियान के सूत्रधार एवं प्रणेता कलेक्टर कर्मवीर शर्मा की पहल से प्रेरित होकर अब तक 15 लोगों ने देहदान करने की सहमति का फॉर्म भर कर दिया है। जिनमें  श्रीमती अर्चना

अविष्कारक लुइस ब्रेल को मृत्यु के 100 साल बाद राजकीय सम्मान

4 जनवरी 1809 में जन्मे ब्रेल जन्म से नेत्र दिव्यांग नहीं थे बल्कि दुर्घटना बस अपनी आंखों की रोशनी खो बैठे और फिर जानते ही हैं आप सब की आवश्यकता आविष्कार की जननी है उन्होंने एक अद्भुत अन्वेषण किया और स्पर्श प्रणाली से शब्दों को अक्षरों को पढ़ना सहज हो सके इसलिए ब्रेल लिपि का विकास किया और इससे विश्व के हर एक व्यक्ति को जो नेत्र दिव्यांग है एक नई दिशा मिली । लुइस ब्रेल 6 जनवरी 1852 में इस दुनिया को छोड़ कर चले गए । फ्रांस की सरकार ने लुईस ब्रेल के कार्य को अत्यधिक गौरवपूर्ण निरूपित करने के लिए सांकेतिक रूप से सम्मानित करने एवं यह तथ्य स्थापित करने के लिए कि-" किसी कार्य के लिए किसी को सम्मान देना सर्वोपरि है, उनके शव को कब्रगाह से निकालकर पुन: राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया ।  फ्रांसीसी अन्वेषक लुइस ब्रेल को शत शत नमन आज उनका जन्म दिवस है और 6 जनवरी 1852 को महाप्रस्थान...!

ज्योतिर्मय चिंतक : माँ ज्योति बा फुले आलेख प्रोफेसर आनंद राणा इतिहासकार

           ज्योतिर्मय चिंतक          माँ ज्योति बा फुले  आधुनिक भारत की प्रथम महिला शिक्षक, मराठी आदिकवयित्री,नारी शिक्षा और सुधार की प्रथम महानायिका -वीरांगना सावित्री बाई फुले 🙏🙏 "या देवी सर्वभूतेषु मातृरुपेण संस्थिता..विद्या रुपेण संस्थिता..सावित्री रुपेण संस्थिता.. नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:" अवतरण दिवस पर शत् शत् नमन है        लेखक प्रो. आनंद राणा     🙏 🙏 🙏🙏🙏🙏🙏 19वीं सदी में स्त्रियों के अधिकारों, अशिक्षा, छुआछूत, सतीप्रथा, बाल या विधवा-विवाह जैसी कुरीतियों पर आवाज उठाने वाली देश की पहली महिला शिक्षिका को जानते हैं? ये थीं महाराष्ट्र में जन्मीं सावित्री बाई फुले जिन्होंने अपने पति दमित चिंतक समाज सुधारक ज्योति राव फुले से पढ़कर सामाजिक चेतना फैलाई. उन्होंने अंधविश्वास और रूढ़ियों की बेड़ियां तोड़ने के लिए लंबा संघर्ष किया. आइए जानें सावित्री बाई फुले के जीवन के बारे में कि किस तरह उन्होंने अपने संघर्ष से मंजिल पाई। सावित्रीबाई ने छुआ-छूत, सतीप्रथा, बाल और विधवा विवाह निषेध के खिलाफ पति के साथ काम कियाखुद पढ़ीं ज्योतिबा राव फुले

बीबीसी की कोविड19 वैक्सीन पर जबरदस्त रिपोर्ट

विकिपीडिया में मौज़ूद जानकारी के अनुसार अमीनो अम्ल, वे अणु हैं जिनमें अमाइन तथा कार्बोक्सिल दोनों ही ग्रुप पाएं जाते हैं। इनका साधारण सुत्र H2NCHROOH है। इसमें R एक पार्श्व कड़ी है। जो परिवर्तनशील विभिन्न अणुओं का ग्रूप होता है। कार्बोक्सिल (-COOH) तथा अमाइन (-NH2) ग्रूप कार्बन परमाणु से लगा रहता है। अमीनो अम्ल प्रोभूजिन के गठनकर्ता अणु हैं। बहुत सारे अमीनो अम्ल पेप्टाइड बंधन द्वारा युक्त होकर प्रोभूजिन बनाते हैं। प्रोभूजिन बनाने में 20 अमीनो अम्ल भाग लेते हैं।यह प्रोभूजिन निर्माण के कर्णधार होते हैं। प्रकृति में लगभग बीस अमीनों अम्लों का अस्तित्व है। प्रोभूजिन अणुओं में सैंकड़ों या हजारों अमीनो अम्ल एक दूसरे से जुड़े रहते हैं। प्रत्येक प्रोभूजिन में प्रायः सभी अमीनो अम्ल एक विशेष अनुक्रम से जुड़े रहते हैं। विभिन्न अमीनो अम्लों का यही अनुक्रम प्रत्येक प्रोभूजिन को उसकी विशेषताएं प्रदान करता है।          अमीनो अम्लों का यही विशिष्ट अनुक्रम डी एन ए के  न्यूक्लोटाइडस  के क्रम से निर्धारित होता है। प्रोटीन क्या है -प्रोटीन मानव शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व हैं।  वे शरीर के ऊतकों के निर्माण

भारतीय उद्योगपतियों के पीछे क्यों पड़े हैं एक्टिविस्ट..?

【भारतीय उद्योगपति जो  भारतीय एक्टिविस्टों को असहनीय हैं 】  आर्थिक विकास के लिए जरूरी है, उत्पादन और उसका उपभोग और उत्पादित वस्तुओं का वैश्विक एवं आंतरिक विपणन ।  भारतीय कंपनियां विशेष रूप से रिलायंस एवं अदानी इन दिनों जनता के गुस्से का शिकार हैं।    भारत में रिलायंस और अदानी ग्रुप के विरुद्ध वातावरण निर्माण करने के पीछे एक खास वर्ग  भारत में भारतीय कंपनियों को हतोत्साहित करने के लिए  एक खास  तरीके से काम कर रही है । उनका अपना एजेंडा है बाबा रामदेव अंबानी एवं अदानी द्वारा स्थापित उत्पादक समूह को क्षतिग्रस्त करना ।  किसान आंदोलन के 1 माह से अधिक समय बीतते हुए एक तथ्य सामने आया है जो यह साबित करता है कि-"भारतीय कंपनियों को इतना हतोत्साहित कर दीजिए कि की वे ना तो सक्रिय रूप से उत्पादन कर सके नाही विश्व व्यापार के लायक हो सकें" किसान आंदोलन में एक नैरेटिव तेजी से फैलाया गया कि भारत सरकार ने यह तीन कानून केवल बाबा रामदेव अदानी और अंबानी जैसे व्यापारियों को लाभान्वित करने के लिए बनाए हैं। आज अचानक  नीरव  जॉनी जी के ब्लॉग पर नजर गई ।  तो पता चला कि हम भा