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बुधवार, अगस्त 27, 2008
नागफनी जिनके आँगन में

शनिवार, अगस्त 23, 2008
ज़ाकिर हुसैन चाहतें हैं सबसे सहयोग


ज़ाकिर हुसैन चाहतें हैं सबसे सहयोग : 30 जून 1982,को जन्मे ज़ाकिर-हुसैन डटें हैं मुंबई में अपने भविष्य को सवारने !आभास-जोशी के बाद मध्य-प्रदेश के अंग रहे छत्तीसगढ़ का यह गायक वास्तव में सपनों की पोटली लिए अपने मित्र अविनाश के साथ माया-नगरी में ज़ोर आज़माइश कर रहा है।संगीत के रसिकों की नजर में ज़ाकिर के हाई और लो नोड नियंत्रित हैं . गायन में सहज़ता है . इसी कारण अन्तिम दस में स्थान पाने में ज़ाकिर हुसैन सफल हुए हैं . चूंकि रियलिटी शो का वोटिंग फार्मेट ऐसा की जो वोट पाएगा वो ही आगे बड़ता जाएगा. अत: ज़ाकिर ने सहयोग की मार्मिक अपील करते हुए मुझसे गत रात्रि टेलीफोनिक बात चीत के दौरान कहा कि- मुझे नहीं मालूम कि मैं कैसे मध्य-प्रदेश के संगीत प्रेमियों तक अपनी बात रखूँ भैया अगर आप जबलपुर मीडिया के ज़रिए मेरीआकांक्षा व्यक्त करने में सहायता करें तो तो तय है कि छत्तीसगढ़ और सारा देश मिल कर मुझे और आगे तक ले जा सकता है ! छत्तीसगढ़ के इस युवक का सम्बन्ध एक सामान्य मध्यम वर्गीय परिवार से है. १२ वीं तक शिक्षित के रोज़गार का ज़रिया आर्केष्ट्रा रहा है. जन्म के एक बरस बाद पोलियो की गिरफ्त में आए ज़ाकिर की दो संतानें हैं , आभास जोशी स्नेह मंच के सदस्यों द्वारा ज़ाकिर हुसैन को वाइस-ऑफ़-इंडिया द्वितीय के पक्ष में टेली एवं एस एम् एस वोटिंग करने-कराने की अपील की है . आभास जोशी के भाई श्रेयश जोशी ने ज़ाकिर के बारे में कहा - "अपनी तरह की अनोखी आवाज़ है जाकिर की रफी के गीतों को गाने की जोखिम कम ही गायक उठातें हैं लेकिन जाकिर जिस मौलिकता के साथ सहजता से रफी साहब को स्वीकारा है उसका ही परिणाम है कि सब का ध्यान ज़ाकिर जी अपनी और खींच लेते हैं "
शुक्रवार, अगस्त 22, 2008
आभास पे फ़िदा हुए अन्नू कपूर
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| आभास पे फ़िदा हुए अन्नू कपूर |
गुरुवार, अगस्त 21, 2008
कथा महोत्सव-2008

सौजन्य =>पूर्णिमा जी
कथा महोत्सव-2008 अभिव्यक्ति, भारतीय साहित्य संग्रह तथा वैभव प्रकाशन द्वारा आयोजित
अभिव्यक्ति, भारतीय साहित्य संग्रह तथा वैभव प्रकाशन की ओर से कथा महोत्सव २००८ के लिए हिन्दी कहानियाँ आमंत्रित की जाती हैं।
दस चुनी हुई कहानियों को एक संकलन के रूप में में वैभव प्रकाशन, रायपुर द्वारा प्रकाशित किया जाएगा और भारतीय साहित्य संग्रह http://www.pustak.org/ पर ख़रीदा जा सकेगा।
इन चुनी हुई कहानियों के लेखकों को ५ हज़ार रुपये नकद तथा प्रमाणपत्र सम्मान के रूप में प्रदान किए जाएँगे। प्रमाणपत्र विश्व में कहीं भी भेजे जा सकते हैं लेकिन नकद राशि केवल भारत में ही भेजी जा सकेगी।
महोत्सव में भाग लेने के लिए कहानी को ईमेल अथवा डाक से भेजा जा सकता है। ईमेल द्वारा कहानी भेजने का पता है- teamabhi@abhivyakti-hindi.org डाक द्वारा कहानियाँ भेजने का पता है- रश्मि आशीष, संयोजक- अभिव्यक्ति कथा महोत्सव-२००८, ए - ३६७ इंदिरा नगर, लखनऊ- 226016, भारत
महोत्सव के लिए भेजी जाने वाली कहानियाँ स्वरचित व अप्रकाशित होनी चाहिए तथा इन्हें महोत्सव का निर्णय आने से पहले कहीं भी प्रकाशित नहीं होना चाहिए।
कहानी के साथ लेखक का प्रमाण पत्र संलग्न होना चाहिए कि यह रचना स्वरचित व अप्रकाशित है।
प्रमाण पत्र में लेखक का नाम, डाक का पता, फ़ोन नम्बर ईमेल का पता व भेजने की तिथि होना चाहिए।
कहानी के साथ लेखक का रंगीन पासपोर्ट आकार का चित्र व संक्षिप्त परिचय होना चाहिए।
कहानियाँ लिखने के लिए A - ४ आकार के काग़ज़ का प्रयोग किया जाना चाहिए।
ई मेल से भेजी जाने वाली कहानियाँ एम एस वर्ड में भेजी जानी चाहिए। प्रमाण पत्र तथा परिचय इसी फ़ाइल के पहले दो पृष्ठों पर होना चाहिए। फ़ोटो जेपीजी फॉरमैट में अलग से भेजी जा सकती है। लेकिन इसी मेल में संलग्न होनी चाहिए। फोटो का आकार २०० x ३०० पिक्सेल से कम नहीं होना चाहिए। कहानी यूनिकोड में टाइप की गई हो तो अच्छा है लेकिन उसे कृति, चाणक्य या सुशा फॉन्ट में भी टाइप किया जा सकता है।
कहानी का आकार २५०० शब्दों से ३५०० शब्दों के बीच होना चाहिए।
कहानी का विषय लेखक की इच्छा के अनुसार कुछ भी हो सकता है लेकिन उसमें मानवीय मूल्यों के प्रति आस्था होना ज़रूरी है।
इस महोत्सव में नए, पुराने, भारतीय, प्रवासी, सभी सभी देशों के निवासी तथा सभी आयु-वर्ग के लेखक भाग ले सकते हैं।
देश अथवा विदेश में हिन्दी की लोकप्रियता तथा प्रचार प्रसार के लिए चुनी गई कहानियों को आवश्यकतानुसार प्रकाशित प्रसारित करने का अधिकार अभिव्यक्ति के पास सुरक्षित रहेगा। लेकिन निर्णय आने के बाद अपना कहानी संग्रह बनाने या अपने व्यक्तिगत ब्लॉग पर इन कहानियों को प्रकाशित करने के लिए लेखक स्वतंत्र रहेंगे।
चुनी हुई कहानियों के विषय में अभिव्यक्ति के निर्णायक मंडल का निर्णय अंतिम व मान्य होगा।
कहानियाँ भेजने की अंतिम तिथि १५ नवंबर २००८ है।
यह विवरण http://www.abhivyakti-hindi.org/kahaniyan/2008/kathamahotsav2008.htm पर वेब पर भी देखा जा सकता है।
सोमवार, अगस्त 18, 2008
विश्व छायांकन दिवस पर विशेष : जबलपुर के महान छायाकार:-स्व.शशि यादव
बच्चन जी
मुक्तिबोध
उपेन्द्र नाथ "अश्क"जबलपुर के प्रतिष्ठित छायाकार स्वर्गीय शशिन यादव , के फोटोग्राफ'स श्वेत-श्याम श्रेणी के है उस दौर में रंगीन छाया चित्रों का न तो दौर था और न ही उस समय रंगीन फोटो ग्राफिक केमेरा का विकास ही हो सका था । फ़िर गुजरात से रोज़गार की तलाश में आया कोई शशिनजी जैसा युवक कैसे संसाधन के तौर पर जुगाड़ पाता । किंतु वे स्थानीय महत्त्व पूर्ण अवसरों को न चूकने वाले शशिन जी ने उन अवसरों को नहीं छोडा जिनसे अचानक सामना हुआ उनका .............
शुक्रवार, अगस्त 15, 2008
माँ....तुझे प्रणाम...माँ तुझे सलाम
अभिनव बिंद्रा, की कोशिश से स्वर्ण किरण ,मेरे आँगन में बिखरीं ,
और वो जो -वो पैरों से नहीं हौसलों से चलता है !"
बुधवार, अगस्त 13, 2008
"वो पैरों से नहीं हौसलों से चलता है !"
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