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दास्ताने-दफ़्तर : भाड़ में जाये संगठन तेल लेने जाये विकास हम तो ....!!

लाल फ़ीतों में बांध के लपेट के चलो या कि टोपी के नीचे समेटते चलो....

आज पोर्न स्टार हमारे स्टार हैं ....आईकान हैं ? : श्रीमति नीतूसिंह (वाराणसी.)

तुम्हारी तापसी आंखों के बारे में कहूं क्या ? अभी तक ताप से उसके मैं उबरा नहीं हूं....!!

आई.ए.एस. मनोज श्रीवास्तव : संवेदित हस्ताक्षर

कुछ समझ नहीं आता, शहर है कि सहरा है.. कहने वाला गूंगा है, सुनने वाला बहरा है..!!

जिसकी बीवी मोटी उसका ही बड़ा नाम हैं...: भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी

हिडिम्ब : क्लासिक आख्यानों की सभी खूबियों से परिपूर्ण एक दुर्लभ उपन्यास